अरुण कुमार पासवान के कविता संग्रह कन्फुक्का पर, 18 अगस्त, 2024 को हुई परिचर्चा गोष्ठी की संक्षिप्त रिपोर्ट एवं फोटो


नदलेस ने की अंगिका भाषा के काव्य संग्रह कन्फुक्का पर हुई ऑनलाइन परिचर्चा गोष्ठी 

दिल्ली। नव दलित लेखक संघ ने प्रतिष्ठित साहित्यकार अरुण कुमार पासवान के काव्य संग्रह 'कन्फुक्का' पर ऑनलाइन परिचर्चा गोष्ठी आयोजित की। यह अंगिका भाषा में लिखा गया काव्य संग्रह है। इस पर बात रखने के लिए अंगिका भाषा की वरिष्ठ साहित्यकार अंशुमाला झा के साथ साथ गीता गंगोत्री, सुनीता कुमारी, डॉ. कुसुम वियोगी, अजय यतीश और मामचंद सागर आदि वक्ता उपस्थित रहे। गोष्ठी की अध्यक्षता नदलेस के उपाध्यक्ष बंशीधर नागरवाल ने की एवं संचालन हुमा खातून ने किया। सर्वप्रथम डॉ. अमित धर्मसिंह ने कवि और वक्ताओं का समुचित परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि अरुण कुमार पासवान के इससे पूर्व संस्मरणों की पुस्तक, हिंदी में पितृऋण, हिंदी काव्य संग्रहों में, अल्मोड़ा के गुलाब, अपना वतन, जुहू बीच के साथ साथ अंगिका भाषा में बाते अलग काव्य संग्रह आदि प्रकाशित हो चुके है। ये आकाशवाणी से सेवानिवृत्त हुए हैं। अंशुमाला झा ने इनके गीतों पर समुचित प्रकाश डालते हुए कहा कि मुझे यह काव्य संग्रह इसलिए भी बहुत प्यारा लगा कि मैं खुद अंगिका भाषा में लिखती हूं। इस भाषा के लोक और समाज से परिचित हूं। वास्तव में इस संग्रह ने इस भाषा के लोक पर, उसके रीति रिवाजों पर और उसकी संस्कृति पर बहुत ही सारगर्भित प्रकाश डाला है। निश्चित ही, इस संदर्भ में यह एक संगृहीत संग्रह बन पड़ा है। दूसरे वक्ताओं ने भी स्वीकारा कि शुरू में लगा था कि वे तो हिंदी भाषी हैं, तो कैसे इस संग्रह पर अपनी बात रख पाएंगे, लेकिन पढ़ने के बाद पता चला कि थोड़ी बहुत मशक्कत से भी यह संग्रह पढ़ा जा सकता है और इसका भरपूर लुत्फ उठाया जा सकता है। वास्तव में उन्हें इस संग्रह के बहाने उन्हें अंगिका भाषा के समाज की लोकोक्तियों, परंपराओं और लोक मान्यताओं आदि से परिचित होने का अवसर प्राप्त हुआ है। लेखकीय वक्तव्य में अरुण कुमार पासवान ने कहा कि मैं जब इस संग्रह की रचनाओं को लिख रहा था, तब मुझे इसका आभास नहीं था कि यह संग्रह इतना सराह जाएगा। इसके लिए मैं नदलेस के तमाम साथियों खासकर डॉ. अमित धर्मसिंह का, हृदय से आभारी हूं। अध्यक्षता कर रहे बंशीधर नाहरवाल ने कहा कि इस संग्रह की परिचर्चा गोष्ठी के साथ नदलेस का यह महत्वपूर्ण सत्र संपन्न हो जाएगा। इसके लिए न केवल कवि अरुण कुमार पासवान को बल्कि नदलेस की पूरी टीम को हार्दिक बधाई। सभी उपस्थित साहित्यकारों का अनौपचारिक धन्यवाद ज्ञापन डॉ अमित धर्मसिंह ने किया।।












































































































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