नदलेस ने की ग़ज़लशाला 4, डॉ. रामगोपाल भारतीय के ग़ज़ल संग्रह, प्रतिनिधि ग़ज़लों पर ऑनलाइन परिचर्चा गोष्ठी 31/05/2025 को,


नदलेस ने की डॉ. रामगोपाल भारतीय के प्रतिनिधि ग़ज़ल संग्रह पर परिचर्चा 

        नव दलित लेखक संघ दिल्ली ने ग़ज़लशाला चार के अंतर्गत मशहूर शायर एवं गीतकार डॉ. रामगोपाल भारतीय के ग़ज़ल संग्रह प्रतिनिधि ग़ज़लें, रामगोपाल भारतीय पर ऑनलाइन परिचर्चा गोष्ठी आयोजित की। इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर अयाज़ अहमद तालिब और डॉ. अमित धर्मसिंह उपस्थित रहे। विशेष टिप्पणी देने वालों में आर पी सोनकर, कश्मीर सिंह, ओमप्रकाश गौतम, मदनलाल राज़ और मामचंद सागर आदि के नाम उल्लेखनीय रहे। डॉ. पुष्पलता की टिप्पणी का वाचन करने हेतु डॉ. गीता कृष्णांगी और लेखकीय वक्तव्य तथा ग़ज़ल पाठ हेतु डॉ. रामगोपाल भारतीय जी उपस्थित रहे। गोष्ठी की अध्यक्षता बंशीधर नाहरवाल ने की एवं संचालन मामचंद सागर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन का कार्य सलीमा ने किया। उक्त के अलावा उपस्थिति दर्ज कराने वालों में मुख्यतः भूरी सिंह, अरुण कुमार पासवान, डॉ. घनश्याम, डी एल धांधव, पुष्पा विवेक, चंद्रगत भारती, एदल सिंह, डॉ. उषा सिंह, गीता गंगोत्री, आर सी विवेक, लोकेश कुमार, फूलसिंह कुस्तवार, डॉ. मुकेश बैरवा, डॉ. नाविला सत्यादास, श्यामलाल राही, डॉ. रामावतार सागर और मनसुख विद्रोही आदि गणमान्य साहित्यकारों के नाम उल्लेखनीय रहे।
         सर्वप्रथम अयाज़ अहमद तालिब ने उक्त ग़ज़ल संग्रह पर अपनी बात रखते हुए कहा कि "रामगोपाल भारतीय की ज्यादातर ग़ज़लें अपने मौज़ू पर काफी सधी हुई हैं, बावजूद इसके कहीं कहीं ग़ज़लें आंशिक सुधार की मांग भी करती हैं। ऐसा करने से ये ग़ज़लें और भी बेहतर हो जाने की गुंजाइश रखती हैं।" डॉ. अमित धर्मसिंह ने कहा कि "रामगोपाल भारतीय की साहित्यिक यात्रा काफी लंबी रही है। वे गज़लकार और गीतकार दोनों हैं, इस कारण उनकी ग़ज़लें, गीत और ग़ज़ल के बीच की कड़ी हैं। वे अपने भाव और विचारों को अपनी ग़ज़लों के माध्यम से साधकर पाठकों तक संप्रेषित करना बखूबी जानते हैं।" आर पी सोनकर ने विशेष टिप्पणी देते हुए कहा कि "इसमें कोई दो राय नहीं कि हिंदी के शायर उर्दू के शायरों जैसी ग़ज़लें नहीं कह पाते, लेकिन भारतीय जी इसके अपवाद जान पड़ते हैं। उनकी ग़ज़लें पढ़कर लगता है कि वे काफी मंजे हुए शायर हैं।" कश्मीर सिंह ने अपनी टिप्पणी में गोष्ठी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुझे इस गोष्ठी से ग़ज़लें लिखने की समझ और प्रेरणा मिली है।" मदनलाल राज़ ने ग़ज़ल के बाहरी स्वरूप पर अति संक्षिप्त प्रकाश डाला। मामचंद सागर ने ग़ज़लों में प्रयुक्त हुए पौराणिक पात्र, घटना और शब्दावली को गैर जरूरी बताया। ओमप्रकाश गौतम ने हिंदी शायरों की मुश्किल बयान करते हुए कहा कि "हिंदी शायरों पर तलफ़्फ़ुज़ के ठीक न होने के कारण उनकी ग़ज़लों को गंभीरता से नहीं लिया जाता है।" लेखकीय वक्तव्य में डॉ. रामगोपाल भारतीय ने नदलेस के साथ-साथ सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सबने जो ग़ज़लों की बेबाक समीक्षा प्रस्तुत की है, वह मुझे स्वीकार है। चूंकि मैं ग़ज़ल के अकादमिक मानदंडों से जुड़ा हुआ शायर नहीं रहा हूं इसलिए मुझे तमाम वक्ताओं द्वारा दिए गए सुझाव आदि स्वीकार है। अगले संस्करण में उन्हें दुरुस्त करने का प्रयास रहेगा।" अध्यक्षता कर रहे बंशीधर नाहरवाल ने भारतीय जी को इतने महत्वपूर्ण ग़ज़ल संग्रह की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए हार्दिक बधाई दी। 

लोकेश कुमार
प्रचार सचिव, नदलेस
01/06/2025



































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