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सघन विवेचना के बाद पारित हुआ नदलेस का संविधान, 28/08/2022

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रिपोर्ट सघन विवेचना के बाद पारित हुआ नदलेस का संविधान           नदलेस के संविधान को अंतिम रूप देने के लिए नव दलित लेखक संघ की अनिवार्य बैठक का आयोजन, दिल्ली विश्विद्यालय के नॉर्थ कैंपस के आर्ट फैकल्टी लॉन में किया गया। बैठक में गहन विवेचन, विश्लेषण और आवश्यक संशोधनों के पश्चात सर्वसम्मति से नदलेस का संविधान पारित हुआ। नदलेस के संविधान का मसौदा, नदलेस के वर्तमान  महासचिव डा. अमित धर्मसिंह ने तैयार किया। संविधान का प्रारंभिक मसौदा 28 सितंबर, 2021 को नदलेस की ही बैठक में प्रस्तुत किया गया था। प्रेक्टिकली अनुभव जोड़ने हेतु उस समय संविधान का प्रकाशन स्थगित कर दिया गया था। गत ग्यारह माह के सांगठनिक और रचनात्मक अनुभवों को जोड़ते हुए, आज संविधान को पारित किया गया। शीघ्र ही इसका प्रकाशन किया जाएगा ताकि संविधान का सांगठनिक उपयोग किया जा सके। बैठक में संविधान का प्रभावी वाचन डा. गीता कृष्णांगी और लोकेश चौहान ने किया। अध्यक्षता डा. अनिल कुमार ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। बैठक में बंशीधर नाहरवाल, कर्मशील भारती, पुष्पा विवेक, डा. अमिता मेहरोलिया, बृजपाल सहज...

सोच पर परिचर्चा गोष्ठी

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  रिपोर्ट नदलेस की पत्रिका सोच पर परिचर्चा गोष्ठी का आयोजन           नव दलित लेखक संघ की पत्रिका सोच के प्रथम अंक पर ऑनलाइन परिचर्चा गोष्ठी 10 अगस्त 2022 को रखी गई। सोच के इस अंक का संपादन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। परिचर्चा गोष्ठी अपेक्षा से अधिक सफल और सार्थक रही। कारण कि परिचर्चा गोष्ठी निर्धारित समय से दो घंटे अधिक चली। वक्ताओं ने जमकर विचार रखे। वक्ताओं में पंजाब से सरुप सियालवी और डा. नविला सत्यादास; दिल्ली से कर्मशील भारती और डा. कुसुम वियोगी; महाराष्ट्र से दामोदर मोरे और राजस्थान से रत्नकुमार सांभरिया जी जुड़े; जिन्होंने सोच पर हर दृष्टि से सारगर्भित विचार अभिव्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने संपादक डा. अमित धर्मसिंह के संपादकीय कौशल के साथ-साथ सोच में प्रकाशित सभी रचनाकारों की रचनाओं का पर्याप्त संज्ञान लिया। खासतौर से रत्नकुमार सांभरिया, अनिल बिडलान, सतीश खनगवाल, राजेश पाल और नंदलाल की कहानियों;  आर जी कुरील, पुष्पा विवेक, शीलबोधि, ईश कुमार गंगानिया, भूपसिंह भारती, बजरंग बिहारी और दीपक मेवाती के लेखों; समय सिंह जोल, राजेश कुमार बौद्ध और कुसुम वियोगी...