30/06/2024 को हुई काव्य गोष्ठी एवं कार्यकारिणी की मीटिंग की संक्षिप्त रिपोर्ट और फोटो, संयोजक : बृजपाल सहज।

02/07/2024


नदलेस की काव्य पाठ गोष्ठी एवं कार्यकारिणी की मीटिंग हुई संपन्न

         नव दलित लेखक संघ, दिल्ली की काव्य पाठ गोष्ठी एवं कार्यकारिणी की मीटिंग बृजपाल सहज के संयोजन में लोनी गाजियाबाद स्थित उन्हीं के आवास पर संपन्न हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता पुष्पा विवेक ने की और संचालन हुमा खातून ने किया। गोष्ठी के आरंभ में संयोजक के परिवार द्वारा सभी साहित्यकारों का माल्यार्पण कर स्वागत-सत्कार किया गया। तत्पश्चात गोष्ठी का आरंभ हुआ। गोष्ठी मुख्ततः दो चरणों, काव्य पाठ और कार्यकारिणी की गत कार्यवाही के मूल्यांकन पर केंद्रित रही। प्रथम चरण में, डॉ. गीता कृष्णांगी ने अपने दादा की स्मृति पर आधारित भावप्रवण कविता 'उस दरख़्त के गिरने में कोई आवाज़ न थी' का भावुक होकर पाठ कुछ यूं किया- 

"बचपन से बुढ़ापे तक दरख़्त काटते-काटते 

खुद एक दरख़्त बन गए थे दादा

यह बात हमें उस वक्त पता चली

जब किसी बड़े दरख़्त की तरह ही ढह गए दादा।

फर्क था तो बस इतना

कि उस दरख़्त के गिरने में कोई आवाज न थी।"

आर. पी. सोनकर ने तहत और तरन्नुम से गजलें सुनाकर समा कुछ यूं बांधा- 

"सलीका दाना चुगने का सिखाने में लगे हैं हम। 

परिंदों को शिकारी से बचाने में लगे हैं हम। और, 

आईने के सामने सजना भी है। 

आईने के वार से बचना भी है।।" 

उक्त के अलावा, क्रमशः डॉ. अमित धर्मसिंह, जोगेंद्र सिंह, मदनलाल राज़, बंशीधर नाहरवाल, आर सी विवेक, मामचंद सागर, राधेश्याम कांसोटिया, सलीमा, डॉ. ऊषा सिंह, बृजपाल सहज, सिया कुमारी, हुमा खातून और पुष्पा विवेक आदि ने भी अपनी-अपनी प्रतिनिधि और सशक्त कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया।

          गोष्ठी के दूसरे चरण में कार्यकारिणी की मीटिंग हुई। मीटिंग के विषय प्रस्तोता डॉ. अमित धर्मसिंह ने विस्तार से बताते हुए कहा कि "नदलेस की तीसरी कार्यकारिणी ने गत दस माह के कार्यकाल में करीब छब्बीस गोष्ठियां आयोजित की हैं। सभी साथियों के यथोचित सहयोग से सभी गोष्ठियां वांछित उद्देश्य में सफल रही हैं।" इस बात की रचनात्मक तसदीक अंकेक्षक मदनलाल राज़ ने यह कहकर की कि "नदलेस की प्रत्येक गोष्ठी हमेशा ही एक से बढ़कर एक होती है। कभी लगा नहीं कि हम पीछे जा रहे हैं। हर बार की गोष्ठी से लगा कि हम कुछ और आगे बढ़े हैं। इसका प्रमाण यह है कि नदलेस को आज देश भर में सभी सक्रिय दलित साहित्यिक संगठनों में अग्रणी भूमिका में स्वीकारा जाने लगा है।" इनके अलावा बंशीधर नाहरवाल, मामचंद सागर, आर सी विवेक, जोगेंद्र सिंह, राधेश्याम कांसोटिया, सलीमा, डॉ. ऊषा सिंह, बृजपाल सहज, आर पी सोनकर आदि ने भी उक्त विचार-विमर्श और नदलेस की महती उपलब्धियों के विषय में तर्कसंगत बात रखते हुए सहमतियां दर्ज की। गोष्ठी में सर्वसम्मति से आर पी सोनकर जी को नदलेस की तीसरी कोंकार्यकारिणी में सम्मानित सदस्य के रूप में सम्मिलित किया गया। नदलेस की तीसरी कार्यकारिणी में चुनी गई सोच 3 की संपादक डॉ. गीता कृष्णांगी ने सोच 3 का संपादकीय दायित्व स्वेच्छा से अध्यक्ष पुष्पा विवेक को गत 8 जून को सौंप दिए जाने की घोषणा की। अध्यक्ष पुष्पा विवेक ने सभी उपस्थित कवियों की रचना को सराहते हुए गोष्ठी को पूर्णतः सफल बताया। गोष्ठी में ऊपर उल्लेखित रचनाकारों के अलावा, क्रमशः कुमार शिव, देवी सिंह, दीपक कुमार, मयंक कुमार, सुखींद्रपाल और राकेश कुमार आदि उपस्थित रहे। सभी उपस्थित साथी रचनाकारों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन गोष्ठी के संयोजक बृजपाल सहज ने किया।

डॉ. अमित धर्मसिंह

01/07/2024


















































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