बाबा साहब डॉ अंबेडकर की 135 वीं जयंती विशेष पर समतामूलक विचार एवं रचनापाठ गोष्ठी, 14/04/2026

          

बाबा साहेब अंबेडकर जी के जन्मदिवस के अवसर पर गोष्ठी

नदलेस की ऑनलाइन गोष्ठी बाबा साहेब अंबेडकर जी के जन्मदिवस के अवसर पर रखी गई। गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ अमित धर्मसिंह ने की एवं संचालन लोकेश कुमार ने किया। इस गोष्ठी में कवियों और लेखकों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। बाबा साहेब के दिखाए पग पर चलकर कवि और लेखकों ने अपनी साहित्यिक यात्रा पूरी करते हुए उत्कृष्ट कविताएं और विचार प्रस्तुत किए।

उक्त गोष्ठी में तेजपाल सिंह ने अपनी कविता प्रस्तुत की जिसमें उन्होंने आज के युवाओं को बिना किसी राजनैतिक दल के अपने पैरों पर खड़ा होने का आह्वाहन कुछ इस तरह किया," शिक्षा खत्म हो रही है,आरक्षण भी समाप्त हो रहा है,

बिना राजनैतिक दल के अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा।" 

उनकी दूसरी कविता भी देश के राजनैतिक संदर्भ में थी।

          "ताज़ा ताज़ा हवा चली है,चुप

            रहने से आह भली है।

            अनबन की राजधानी में 

            संबंधों की निकली पड़ी है।

D L धांधलजी ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि,"समाज में कुछ व्यक्तित्व ऐसे चमकते हैं जो समय की सीमा लांघकर चमकते हैं। बाबासाहेब का जन्म कुछ ऐसा ही रहा है। उन्होंने समाज के तिरस्कार,बहिष्कार सब को सहते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी क्योंकि वो जानते थे कि समाज में समानता का अधिकार और सम्मान वे इसी से पा सकते हैं।अपनी इच्छाशक्ति से उन्होंने यह अनहोनी भी कर दिखाई। दुनिया के एक बड़े संविधान की रचना की।" आगे धांधलजी ने बाबा साहेब के विचारों के बारे में बात की। और कहा कि "अभी एक लंबा सफर तय करना है।"

हिंदू एक हो जाओ बांटोगे तो कटोगे। यही तो आज से कई वर्ष पहले भीम राव जी ने कहा था हिंदुओं एक हो जाओ, जात पात में न बटों ।














































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