लोकार्पण : डॉ. अमित धर्मसिंह की काव्यमय आत्मकथा 'हमारे गाँव में हमारा क्या है!' के विविध पाठ, भाग 2 (सम्पादक : डॉ. नविला सत्यदास), 20/07/2025



                     लोकार्पण एवं काव्यपाठ गोष्ठी

         दिल्ली। नव दलित लेखक संघ की मासिक गोष्ठी का आयोजन 20 जुलाई, 2025 को, लोनी गाजियाबाद स्थित बृज विहार कालोनी में हुआ। इसका संयोजन बृजपाल सहज ने किया। अध्यक्षता बंशीधर नाहरवाल ने की एवं संचालन मामचंद सागर ने किया। गोष्ठी दो चरणों में विभक्त रही। पहले चरण में डॉ. नविला सत्यादास द्वारा संपादित पुस्तक डॉ. अमित धर्मसिंह की काव्यमय आत्मकथा 'हमारे गाँव में हमारा क्या है के विविध पाठ, भाग-2 (समीक्षा संकलन) का लोकार्पण हुआ। दूसरे चरण में उपस्थित रचनाकारों का काव्यपाठ हुआ। गोष्ठी में राजवीर सिंह निम, मदनलाल राज़, डॉ. अमित धर्मसिंह, डॉ. गीता कृष्णांगी, पुष्पा विवेक, एदल सिंह, महिपाल त्रिपाठी, लोकेश कुमार, बृजपाल सहज, जोगेंद्र सिंह, देवीसिंह, सिया, नरेश कुमार, राधेश्याम कांसोटिया, देवेंद्र कुमार, मयंक कुमार, मामचंद सागर और सलीमा आदि उपस्थित रहे। सभी ने पहले लोकार्पित हुई पुस्तक पर अपने अपने विचार प्रस्तुत किए। माना कि किसी पुस्तक पर समीक्षा की दूसरी पुस्तक प्रकाशित होना अपनेआप में बड़ी बात है। असल में यह कामयाबी डॉ. अमित की मूल पुस्तक काव्यमय आत्मकथा 'हमारे गाँव में हमारा क्या है! की है कि उसने देशभर के पाठक, समीक्षक और आलोचक को अलग अलग ढंग से प्रभावित किया है। समीक्षा की दोनों पुस्तकों से एक बात जो कॉमन रूप से उभरकर सामने आई है, वह यह है कि डॉ. अमित धर्मसिंह की मूल पुस्तक यानी हमारे गाँव में हमारा क्या है, न सिर्फ दलित साहित्य की अपितु संपूर्ण साहित्य की पहली काव्यमय आत्मकथा बन गई है। गोष्ठी के अंत में सभी उपस्थित रचनाकारों का काव्य पाठ हुआ। उपस्थित सभी रचनाकारों का धन्यवाद ज्ञापन गोष्ठी संयोजक बृजपाल सहज ने किया।
           डॉ. नविला सत्यादास द्वारा संपादित यानी आज लोकार्पित हुई पुस्तक पर सोशल मीडिया से प्राप्त कुछ विशेष टिप्पणीयों को इस प्रकार दर्ज किया गया है। एस एन प्रसाद, लखनऊ से लिखते हैं कि "हमारे गांव में हमारा क्या है" की समीक्षात्मक पुस्तक प्राप्त हो गई है। पुस्तक भेजने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। विभिन्न विद्वानों द्वारा की गयी समीक्षा लाजवाब है। निश्चित रूप से यह कालजयी पुस्तक सदियों तक जीवंत रहेगी। ग्रामीण अंचल की परिस्थितियों तथा विशेष कर दलित/वंचित समाज के हालातों पर किये गए यथार्थ वर्णन को उजागर करती रहेगी। काव्य विधा में लिखी गयी आत्मकथा, पहली पुस्तक के रूप में निरन्तर याद की जाएगी। निसन्देह यह शोधार्थियों के लिए एक मानक ग्रन्थ के रूप में प्रतिष्ठित होगी। आप के अथक प्रयास के लिए अशेष बधाई एवं शुभकामनाएं।" आगरा से ई. रूप सिंह रूप लिखते हैं कि "आज मुझे प्रख्यात साहित्यकार व नव दलित लेखक संघ के महासचिव डाक्टर अमित धर्मसिंह द्वारा प्रेषित एक पुस्तक प्राप्त हुई। इसका शीर्षक है- हमारे गाँव में हमारा क्या है! के विविध पाठ, भाग-2 समीक्षा संकलन । यह पुस्तक डा० अमित सिंह की काव्यमय आत्मकथा है। इस पर बहुत सारे प्रमुख साहित्यकारों ने समीक्षा लिखी है।उन्हीं में से कुछ समीक्षाओं का यह संकलन है जिसका सम्पादन महिंद्रा कालेज पटियाला की पूर्वाध्यक्ष डा० नविला सत्यादास जी ने किया है।इसमें मेरे द्वारा लिखित समीक्षा भी सम्मिलित है। डाक्टर अमित सिंह जी को मुझे पुस्तक भेजने के लिए हार्दिक धन्यवाद। बहुत बहुत साधुवाद। उक्त आत्मकथा काव्य में लिखित पहली आत्मकथा है। यह आत्मकथा भले ही डा० अमित सिंह जी की है पर यह ग्रामीण अंचल में रहने वाले सभी गरीब, शोषित, पीड़ित लोगों का आइना है।इसमें साहस, ईमानदारी, मेहनत, बाल-चेष्टा तथा अभावजनित कठिन परिस्थितियों से सतत संघर्ष आदि का बड़ी बेबाक़ी से बिना किसी हीन भावना के वर्णन किया गया है। इसकी सार्थकता व उपयोगिता को पाठक स्वयं पढ़कर ही जान पायेंगे। विभिन्न समीक्षकों का इस आत्मकथा के प्रति बहुत सकारात्मक व प्रशंसापूर्ण नज़रिया है जो इस संकलन से विदित होता है। डा० नविलादास जी को इस संकलन के कुशल सम्पादन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद" डॉ. नितिशा खलखो, झारखंड से लिखती हैं कि"दलित आत्मकथा का कविता रूप आपके सामने से गुजरेगा, दिल को बहुत कचोट भी पहुंचाएगा। इस पुस्तक समीक्षा की अगली कड़ी में एक छोटा प्रयास मेरे हिस्से भी। एक आदिवासी स्त्री का एक दलित साथी की आत्मकथा पर एक भावानुभूति को इस चैप्टर में पढ़ें। समीक्षा संग्रह के लिए बधाई amit dharm singh जी को" अरुण कुमार पासवान नोएडा से लिखते हैं कि। "हमारे गांव में हमारा क्या है! हमारे गांव में हमारा क्या है डॉक्टर अमित धर्मसिंह की काव्यात्मक आत्मकथा है,जो आत्मभिव्यक्ति और यथार्थ का एक उल्लेखनीय चित्रण है।यह रचना इतनी ही दमदार है कि मेरे सहित अनेक पाठकों और समीक्षकों को इसपर कुछ लिखने के लिए अपनी लेखनी उठानी पड़ी है।यह एक अच्छी बात है कि उन सभी विचारों का सम्मान करते हुए उन्हें भी पुस्तक रूप में संग्रहित किया गया है,जिनकी संख्या काफ़ी होने के कारण उन्हें दो भागों में प्रकाशित किया गया है। मुझे अभी-अभी डाक से उसका दूसरा भाग प्राप्त हुआ है,जिसमें मेरे विचार भी संकलित हैं।इसका संपादन डॉ नविला सत्यादास जी ने किया है,जो मेरी पूर्व परिचित रही हैं।मैं जब आकाशवाणी पटियाला में था तो डॉक्टर नविला पटियाला के सरकारी महेंद्रा महाविद्यालय में हिंदी की विभागाध्यक्ष थीं,और आकाशवाणी पटियाला में वार्ताकार के रूप में आती थीं।मैं इस प्रशंसनीय आत्मकथा के लेखक डॉक्टर अमित धर्मसिंह जी और डॉ नविला सत्यदास जी का धन्यवाद करता हूँ और उनका आभार भी प्रकट करता हूँ।"

20/07/2025







कुछ विशेष टिप्पणियां

1. "हमारे गांव में हमारा क्या है" की समीक्षात्मक पुस्तक प्राप्त हो गई है। पुस्तक भेजने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। विभिन्न विद्वानों द्वारा की गयी समीक्षा लाजवाब है। निश्चित रूप से यह कालजयी पुस्तक सदियों तक जीवंत रहेगी। ग्रामीण अंचल की परिस्थितियों तथा विशेष कर दलित/वंचित समाज के हालातों पर किये गए यथार्थ वर्णन को उजागर करती रहेगी। काव्य विधा में लिखी गयी आत्मकथा, पहली पुस्तक के रूप में निरन्तर याद की जाएगी। निसन्देह यह शोधार्थियों के लिए एक मानक ग्रन्थ के रूप में प्रतिष्ठित होगी। आप के अथक प्रयास के लिए अशेष बधाई एवं शुभकामनाएं।"

एस एन प्रसाद, लखनऊ
(17/07/2025 को वॉट्सएप से प्राप्त)

2. "आज मुझे प्रख्यात साहित्यकार व नव दलित लेखक संघ के महासचिव डाक्टर अमित धर्मसिंह द्वारा प्रेषित एक पुस्तक प्राप्त हुई। इसका शीर्षक है- हमारे गाँव में हमारा क्या है! के विविध पाठ, भाग-2 समीक्षा संकलन । यह पुस्तक डा० अमित सिंह की काव्यमय आत्मकथा है। इस पर बहुत सारे प्रमुख साहित्यकारों ने समीक्षा लिखी है।उन्हीं में से कुछ समीक्षाओं का यह संकलन है जिसका सम्पादन महिंद्रा कालेज पटियाला की पूर्वाध्यक्ष डा० नविला सत्यादास जी ने किया है।इसमें मेरे द्वारा लिखित समीक्षा भी सम्मिलित है। डाक्टर अमित सिंह जी को मुझे पुस्तक भेजने के लिए हार्दिक धन्यवाद। बहुत बहुत साधुवाद। 
उक्त आत्मकथा काव्य में लिखित पहली आत्मकथा है। यह आत्मकथा भले ही डा० अमित सिंह जी की है पर यह ग्रामीण अंचल में रहने वाले सभी गरीब, शोषित, पीड़ित लोगों का आइना है।इसमें साहस, ईमानदारी, मेहनत, बाल-चेष्टा तथा अभावजनित कठिन परिस्थितियों से सतत संघर्ष आदि का बड़ी बेबाक़ी से बिना किसी हीन भावना के वर्णन किया गया है। इसकी सार्थकता व उपयोगिता को पाठक स्वयं पढ़कर ही जान पायेंगे। विभिन्न समीक्षकों का इस आत्मकथा के प्रति बहुत सकारात्मक व प्रशंसापूर्ण नज़रिया है जो इस संकलन से विदित होता है। डा० नविलादास जी को इस संकलन के कुशल सम्पादन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"

- ई. रूप सिंह रूप, आगरा
(18/07/2025 की फेसबुक वाल से)

3. "दलित आत्मकथा का कविता रूप आपके सामने से गुजरेगा, दिल को बहुत कचोट भी पहुंचाएगा। इस पुस्तक समीक्षा की अगली कड़ी में एक छोटा प्रयास मेरे हिस्से भी। एक आदिवासी स्त्री का एक दलित साथी की आत्मकथा पर एक भावानुभूति को इस चैप्टर में पढ़ें। 
 समीक्षा संग्रह के लिए बधाई amit dharm singh जी को।"

- डॉ. नितिशा खलखो, झारखंड
(25/07/2025, फेसबुक वाल से)

4. "हमारे गांव में हमारा क्या है!
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        हमारे गांव में हमारा क्या है डॉक्टर अमित धर्मसिंह की काव्यात्मक आत्मकथा है,जो आत्मभिव्यक्ति और यथार्थ का एक उल्लेखनीय चित्रण है।यह रचना इतनी ही दमदार है कि मेरे सहित अनेक पाठकों और समीक्षकों को इसपर कुछ लिखने के लिए अपनी लेखनी उठानी पड़ी है।यह एक अच्छी बात है कि उन सभी विचारों का सम्मान करते हुए उन्हें भी पुस्तक रूप में संग्रहित किया गया है,जिनकी संख्या काफ़ी होने के कारण उन्हें दो भागों में प्रकाशित किया गया है।
       मुझे अभी-अभी डाक से उसका दूसरा भाग प्राप्त हुआ है,जिसमें मेरे विचार भी संकलित हैं।इसका संपादन डॉ नविला सत्यादास जी ने किया है,जो मेरी पूर्व परिचित रही हैं।मैं जब आकाशवाणी पटियाला में था तो डॉक्टर नविला पटियाला के सरकारी महेंद्रा महाविद्यालय में हिंदी की विभागाध्यक्ष थीं,और आकाशवाणी पटियाला में वार्ताकार के रूप में आती थीं।मैं इस प्रशंसनीय आत्मकथा के लेखक डॉक्टर अमित धर्मसिंह जी और डॉ नविला सत्यदास जी का धन्यवाद करता हूँ और उनका आभार भी प्रकट करता हूँ।"

- अरुण कुमार पासवान 
(26/07/2025, फेसबुक वाल से)























































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