नदलेस की पुस्तक परिचर्चा एवं काव्य पाठ गोष्ठी, 17/01/2026, संयोजक : गौतम प्रकाश


नदलेस ने की पुस्तक परिचर्चा एवं रचनापाठ गोष्ठी 

          17 जनवरी,2026 शनिवार के दिन नवदलित लेखक संघ (नदलेस) की मासिक गोष्ठी गौतम प्रकाश जी के वसुंधरा स्थित निवास पर डॉ अमित धर्मसिंह जी की अध्यक्षता में हुई। गोष्ठी का संचालन लोकेश ने किया। गोष्ठी दो सत्रों में रखी गई। पहले सत्र में बंशीधर नाहरवाल की नई आमद ‘भारतीय नारी की त्रासदी’ का समूहिक विमोचन किया गया। तदुपरान्त इस पुस्तक की समीक्षा मदन लाल राज ने की। मदन लाल राज ने समीक्षा में बताया- इतिहास के सभी काल खंडों में नारी को त्रासदी का सामना पितृसत्ता के चलते करना पड़ा यह त्रासदी आज भी जारी है। पूर्व वैदिक काल से लेकर वैदिक काल, बौद्धिक काल, महाभारत काल, आधुनिक काल तक नारी शोषण का शिकार रही है। फिर चाहे वह देवदासी के रूप में हो, सती के रूप में हो या जौहर के नाम पर प्राणों का चुकाया गया मोल हो। इस त्रासदी को सवर्ण स्त्रियों के मुक़ाबले दलित एवं आदिवासी स्त्रियों ने गई गुणा झेला है। यह दलित नारी विरोधी मानसिकता आज भी हमारे समाज में बदस्तूर जारी है। उन्होने बताया किताब में नारी के प्रति बरती गई बर्बरता का मुद्दा बखूबी उठाया गया है। यह पुस्तक नारी की दारुण स्थिति का सजीव विवरण प्रस्तुत करती है। वहीं डॉ अमित धर्म सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में किताब में पाई गई त्रुटियों पर प्रकाश डाला। उन्होने कहा लेखक ने पूर्व वैदिक काल से लेकर आधुनिक काल तक त्रासदी को झेल रही नारी की बात तो की किन्तु उन कालखण्डों के संदर्भों का कहीं भी जिक्र नहीं किया गया। इस तरह बिना संदर्भ उदाहरण के नारी की व्यथा कथा बनकर रह जाती है यह एक परिपक्व लेखक की लेखनी के उथलेपन को दर्शाता है। उन्होने यह भी कहा - कि पुस्तक नारी की दशा का वर्णन तो करती है लेकिन कोई दिशा नहीं देती। इसमें, ऐतिहासिक विधि, मौलिक दृष्टि, संदर्भ सूची, आभार ज्ञापन आदि का अभाव ख़लता है बावजूद इसके लेखक का प्रयास नारी त्रासदी का बखान करने में कामयाब रहा। लेखक को इस किताब के लिए बहुत बहुत बधाई। 
भोजन उपरांत गोष्ठी का दूसरा सत्र काव्य गोष्ठी का रहा जिसमें उपस्थित सभी कवियों ने अपनी कविताएं मुक्त कंठ से सुनाई। शुरुआत सलीमा जी ने एक गजल से की–  न वो गम कुश्ता होता, न वो यूं खतावार होता। खुदकशी होती जो जायज, ये गुनाह मुझसे कई बार होता॥ बंशीधर नाहरवाल- देवियों के देश में हैं देवियाँ परेशान, देवताओं ने बस दासता सिखाई है। खुद बन बैठे इन अबलाओं के भगवान, मार कोड़े सेवा पूजा ही कराई है॥ भोला सिंह मधुर– छाया अब तो देश में नया आतंकवाद, अरु जाति पूछकर मारते और करते बर्बाद॥ अरु करते बर्बाद, कहाँ अब व्यथा सुनाएँ, करे रेप बेखौफ, दलित नारी मिल जाए। मधुर प्रशासन मौन, देखने में ये आया। फ़ेल रहा आतंक इसकी ही तरु छाया।।
बिजेन्द्र पाल सिंह ‘मयंक’ -इश्क का बीमार मैं भी हूँ तू भी है, जमाने से लाचार तू भी है मैं भी हूँ। छप रहे रोज अखबार में देख ये अखबार तू भी है मैं भी हूँ। माम चंद सागर- चलो चमन से बहार लाएँ ,गुलों से मांग उनका दुलार लाएँ । रह गई जो बुलबुल वहीं पर, कंठ में उसकी पुकार लाएँ। जोगेन्द्र सिंह – फिर उसने पढ़ी आजादी की किताबें , पत्नी को उसने आजाद कर दिया और आजादी मिलते ही पत्नी किसी और के साथ फरार हो हो गई। राजवीर सिंह निम – बाबा साहब के तीन मंत्र, शिक्षित बनो,संघर्ष करो , तीनों को फ़ेल कर रहे बाबा के तथाकथित अनुयाई।
इन्द्र जीत सुकुमार– अनगिनित सब कामनाएँ, कौम पर वार देना । मन मनुजता के लिए , चुपचाप सब कुछ हार देना॥
देवराज सिंह देव – सम्मान से गर जीना दलितों, तो हीनता को छोड़ दो, घृणा करने वालों से अब तो नाता तोड़ दो। मदन लाल राज – इलाहाबाद में नाविक घाट पर, देखने पहुंचे त्रिवेणी का नजारा। मित्र नहा रहे थे, मैं नहीं नहाया, देखकर गंदगी से भरा किनारा॥
पुष्पा विवेक – मोदी जी के मन की बात होती बहुत लुभावनी है, मीठी छुरी से हलाल करते ,देश की हित बात कहते ।  
आरसी विवेक -ये ताज मेरे सिर पर संविधान से मिला, औरों को मिला होगा मुकद्दर से मुझे मेरा मुकद्दर भी संविधान से मिला । 
गौतम प्रकाश – तुम पंख फैलाए फिरती हो, मेरे घर के आँगन में। लोकेश - खो गई जो पहचान उसे पाने की जिद है, संविधान को बचाने की अब जिद है। सुशीला गौतम - जैपनीज बुद्धिज़्म से जुड़े अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किए।
डॉ अमित– "हमें डर है कि हमारे अधिकार में सूंघी जा सकती स्वार्थ कि बू।" एवं "अपने टूटने कि दलक घर पहुँचने के ख्याल से भी डर जाता हूँ मैं।" इसी के साथ उन्होने गोष्ठी के दूसरे सत्र के अध्यक्षीय भाषण में सभी कवियों को सराहा और भूरी भूरी प्रशंसा की। अंत में सभी का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन गोष्ठी संयोजक गौतम प्रकाश जी ने किया। गोष्ठी बेहद शानदार रही एवं चाय की चुस्कियों के साथ सपन्न हुई। 

रिपोर्ट – माम चंद सागर
प्रचार सचिव, नदलेस 
18/01/2026










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