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Showing posts from February, 2022

नदलेस की कार्यकारिणी की अनिवार्य बैठक की कार्यवाही

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 नदलेस की कार्यकारिणी की अनिवार्य बैठक की कार्यवाही आज दिनांक 20/02/2022 को, नॉर्थ कैंपस की आर्ट फैकल्टी, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्विद्यालय के लॉन में नदलेस ने कार्यकारिणी की अनिवार्य बैठक का आयोजन किया। कार्यकारिणी में गत कार्यक्रमों की समीक्षा की गई और आगे भी इसी तरह सक्रिय रहने की बात स्वीकारी। उसके बाद उपस्थित सदस्यों ने गत पांच माह की सदस्यता का शुल्क कोषाध्यक्ष बृजपाल सहज के पास जमा किया। तदुपरांत, कार्यकारिणी विचार के अंतर्गत संगठन की बेहतरी के लिए कार्यकारिणी में कुछ आवश्यक फेरबदल के साथ कुछ नए सदस्य जोड़े गए। कार्यकारिणी में फेरबदल के अंतर्गत संबंधित सदस्यों की व्यक्तिगत समस्याओं और व्यस्तताओं के चलते संरक्षक पुष्पा विवेक के स्थान पर कर्मशील भारती जी को संरक्षक बनाया गया। उपाध्यक्ष डा. अमित धर्मसिंह की जगह पुष्पा विवेक को उपाध्यक्ष बनाया गया और सचिव डा. राम कैन की जगह डा. अमित धर्मसिंह को महासचिव बनाया गया। इस्तीफा दे चुकी सह सचिव दीपा दमन वर्मा के स्थान पर अमिता मेहरोलिया को सहसचिव बनाया गया। सदस्य लोकेश चौहान के स्थान पर इंदु रवि जी को सदस्य बनाया गया। इसके अतिरिक्त कार्य...

दो दलित लेखक संघ के कारण उपजी समस्या - निवारण के उपलक्ष्य में कार्यक्रम

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             नव दलित लेखक संघ ने दो दलित लेखक संघों के कारण उपजी समस्या - निवारण के उपलक्ष्य में नदलेस ने किया 'एक शाम अनिता भारती के नाम' कार्यक्रम का नव दलित लेखक संघ ने एक शाम अनिता भारती के नाम कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसकी अध्यक्षता डा. अनिल कुमार ने की व संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। यह कार्यक्रम इसलिए रखा गया कि लंबे समय से चले आ रहे एक ही नाम वाले दो दलित लेखक संघों की वजह पैदा हुआ स्वीकार्यता का संकट आखिरकार हल हो ही गया। साहित्यकारों के बहुमतीय जनाधार ने अनिता भारती वाले दलित लेखक संघ को स्वीकृति दी और दूसरे वाले को दलित लेखक संघ मानने से इंकार कर दिया। ज्ञात हो कि 2019 में दलित लेखक संघ का विभाजन हो गया था। तभी से लेकर दलित लेखक संघ नाम से दो संगठन चले आ रहे थे। जिनकी वजह से स्वीकार्यता, जुड़ने और अध्ययन संबंधी बहुत से संकट पैदा हो गए थे। इनके निदान के लिए नदलेस ने एक मुहिम चलाई और साहित्यकारों के मत और विचारों वाला एक प्रस्ताव पत्र तैयार किया। करीब पचास पेज़ से अधिक वाले इस प्रस्ताव पत्र में सैकड़ों साहित्यकारों ने दलित लेखक संघ क...

रविदास की 645 वीं जयंती पर हुए कार्यक्रम की रिपोर्ट

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   रिपोर्ट : रविदास जयंती पर नदलेस ने किया स्वतंत्र काव्य पाठ एवं विचार गोष्ठी का आयोजन सामाजिक क्रांति के अग्रदूत रविदास जी की 645 वीं जयंती पर स्वतंत्र काव्य पाठ एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें रविदास द्वारा सामाजिक समानता के लिए किए गए रचनात्मक कर्म को याद करते हुए सभी कवियों ने अपनी अपनी कविता के माध्यम से अपने अपने उद्गार व्यक्त किए। इन उद्गारों में सामाजिक न्याय, परिवर्तन और समानता की छटपटाहट थी। समाज में फैले जातिवाद, पुरुषवाद, पितृसत्ता, धार्मिक अंधविश्वास व रूढ़ीवाद के प्रति सटीक और तार्किक आक्रोश था। वैचारिक विद्रोह इन कविताओं का मूल स्वर रहा। गोष्ठी की अध्यक्षता डा. अनिल कुमार ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। रविन्द्र प्रताप सिंह ने अपनी पहली कविता में इंडिया और भारत के अंतर को स्पष्ट किया तो दूसरी कविता में उन्होंने प्रकृति के सौंदर्य से बढ़कर जीवन की बेसिक जरूरतों को बताया। समाज में पुरुषसत्ता के विरुद्ध बिगुल फूंकते हुए 'पेट का आयतन' कविता में उन्होंने कुछ यूं पढ़ा - "मैं चाहता हूं कि मेरे नाम के आगे मेरी मां का नाम दर्ज किया जाय, बसंत के...

दो दलित लेखक संघों को लेकर फाइनल रिपोर्ट

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रिपोर्ट दो दलित लेखक संघों को एक कराने हेतु दिए गए प्रस्ताव पत्र को लेकर नदलेस ने किया समीक्षा एवं निष्कर्ष बैठक का आयोजन दिल्ली। नव दलित लेखक संघ ने "दो दलित लेखक संघों को एक कराने हेतु दिए गए प्रस्ताव पत्र की समीक्षा एवं निष्कर्ष बैठक" का ऑनलाइन आयोजन किया। जिसमें उक्त विषय पर उपस्थित सभी रचनाकारों के मत एवं विचार आमंत्रित किए गए। बैठक की अध्यक्षता डा. अनिल कुमार ने की एवं संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। सर्वप्रथम डा. अमित धर्मसिंह ने विषय की गंभीरता और उसकी पृष्ठभूमि पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। सर्वविदित है कि 15 अगस्त 1997 में गठित हुए दलित लेखक संघ में हमेशा ही विभाजनकारी लोग सम्मिलित होते रहे, जिन्होंने दलित लेखक संघ से अधिक निजी हित को वरीयता दी। परिणामस्वरूप कभी दलित लेखक संघ विवाद का विषय बना और कभी दलित लेखक संघ में बहुत से विवाद पनपे। कई लोग जो दलित लेखक संघ के कारण ही सामने आएं उन्होंने भी अपनी महत्त्वाकांक्षा के चलते अलग-अलग गुट और संगठन बना लिए। कइयों ने दलित लेखक संघ के संबंधित पदों पर आसीन होकर उनका जी भरकर दुर्पयोग किया। लेकिन इन सारे मामलों में दलित लेखक संघ...