ग़ज़लशाला -नौ, धनक ग़ज़ल संग्रह, लेखक : श्याम लाल राही 'प्रियदर्शी', 30/10/2025
श्याम लाल राही 'प्रियदर्शी' के ग़ज़ल संग्रह धनक पर नदलेस ने की ऑनलाइन परिचर्चा गोष्ठी
दिल्ली। नव दलित लेखक संघ दिल्ली के तत्वाधान में 30 अक्टूबर, 2025 को डॉ. अमित धर्मसिंह की अध्यक्षता में ऑनलाइन गजल गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वरिष्ठ उपन्यासकार एवं गजलकार श्याम लाल राही ‘प्रियदर्शी’ के गजल संग्रह ‘धनक’ पर विस्तृत चर्चा हुई। इस चर्चा में प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार इंद्रजीत सुकुमार, डॉ आरती एवं माम चंद सागर ने मुख्य वक्ताओं के रूप में शिरकत की। सभी वक्ताओं ने अपने बेबाक विचार रखे। विशेष टिप्पणीकार के रूप में एस एन प्रसाद एवं रूप सिंह ‘रूप’ ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। गोष्ठी का संचालन लोकेश कुमार ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन नदलेस की पूर्व अध्यक्ष पुष्पा विवेक ने किया। गोष्ठी सांय 6 बजे शुरू हुई और 9 बजे तक सम्पन्न हुई।
प्रथम वक्तागण के रूप में डॉ आरती ने गजलों में दलित सरोकारों की पैरवी करते हुए ‘धनक’ के मयार पर रोशनी डाली। उन्होने कहा श्याम लाल राही ने अपनी गजलों में समाज में व्याप्त दलित उत्पीड़न और सामाजिक विभेद को रविदास, फुले और अंबेडकर के चश्में से देखा है। इसके अलावा उन्होने प्रेम और प्रकृति के पहलुओं को बखूबी दर्शाया है। अगले वक्ता माम चंद सागर ने सबसे पहले श्याम लाल राही को उनकी पुस्तक के लिए बधाई दी। गजलों पर अपनी बात रखते हुए कहा – ‘धनक’ की गजलें सामाजिक दस्तावेज़ है जो कि प्रश्न और प्रतिरोध की चिंगारी समेटे हुए है। अधिकतर गजलों का स्वर आक्रोश से भरा है। शिल्प की दृष्टि से भी काफिया, रदीफ़ का अनुशासन खूब निभाया है। थोड़ा बहर में मात्राओं का गणित कुछ बिगड़ा है। इन सबके बावजूद गजल की ताकत के रूप में संवेदनात्मक सादगी पाठकों को खूब लुभाएगी। तीसरे वक्ता इंद्रजीत सुकुमार ने गजलों पर विस्तृत चर्चा की सबसे उन्होने गजलकार को इस बात के लिए सराहा कि वे पिछले 50 वर्ष से निरंतर गजल लिख रहे हैं। लेखक ने 23 उपन्यासों की भी रचना की है यह उनकी रचनाधर्मिता का एक बड़ा उदाहरण है। उनकी गजलों में व्याकरण से संबधित कुछ त्रुटियाँ हो सकती हैं किन्तु उनके मयार का भाव पक्ष इतना मजबूत है कि पाठक को सहज ही अपने मोहपाश में बांध लेती हैं। ‘धनक’ जिसका अर्थ होता है इन्द्रधनुष उसीके अनुरूप उनकी गजलों में सारे रंग भरे हैं सबको सब उनकी पसंद अनुसार इन गजलों में मिल जाएगा। गजलकार ने दलित सरोकारों को मुख्य स्वर में पिरोया है जिसमें रविदास,फुले से लेकर बाबा भीम के संघर्षों का जिक्र किया है।
गजल गोष्ठी में उपस्थित विशेष टिप्पणीकार एस एन प्रसाद एवं रूप सिंह ‘रूप’ ने अपने वक्तव्य में कहा -श्याम लाल राही एक वरिष्ठ साहित्यकार हैं वह पिछले 50 वर्ष से भी अधिक समय से लिखने और छपने का काम कर रहे हैं। अभी तक उन्होने करीब 60 गजल संग्रह और 23 उपन्यास लिख डाले हैं और यह लिखने का सिलसिला अभी तक अनवरत जारी है। हम उनकी इस प्रतिभा का बहुत सम्मान करते हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करते हैं। ‘धनक’ का मूल स्वर दलित और प्रकृति के सरोकारों से जुड़ा है। अंत में लेखकीय वक्तव्य में श्याम लाल राही ने अपनी जीवन यात्रा में लेखन का आकर्षण उन्हे कैसे खींच लाया इस पर बात की । पेशे से वह अँग्रेजी के अध्यापक थे। नौकरी में रहते विभिन्न राज्यों में तबादला हुआ और भिन्न भिन्न जगहों की अनुभूति उनके लेखन में आई। अध्यक्षीय भाषण में डॉ अमित धर्म सिंह ने गजलों की बारीकियों पर प्रकाश डाला। गजल के शिल्प,बिम्ब, रदीफ़, बहर, और मिसरों की मात्राओं जैसी बारीकियों पर टिप्पणी की। उन्होने कहा- ‘रचना धर्मिता शगल की वस्तु नहीं हो सकती।‘
रिपोर्ट - माम चंद सागर
31/10/2025




































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