21 जुलाई, 2024 को हुई गोष्ठी की संक्षिप्त रिपोर्ट और फोटो : संयोजक, सलीमा अली।



प्रेस विज्ञप्ति

नदलेस ने की लोकार्पण एवं काव्य पाठ गोष्ठी

           दिल्ली। नव दलित लेखक संघ, दिल्ली के तत्वावधान में लोकार्पण एवं काव्य पाठ गोष्ठी का आयोजन किया गया।सलीमा जी के संयोजन में, गोष्ठी दरिया गंज, नई दिल्ली में रखी गई। गोष्ठी में सर्वप्रथम गीता कुमारी गंगोत्री की सद्य प्रकाशित पुस्तक हिंदी की काव्यात्मक वर्णावली का लोकार्पण किया गया, तत्पश्चात् उपस्थित कवियों का काव्य पाठ हुआ। अध्यक्षता पुष्पा विवेक ने की एवं संचालन डॉ. अमित धर्मसिंह ने किया। उक्त के अतिरिक्त गोष्ठी में क्रमशः मदनलाल राज़, डॉ. गीता कृष्णांगी, सुनीता कुमारी प्रसाद, लोकेश कुमार, बंशीधर नाहरवाल, अरुण कुमार पासवान, जोगेंद्र सिंह, बृजलाल सहज, अभिषेक चंदन, नतालिया अली, डॉ. सैयद अली अख़्तर नक़वी और अज़ीमा आदि उपस्थित रहे।

            मदनलाल राज़ ने कविता कुछ यूं पढ़ी "मैं तो केवल यारों सच्चाई उकेर रहा हूं, ठंडी पड़ी राख में आग खुकेर रहा हूं। आग लगा दे टीवी और झूठे अखबार को, जो जला दे देश में फैले भ्रष्टाचार को।" सुनीता कुमारी ने कविता पर कविता पढ़ते हुए कहा - "मैं कविता हूं, मैं धर्म में हूं, मैं पुराण में हूं, मैं वेद में हूं, मैं कुरान में हूं, मैं प्रार्थना में हूं, मैं अजान में हूं, मैं हृदय में हूं, मैं ईमान में हूं, मैं कविता हूं, मैं कविता हूं।" अभिषेक चंदन ने पढ़ा - "सोते हुए राष्ट्र को सोते हुए जगा सकोगे क्या? रोते हुए राष्ट्र को रोते हुए जगा सकोगे क्या?" डॉ. सैयद अली अख़्तर नक़वी ने अपनी कविता कुछ यूं पढ़ी - "चलो एक बार फिर बात करते हैं, सुलह की एक नई शुरुआत करते हैं, हमने कही थीं एक दूसरे को जो बातें, अब उन्हें हम नज़रअंदाज़ करते हैं, अब न करेंगे हम आपस में कोई झगड़ा, आज हम दोनों ये ऐलान करते हैं।" बृजपाल सहज की कविता कुछ इस प्रकार रही - "हर ओर तमाशा हो रहा है, देखने वाला भी खूब रो रहा है, आपदा भी अवसर है साहब, कोई तो है जो रईस हो रहा है।" अरुण कुमार पासवान ने अपनी कविता दवा और दावा कुछ इस प्रकार पढ़ी -  "सिर्फ एक लाठी का फर्क है दवा और दावा में, दवा करने से बहुत आसान है दावा करना, लाठी ही तो उठानी है और कहवा लेना है कि दवा मिल रही है।" इनके अलावा गीता कुमारी गंगोत्री, जोगेंद्र सिंह, बंशीधर नाहरवाल, लोकेश कुमार, डॉ. अमित धर्मसिंह और पुष्पा विवेक ने भी अपनी अपनी कविताओं से गोष्ठी को ऊंचाइयां प्रदान की। सभी उपस्थित रचनाकारों का तहेदिल से शुक्रिया अदा गोष्ठी की संयोजक सलीमा ने किया।

जोगेंद्र सिंह
प्रचार सचिव, नदलेस 
22/07/2024

शिशुओं के लिए अति लाभप्रद पुस्तक 'हिंदी की काव्यात्मक वर्णावली'
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       बाल साहित्य जितना उपयोगी है,उतना ही उसपर काम करना बाकी है।आज के दौर में बाल साहित्य की ओर उन्मुख होना साहित्यकार का त्याग ही कहा जाएगा,क्योंकि उनका पाठक न तो उनकी प्रशंसा कर सकता है न ही उनका फैन जोड़ने का काम कर सकता है। हां,पर उनका साहित्य शिशुओं को संस्कारित करते हुए एक राष्ट्र की नींव मजबूत कर सकता है और एक पीढ़ी का दिग्दर्शन कर सकता है।
       'नदलेस' दिल्ली ने आज इसकी एक सदस्या गीता गंगोत्री की एक ऐसी ही पुस्तक 'हिंदी की काव्यात्मक वर्णावली' का विमोचन कर बाल साहित्य की समृद्धि में एक अध्याय जोड़ा है।जिन गलियों में कभी गालिब घूमा करते थे,दरियागंज की एक ऐसी ही गली में समिति की एक सदस्य 'सलीमा अली जी' के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम के अगले भाग में उपस्थित सदस्यों डॉक्टर अमित धर्मसिंह,पुष्पा विवेक,जोगिंदर सिंह,श्री बंशीधर,गीता गंगोत्री,मदन लाल,अभिषेक कुमार,बृजपाल सहज,लोकेश कुमार,सैयद अली अख़्तर के बेहतरीन गीत,ग़ज़ल,कविता पाठ के बीच गीता कृष्णांगी जी,अजीमा जी और नतालिया अली की उल्लेखनीय उपस्थिति में दो कविताओं के पाठ का अवसर मेरे हिस्से भी आया,तो मैं ने गुरु पूर्णिमा को स्मरण करते हुए एक कविता 'विवेक' और फिर निम्नलिखित कविता 'दवा और दावा' का भी पाठ किया।संस्था की अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा विवेक और सचिव डॉक्टर अमित धर्मसिंह जी का इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए आभार!आभार सलीमा जी का,सफल संयोजन और आतिथ्य के लिए।
कविता : दवा और दावा 
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सिर्फ़ एक लाठी का
फ़र्क है दवा और दावा में,
दवा करने से बहुत आसान है
दावा करना,लाठी ही तो उठानी है,
और कहवा लेना है दवा मिल रही है;
बीमार और लाठी!कोई भी समझ लेगा।
सामर्थ्य इसी को तो कहते हैं,
और समरथ के नहिं दोष गुसाईं 
गोस्वामी तुलसीदास जी कह ही गए हैं;
समरथ थे तो कुरुक्षेत्र मैदान में कृष्ण,
अर्जुन से रखा हुआ अस्त्र उठवा गए,
महासत्यवादी धर्मराज युधिष्ठिर से भी 
जो कहवाना चाहते थे,वही कहवा गए,
और परम शिष्य के सच पर भरोसे वाले,
परम आदरणीय गुरु द्रोणाचार्य मारे गए!
असत्य देखने वाले नाहक परेशान हैं,
उनके दुःख का कारण उनका ही ज्ञान है।
इसीलिए ये मानने की आदत बना लीजिए,
कि सच वही होता है,जो समरथ कहवा गए,
कि व्यवस्था से लाभ न पाना आप का दोष है,
प्रायः लोग इसके आदी हैं;और लोक खामोश है!

                                  -अरुण कुमार पासवान
21/07/2024


आज दिनांक 21 जुलाई 2024 को नदलेस के बैनर तले दिल्ली गेट, नई दिल्ली में गीता गंगोत्री की पुस्तक काव्यात्मक वर्णमाला की वर्णावली का विमोचन के समय नदलेस की अध्यक्षा श्रीमती पुष्पा विवेक, उपाध्यक्ष श्री बंशीधर नाहरवाल,  अमित धर्मसिंह, अंकेक्षक श्री मदन लाल राज व अन्य सदस्यों के रूप में सर्वश्री जोगेंद्र सिंह, अरुण कुमार पासवान, सलीमा जी, गीता कृष्णांगी, ब्रजपाल सहज, लोकेश, सुनीता कुमारी तुषाड, अभिषेक चंदन, सैयद अली आदि विद्यमान रहे। 
दूसरे चरण में काव्य संगोष्ठी में सभी कवि एवं कवयित्रियों ने सुंदर, सार गर्भित और समाज की एक नई दिशा देने वाली रचनाओं से अभिभूत किया। दलित लेखन में साहित्य कार दोहरी भूमिका निभा रहा है। समाज में वो राईटर भी है और फाईटर भी है। आज के इस शानदार, जानदार और अधिक समय तक याद किये जाने वाले कार्यक्रम की संयोजिका सलीमा जी बेहतरीन मेहमान नवाज़ी के लिए हार्दिक बधाई।
- मदनलाल राज़
21/07/2024





































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