नदलेस मासिक गोष्ठी, 25/05/2025, संयोजक : देवराज सिंह देव


नदलेस की मासिक गोष्ठी मुरादनगर में संपन्न


दिनांक 25 मई 2025 दिन रविवार को नव दलित लेखक संघ के तत्वधान में एक मासिक गोष्ठी एवं सामजिक विचार गोष्ठी का आयोजन डॉ भीमराव अम्बेडकर पार्क मुरादनगर, ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश में किया गया /कार्यक्रम की अध्यक्षता नद लेस के वर्तमान अध्यक्ष श्री बंशी धर नाहवाल जी ने की वह संचालन का कार्यभार बृजपाल सहज ने उठाया, कार्यक्रम के संयोजक डॉ देवराज सिंह देवराज जी रहे गोष्ठी में नदलेस की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती पुष्पा विवेक उपाअध्यक्ष श्री मदनलाल राज डॉ अमित धर्मंसिंह उप सचिव सलीमा श्री जोगेन्दर सिंह श्री राजबीर सिंह नीम श्रीमती धनदेवी श्री बी डी संगम राधेश्याम कंसोटिया जी सहित अनेक साहित्यकारों विद्वानों एवं विदुसियों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की / गोष्ठी का प्रारम्भ नदलेस के पुराने साथी जोगेन्दर जी ने अपनी आस्था नामक कविता के माध्यम से करते हुए समाज में विद्यमान विसंगतियों एवं अंधविश्वास का प्रतीकार करते हुए तर्कवाद एवं विज्ञान वाद की महत्ता एवं उसकी अनिवार्यता को प्रतिपादित किया /उनके पश्चात नदले स के शानदार कवि श्री मदनलाल राज जी ने अपनी कविता के माध्यम से द्रोणाचार्य जी के गुरुधर्म पर सवाल उठाते हुए एकलव्य प्रकरण की वास्तविकताओ को तत्कालीन संदर्भ के सापेक्ष उदघाटित करने का प्रयास किया, साथ ही तत्कालीन राजनैतिक परिस्थितियों की भयावहता उसका खोखला पन आदि को केंद्र में रखकर एक अन्य कविता का पाठ किया / उनके पश्चात श्री राजबीर सिँह निम जी ने ज्योतिबा फुले जी की जीवनी पर आधारित अपनी कविता प्रस्तुत की /सलीमा जी ने जातिवाद एवं सामजिक भेदभाव की मार्मिकता एवं उसके दंश को अपनी ओ पंडत नामक कविता के माध्यम से उदघाटित किया /राधेश्याम कंसोटिया जी ने एक बार फिर अपनी क्षणिकओ के माध्यम से बहुत ही व्यंग पूर्ण शैली में गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया /श्रींमती धनदेवी जी ने अपनी रचना के माध्यम से बाबा साहब एवं बौद्ध धर्म की मानवीयता उसकी उपयोगिता एवं तत्कालीन समय में उसकी प्रसंगगिकता को उजागर किया /कार्यक्रम की एक उपलब्धि के रूप बहुजन गीतकार श्री बी डी संगम जी के गीतों को पहली सुनना भी कहा जा सकता है.. उनकी गायन शैली ना केवल मनमोहक थी अपितु गीतों का विषय भी गोष्ठी के अनुरूप था /डॉ अमित धर्मंसिंह जी ने हमेशा की तरह अपनी सधी एवं सटीक कविता भोपू के माध्यम से तत्कालीन राजनैतिक स्वार्थ परता को ना केवल उजागर किया अपितु उसकी सीमाओं एवं सम्भावनाओं का मूल्यांकन करते हुए उसके पीछे मौजूद शाजिसो को बेनक़ाब करने का प्रयास किया /डॉ देवराज सिँह देवराज जी ने गंगा तेरा पानी गन्दा नामक कविता के माध्यम से आस्था और वास्तविकता के बीच मौजूद सच्चाई को ना केवल अभिव्यक्ति दी अपितु उसकी अनिवार्यता को भी सिद्ध किया /बृजपाल सहज जी ने भाषा नामक कविता के माध्यम से व्यक्ति एवं समाज के निर्माण में भाषा की उपयोगिता उसकी आवश्यकता एवं अनिवार्यता को परील क्षित करते हुए रचना पाठ किया /श्रीमती पुष्पा विवेक जी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से दलित एवं स्त्री जीवन की वास्तविकताओ को उजागर करते हुए उनके शोषण की प्रक्रिया का प्रतिरोध प्रस्तुत किया /कार्यक्रम के अंत में नदलेस एवं गोष्ठी के अध्यक्ष श्री बंसीधर नाहरवाल जी ने न केवल अपनी रचनाओं के माध्यम से अपितु अपने विचारों से भी अम्बेडकर वाद एवं मानवता वाद को प्रतिष्ठित करते हुए सभी के कल्याण की कामना की तथा गोष्ठी को उद्देश्य की दृष्टि से सफल करार दिया.. कार्यक्रम के अंत में गोष्ठी के संयोजक श्री देवराज सिंह देवराज जी ने सभी का आभार व्यक्त किया और शानदार भोज के लिए आमंत्रित किया.....

                  धन्यवाद... बृजपाल सहज़
28/05/2025




















































Comments

Popular posts from this blog

राम मेश्राम के ग़ज़ल संग्रह 'शोलों के फूल' पर नदलेस ने की परिचर्चा : 28/02/2026

नदलेस की ऑनलाइन काव्य पाठ मासिक गोष्ठी हुई, 26/10/2025 को

वर्ल्ड बुक फेयर 2026 में हुई नदलेस की गोष्ठी, 15/01/2026 को