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Showing posts from March, 2022

नदलेस की ओपन काव्य एवं विचार गोष्ठी

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  नदलेस के मंच से बही काव्य धारा कल शाम नदलेस की ओपन मासिक गोष्ठी संपन्न हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता पुष्पा विवेक ने और संचालन डा. अमिता महरोलिया ने किया। काव्य पाठ करने वालों में डा. नाविला सत्यादास, आर एस आघात, समय सिंह जोल, गीता कृष्णांगी, देव प्रसाद पातरे, अमित धर्मसिंह, पुष्पा विवेक आदि कवि रहे। एक से बढ़कर एक, गंभीर मार्मिक और सार्थक कविताएं पढ़ी गईं। पुष्पा विवेक का अध्यक्षीय वक्तव्य सार्थक रहा। डा अनिल कुमार की टिप्पणी प्रेरणीय रही। सभी कवियों का स्वागत और धन्यवाद ज्ञापन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। साथ ही नदलेस द्वारा तैयार किए जाने वाले भारतीय दलित साहित्य एवं साहित्यकार कोश की महती परियोजना की समुचित जानकारी भी दी। गोष्ठी में रामदास बारली, बृजपाल सहज, आर्य मंजू, आदि उपस्थित रहे। गोष्ठी अपेक्षकृत सफल रही।

भारतीय दलित साहित्य एवं साहित्यकार कोश निर्माण के संदर्भ में नदलेस की ऑनलाइन मीटिंग की रिपोर्ट

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रिपोर्ट दलित साहित्य एवं साहित्यकार कोश निर्माण को लेकर नदलेस ने की ऑनलाइन बैठक  भारतीय दलित साहित्य और साहित्यकार कोश निर्माण को लेकर नदलेस ने ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी की अध्यक्षता डा. अनिल कुमार ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। सभी वक्ताओं ने माना कि दलित साहित्य में कोश निर्माण की महती आवश्यकता है। सभी ने कोश निर्माण में सहयोग करने की सहमति दिखाई। उपस्थित सभी साहित्यकारों ने माना कि दलित साहित्य को लेकर आज जो भी असमंजस की स्थिति है, वह कोश निर्माण से दूर होगी। अध्येताओं, शोधार्थियों को कोश से बड़ी मदद पहुंचेंगी। साथ ही दलित साहित्य के तात्विक इतिहास को स्थायित्व मिल सकेगा। अध्यक्षीय वक्तव्य में डा. अनिल कुमार ने कहा कि दलित साहित्य एवं साहित्यकार कोश निर्माण की नदलेस की यह परियोजना हर एंगल से बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। इसके लिए नदलेस की संपूर्ण टीम बधाई की पात्र है। खासतौर से कोश निर्माण की परिकल्पना करने वाले नदलेस के वर्तमान महासचिव डा. अमित धर्मसिंह महती बधाई के पात्र हैं। वास्तव में कोश निर्माण का यह कार्य बहुत अधिक श्रम का कार्य है, किंतु यदि एक बार यह हो...

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 'मेरे पंख मेरी उड़ान' काव्य गोष्ठी

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नदलेस के बैनर तले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हुए  आज के सफल कार्यक्रम की कुछ झलकियां सुशीला टांक भौरे, चंद्रकला, बिंदिया, इंदु रवि आदि सभी कवयित्रियों ने बड़ी सशक्त कविताएं प्रस्तुत की। अध्यक्षता पुष्पा विवेक ने की व संचालन अमिता मेहरोलिया ने किया। उपस्थित रचनाकारों में रवि निर्मला सिंह, आर. एस. मीणा, उमेश राज, आर. एस. आघात, नरेंद्र वाल्मीकि, डा. अनिल कुमार, डा. अमित धर्मसिंह आदि उपस्थित रहे।  

नदलेस की ओपन मासिक गोष्ठी

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रिपोर्ट : नदलेस ने किया ऑनलाइन ओपन मासिक गोष्ठी का आयोजन नव दलित लेखक संघ ने ओपन मासिक गोष्ठी के अंतर्गत मुक्त काव्य पाठ का ऑनलाइन आयोजन किया। जिसमें उपस्थिति के क्रम के अनुसार कवियों का काव्य पाठ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. अनिल कुमार ने की व संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। गोष्ठी में सामाजिक न्याय और परिवर्तन के लिए जन जागरण की एक से बढ़कर एक कविता प्रस्तुत की गई। गोष्ठी में लखनऊ से उपस्थित रहे एस. एन. प्रसाद ने वर्णव्यवस्था के पोषकों पर करारा कटाक्ष करते हुए कई कविताएं और ग़ज़लें प्रस्तुत की। उनके द्वारा पढ़ी गई एक रचना की पंक्तियां कुछ इस प्रकार रही- "वर्णव्यवस्था के पूजक मिल, बंचित जन का रुधिर पिये हैं। इनसे लड़ अपना हक छीनो, पग पग ये छल कपट किये हैं।" रामपुर उत्तर प्रदेश से गोष्ठी में जुड़े अमित कुमार बौद्ध ने अपनी रचनाओं के माध्यम से दलित समाज को जगाने का प्रयास करते हुए पढ़ा- "भोर बहुजन हो गयी, अब जीओ खुशहाल तुम। हक मिले, फिर क्यों पड़े आज भी बदहाल तुम।। भुखमरी,असहाय,पीड़ित सभी क्यों हो तुम्हीं। छीन हक अपने बनो आज मालामाल तुम।।" नदलेस की उपाध्यक्ष प...