प्रमोद वालके 'युगंधर'के मराठी ग़ज़ल संग्रह प्रश्नांची गझल पर ऑनलाइन परिचर्चा, 30/11/2025 को हुई

        

नदलेस की ग़ज़लशाला–ग्यारह के अंतर्गत

प्रमोद वालके 'युगंधर' के मराठी ग़ज़ल संग्रह प्रश्नांची गझल पर हुई ऑनलाइन परिचर्चा 

         नव दलित लेखक संघ, दिल्ली द्वारा ग़ज़लशाला-ग्यारह के अंतर्गत दिनांक 30 नवंबर 2025 को शाम 5:30 बजे ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। नदलेस के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. अमित धर्मसिंह की अध्यक्षता में इस गोष्ठी को संपन्न किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन लोकेश कुमार ने किया। ग़ज़लशाला में हिंदीत्तर भाषा मराठी ग़ज़ल संग्रह ‘प्रश्नांची गझल’ पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। मराठी के प्रसिद्ध ग़ज़लकार प्रमोद वाळके ‘युगंधर’ के इस ग़ज़ल संग्रह पर तीन वक्ताओं क्रमशः डॉ. प्रकाश राठोड, डॉ. सर्जनादित्य मनोहर एवं शेखर पंवार ने वक्तव्य दिया। 
         पहले वक्ता डॉ. प्रकाश राठोड ने मराठी भाषा में ग़ज़ल संग्रह पर प्रकाश डालते हुए कुछ महत्वपूर्ण बातें बतायी कि ‘इनकी यह ग़ज़लें अम्बेडकरवादी की प्रेरणा देते हुए निखड़ अम्बेडकरवादी ग़ज़लें हैं जो कि मानव मुक्ति की बात करती हैं’। दूसरे वक्ता डॉ. सर्जनादित्य ने भी मराठी में अपनी बात रखते हुए बताया कि अम्बेडकरवादी ग़ज़ल में वामन दादा एक महत्वपूर्ण नाम हैं जिनसे प्रेरणा प्राप्त कर ग़ज़लकारों ने अम्बेडकरवादी ग़ज़लों की राह को सशक्त कर पाए हैं। इन्होंने आगे प्रस्तुत संग्रह पर परिचर्चा करते हुए कहा कि इनकी यह ‘ग़ज़लें वैश्विक स्वरूप की ग़ज़लें हैं और गंभीर स्वभाव की ग़ज़लें हैं साथ ही ये ग़ज़लें क्रांतिकारी भी हैं’। तीसरे वक्ता शेखर पंवार जी ने अपना वक्तव्य हिंदी में देते हुए सर्वप्रथम पूर्व के दोनों वक्ताओं के वक्तव्य को संक्षेप रूप में हिंदी में बताते हुए ग़ज़ल का सिनेमा के साथ संबंध को बताया और इनकी ग़ज़लों को अम्बेडकरवाद से ओतप्रोत बताया और लेखक की सराहना की। तत्पश्चात, विशेष टिप्पणीकार के तौर पर नंदू जी ने बहुत ही सारगर्भित टिप्पणी करते हुए ग़ज़ल संग्रह के साथ-साथ परिचर्चा गोष्ठी को भी बेहद सार्थक सफल और महत्त्वपूर्ण बताया।
          वक्ताओं के वक्तव्य के बाद ग़ज़लकार प्रमोद वाळके ‘युगंधर’ ने अपनी ग़ज़ल यात्रा का संक्षिप्त परिचय देते हुए कुछ ग़ज़लों का पाठ भी किया। अंत में डॉ. अमित धर्मसिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में तीनों वक्ताओं के वक्तव्य के केन्द्रीय पक्षों को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि वास्तव में ‘युगंधर’ जी की अधिकतर ग़ज़लें अंबेडकर के विचारों से परिपूर्ण हैं और दलित-वंचितों के उत्थान के लिए एक अहम आवाज़ बनकर समाज को जागृत करेंगी। साथ ही वामन दादा पर भी संक्षिप्त में अपने विचार प्रस्तुत करते हुए अंबेडकरवादी ग़ज़ल के उत्थान में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। इससे आगे अमित धर्म सिंह ने कहा कि इनके ग़ज़ल संग्रह की एक बड़ी विशेषता यह है कि किसी वक्ता ने भी इनकी ग़ज़लों के शास्त्रीय पक्षों पर टिप्पणी नहीं क्योंकि इनकी ग़ज़लों में ग़ज़ल के नियमों का यथा संभव पालन किया गया है। 
          आखिर में ग़ज़लकार आर. पी. सोनकर जी ने सभी वक्ताओं ग़ज़लकार, अध्यक्ष, संचालक एवं कार्यक्रम में देश भर से जुड़े साथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस गोष्ठी में देशभर से जुड़े साथियों में डॉ. पूरन सिंह, दिलीप पाटिल, अनीता, सुशील मानव, मसूद पटेल, नन्द किशोर, आज़ाद सिंह शारवत, सुषमा डोंगरे, शंकर लाल, संजय कुमार मेश्राम, विक्रम कुमार, महेंद्र ताजने, बंशीधर नाहरवाल, दिनेश कुमार, ओमप्रकाश गौतम, पदम प्रतीक, ज्ञानेन्द्र कुमार, अंगद कुमार, अशोक लोंढे, नयन सिंह, विनोद बांगड़े, धबरड़े अभय, अदल सिंह, रवि चापके, सलीमा, राम सोनकर, चितरंजन गोप लुकाटी, ममचंद सागर, प्रसेनजीत गायकवाड़ डॉ. एम.एन. गायकवाड़, सुनीता, वज्जी, अशोक जाधव आदि रहे। 

रिपोर्ट
लोकेश कुमार 
सचिव, नदलेस 
07/12/2025
































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