चिलचिलाती धूप के दिन काव्य संग्रह का लोकार्पण 23/03/2025
[03/04, 7:15 pm] Amit Dharmsingh: "नव दलित लेखक संघ के सम्मानित दलित साहित्यकारों ने आज मेरे कविता संग्रह "चिलचिलाती धूप के दिन" का "सबरी ध्यान वाटिका" में लोकार्पण किया !
बाबा साहब डा अम्बेडकर जी और तथागत बुद्ध के चरणों में नमन करते हुए मैं सभी सम्मानित दलित साहित्यकारों विषेश रूप से Dr. Amit Dharmsingh Indrajit Sukumar , Madan Lal Raj Pushpa Vivek Mam Chand Sagar
एवं समाज के सम्मानित साथियों Mahendra Kapil Ram Pal Singh Rajveer Nim Shiv Kumar Jai Prakash Prasad आदि का
हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने अपना अमूल्य समय देकर आज मेरे जीवन में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
फेसबुक के मित्रों आपकी ओर से बधाई रुकनी नहीं चाहिए।"
जोगेन्दर सिंह
[03/04, 7:17 pm] Dr. Amit Dharmsingh: "आज नदलेस के महान साहित्यकारों ने एक वाटिका की स्थापना करने में जो बहुमूल्य सहयोग दिया है उसका मैं आजीवन आभारी रहूंगा। इस सत्य को स्वीकारते हुए मैं क्षमा प्रार्थी हूं कि मैं आशानुरूप मेहमानवाजी नहीं कर पाया।
लेकिन मुझे विश्वास है कि यह दिन इतिहास में जरूर दर्ज होगा जिसके लिए मैं पुनः ह्रदय से आभारी एवं ऋणी हूं ।"
जोगेन्दर सिंह
[03/04, 7:18 pm] Dr. Amit Dharmsingh: "साहित्यकार और नव दलित लेखक संघ के संस्थापक आदरणीय श्री अमित धर्म सिंह जी की कुशाग्र बुद्धि और उनकी उत्कृष्ट सोच के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद जिन्होंने बिखरे हुए दलित समाज को एकता के सूत्र में पिरोकर समाज को आगे बढ़ाने के लिए उनके उत्थान के लिए उनके विकास के लिए जो नदलेस का गठन किया उनकी इस गहरी सोच के लिए मैं हृदय की गहराइयों से धन्यवाद देता हूं और हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं कि आप साहित्य की बुलंदियों को छू कर विश्व को आलोकित करें।"
एदलसिह प्रवक्ता हिंदी
सेवानिवृत्त शिक्षा निदेशालय दिल्ली सरकार
[03/04, 7:19 pm] Dr. Amit Dharmsingh: "आज दिनाँक 23 मार्च, 2025 को सबरी ध्यान वाटिका, वसुंधरा, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में प्रकृति की गोद में जोगेन्द्र सिंह की पुस्तक "चिलचिलाती धूप के दिन" का विमोचन नदलेस के समस्त पदाधिकारी सर्व श्री मदन लाल राज (उपाध्यक्ष), श्रीमती पुष्पा विवेक ( पूर्व अध्यक्ष) , माम चंद सागर ( सचिव) , डॉ अमित धर्म सिंह ( अंकेक्षक) , लोकेश कुमार (प्रचार सचिव), एडवोकेट राधे श्याम कंसोटिया , देव राज सिंह देव, इन्द्र जीत सुकुमार, ऐदल सिंह जी आदि के द्वारा किया गया।
संगोष्ठी के संयोजक श्री जोगेन्द्र सिंह ने सभी कवियों और गणमान्य व्यक्तियों को शाल ओढ़ाकर उनका सम्मान किया।
नदलेस की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती पुष्पा विवेक को उनके जन्मदिन पर फूलों का बूका देकर सभी ने बधाई भी दी।
आज की संगोष्ठी के संयोजक जोगेन्द्र सिंह ने अपने जीवन के लेखन के शुरुआती दिनों के बारे उन बातों के बारे में बताया जिन हालातों ने उनको इस पुस्तक लिखने की प्रेरणा प्रदान की। इस पुस्तक में डॉ अमित धर्मसिंह, माम चंद सागर और डॉ कुसुम वियोगी जी का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
साथ ही स्थानीय कवि एवं साहित्यकार गणमान्य व्यक्तियों में सर्व श्री डॉ अनिल कुमार, डॉ एस एम सितम, डॉ जे पी प्रासव, शिव कुमार, गौतम प्रकाश, एस पी संत, राजवीर सिंह एडवोकेट, रामपाल सिंह, राजीव सिंह निम, प्रकाश चंद, सुरेश कुमार, आर बी सिंह आदि ने भाग लिया।
आज की काव्य संगोष्ठी कई मायनों में महत्वपूर्ण रही। डॉ अमित धर्म सिंह जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि नये रास्ते, नये आयाम और नये अनुभवों से नये कीर्तिमान स्थापित होते हैं। पुरानी परिपाटी और पथ आधुनिक जीवन में रोड़ा भी हो सकती है। नदलेस नये और पुराने साहित्यकारों का का अनुपम संगम है। जो नये आयाम और नई इबादत लिख रहा है।
आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री मदन लाल राज ने की। हमेशा की तरह सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन श्रीमान माम चंद सागर जी किया। डॉ अमित धर्मसिंह जी नदलेस के उद्देश्य, उसकी कार्यशैली, समाज में साहित्य का योगदान, उसकी रचनाधर्मिता व उसके उपयोग पर विस्तार से चर्चा की।
आज की काव्य संगोष्ठी में इंद्रजीत सुकुमार और डॉ अमित धर्मसिंह अलग ही कलेवर और फलेवर में नजर आये। संगोष्ठी को ऊँचाई तक ले गये।
नदलेस के सभी पदाधिकारी तन, मन और धन से इस प्लेटफॉर्म को नई ऊँचाई प्रदान कर रहा है। पूर्ण रूप से समर्पित हैं। दलित साहित्य के क्षेत्र में एक स्थापित नाम है। इसके बैनर तले अनेक साहित्यकारों ने अपनी पहली पुस्तक समाज को समर्पित की। जो इस देश की दिशा और दशा बदलने में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।"
मदन लाल राज़























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