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Showing posts from October, 2021

नदलेस की कार्यकारिणी की बैठक

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नदलेस की कार्यकारिणी की बैठक (दलित साहित्य यथार्थ का साहित्य है तो कार्यक्रम भी यथार्थ ही होने चाहिए! अध्यक्ष, नदलेस) दिल्ली। नदलेस की कार्यकारिणी ने डा. कुसुम वियोगी की चार पुस्तकों पर परिचर्चा 'चार पुस्तक चार वक्ता' कार्यक्रम को लेकर दिल्ली विश्विद्यालय, नॉर्थ कैंपस, आर्ट फैकल्टी के लॉन में बैठक का आयोजन किया। बैठक की अध्यक्षता नदलेस के अध्यक्ष डा. अनिल कुमार ने की व संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। बैठक में नदलेस की संरक्षक पुष्पा विवेक, प्रचार सचिव डा. अमित कुमार, सदस्य गीता कृष्णांगी और लोकेश चौहान के अतरिक्त डा. हरकेश कुमार, अमिता महरोलिया व ज्योति कुमारी जी उपस्थित रहीं।           बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि डा. कुसुम वियोगी जी की पुस्तकों पर कार्यक्रम ऑफलाइन रखा जायेगा। इसके लिए वक्ताओं ने अपने-अपने मत कुछ इस प्रकार रखे। अध्यक्ष डा. अनिल कुमार ने कहा कि दलित साहित्य यथार्थ का साहित्य है, आभासी दुनिया का नहीं इसलिए इसके कार्यक्रम भी यथार्थ रूप में होने चाहिए। आभासी दुनिया में हम चाहे कितने ही लोगों से क्यों न जुड़े हुए हों, लेकिन रहते अकेले...

दो दलित लेखक संघों को लेकर नदलेस की विचार गोष्ठी

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दो दलित लेखक संघों को लेकर नदलेस की विचार गोष्ठी दिल्ली। नव दलित लेखक संघ की कार्यकारिणी द्वारा 'दो समानांतर दलित लेखक संघ के होने से स्वीकार्यता का संकट' विषय पर ओपन विचार गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता नदलेस के अध्यक्ष डा. अनिल कुमार ने की व संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। गोष्ठी में नदलेस की कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ-साथ कई गणमान्य साहित्यकारों ने सहभागिता और वैचारिक सक्रियता निभाई। अध्यक्षीय वक्तव्य में डा. अनिल कुमार ने बड़े ही कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग संगठन में मठाधीश बने बैठे हैं और दलित साहित्य के नाम पर केवल अपना नाम चमका रहे हैं। यह किसी भी प्रकार से उचित नहीं है। ऐसे लोग न सिर्फ संगठनों को भीतर से कमज़ोर कर रहे हैं बल्कि दलित समाज का सबसे ज्यादा अहित ये ही लोग कर रहे हैं। इसलिए ऐसे लोगों और संगठनों को चिह्नित करके उनका साहित्यिक बहिष्कार करना चाहिए। उनके साथ, न किसी प्रकार के कार्यक्रम साझा किया जाएं और न ही उनसे किसी प्रकार का साहित्यिक संबंध रखा जाए। इसके विपरित जो संगठन बेहतर कार्य कर रहे हैं और दलित साहित्य तथा सम...

कार्यकारिणी की ऑनलाइन बैठक

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रिपोर्ट  नदलेस कार्यकारिणी की ऑनलाइन बैठक नव दलेस या नव दलित लेखक संघ की कार्यकारिणी की बैठक का ऑनलाइन आयोजन गूगल मीट पर दिनांक 17 अक्टूबर 2021 को शाम सात बजे किया गया, जिसका विषय 'गत कार्यक्रम की समीक्षा, आगामी कार्यक्रम की योजना और सोच पत्रिका के प्रकाशन के संदर्भ में' था। बैठक की अध्यक्षता नदलेस के अध्यक्ष डा. अनिल कुमार ने की व संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। बैठक में नदलेस के संरक्षक डा. कुसुम वियोगी, पुष्पा विवेक, सहसचिव डा. दीपा, प्रचार सचिव डा. अमित कुमार तथा कार्यकारिणी के सदस्यों में सुशील कुमार झंझोड़, डा. सत्येंद्र कुमार, डा. विद्याराम, उमरशाह, डा. गीता कृष्णांगी, लोकेश चौहान और नीरज सौदाई उपस्थित रहे। बैठक की कार्यवाही विषय के अनुरूप तीन चरणों में बांटी गई।               पहला चरण, गत कार्यक्रम जो कि दलित साहित्यकार मुकेश मानस की स्मृति सभा के रूप में आयोजित किया गया था , उस पर सभी पदाधिकारियों ने अपने विचार अभिव्यक्त किए। सर्वप्रथम उमरशाह को गत कार्यक्रम पर अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया गया। उमर शाह ने बताया कि कार्यक्रम ...

मुकेश मानस की स्मृति सभा

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रिपोर्ट नदलेस ने मुकेश मानस पर केंद्रित स्मृति सभा 'मानस के मुकेश' का किया आयोजन  दिल्ली। गत 4 अक्टूबर 2021 को सत्यवती कॉलेज में हिंदी के एसोसिएट प्रोफेसर और एक सशक्त रचनाकार मुकेश मानस का आकस्मिक निधन हो गया था। जिसको लेकर नदलेस ने स्मृति सभा 'मानस के मुकेश' का ऑनलाइन आयोजन किया। स्मृति सभा की अध्यक्षता नदलेस के अध्यक्ष डा. अनिल कुमार ने की और संचालन सचिव डा. राम कैन ने किया। मुख्य वक्ताओं में डा. कुसुम वियोगी, रत्न कुमार सांभरिया, ईश कुमार गंगानिया, बजरंग बिहारी तिवारी और पुष्पा विवेक जी रहे। अतिथियों का स्वागत और मुकेश मानस जी का संक्षिप्त परिचय नदलेस के उपाध्यक्ष डा. अमित धर्मसिंह ने प्रस्तुत किया व धन्यवाद ज्ञापन प्रचार सचिव डा. अमित कुमार ने किया। मुकेश मानस सत्यवती कॉलेज में हिंदी के एसोसिएट प्रोफेसर थे। वे मगहर का संपादन करते थे। उनके तीन कविता संग्रह पतंग और चरखड़ी, कागज एक पेड़ है, धूप है खिली अभी, एक कहानी संग्रह 'उन्नीस सौ चौरासी', दो अनुदित पुस्तक कांचा इलैया की वाई एम नॉट ए हिंदू और एम एन राय की इंडिया इन ट्रांजिशन तथा  'मीडिया लेखन सिद्धांत और...