आर. पी. सोनकर5 के ग़ज़ल संग्रह ज़िन्दगी अनुबंध है, पर 23/06/2024 को हुई परिचर्चा गोष्ठी की संक्षिप्त रिपोर्ट और फोटो



आर. पी. सोनकर के ग़ज़ल संग्रह ज़िंदगी अनुबंध है पर परिचर्चा

दिल्ली। नव दलित लेखक संघ, दिल्ली के तत्वाधान में आर पी सोनकर, तल्ख़ मेहनाजपुरी के सद्य प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह ज़िंदगी अनुबंध है पर ऑनलाइन परिचर्चा गोष्ठी रखी गई। गोष्ठी की अध्यक्षता पुष्पा विवेक ने की एवं संचालन लोकेश कुमार ने किया। मुख्य वक्ता के तौर पर प्रतिष्ठित शायर और शायरा में डॉ. लाखो जे भागिया, डॉ. अलका शर्मा, डॉ. नसीमा निशा और ओमप्रकाश गौतम जी उपस्थित रहे। विशेष टिप्पणी करने वालों में हुमा खातून, अरविंद असर, नरेंद्र सोनकर और डॉ. अमित धर्मसिंह के नाम प्रमुख रहे। गोष्ठी में देश भर से जुड़ने वाले साहित्यकारों में क्रमशः कश्मीर सिंह, जलेश्वरी गेंदले, जगदीश कश्यप, बृजपाल सहज, राज गौतम, मामचंद सागर, अना फारिया, बंशीधर नाहरवाल, डॉ. गीता कृष्णांगी, मीना सिंह, बिभाष कुमार, प्रतिभा राजहंस, कांशीराम, इंदु रवि, फूलसिंह कुस्तवार, बलि कुमार, डॉ. विपुल कुमार भवालिया, डॉ. प्रिया राणा, अशोक निर्वाण, कल्पना पाटिल, रामलाल मूलनिवासी, हरीश पांडल, राधेश्याम कांसोटिया, सारिका देवी, आर एस आघात, आर पी गुप्ता, मीरा शाह, शमीम गाजीपुरी, पवन गुप्ता, डॉ. घनश्याम दास, मगन सिंह, अमित रामपुरी, डॉ. उषा सिंह, सूरज प्रकाश, चैन सिंह शेखावत, डॉ. राजन कुरुमसरे, चित्तरंजन गोप लुकाटी, अरुण कुमार पासवान और गीता कुमारी गंगोत्री आदि उपस्थित रहे। सर्वप्रथम शायर आर पी सोनकर जी का संक्षिप्त परिचय डॉ. अमित धर्मसिंह ने प्रस्तुत किया तत्पश्चात सभी अतिथि वक्ताओं का परिचय हुमा खातून ने प्रस्तुत किया। परिचय में उनके जन्म, स्थान, साहत्यिक गतिविधियों, प्रकाशित कृतियों, साहत्यिक सम्मानों आदि पर समुचित प्रकाश डाला गया। तत्पश्चात जिंदगी अनुबंध है पर परिचर्चा शुरू हुई।

          ओमप्रकाश गौतम ने कहा कि "आजकल हिंदी में बहुत सी गज़लें लिखी और पढ़ी जा रही हैं। ग़ज़ल संग्रह भी बहुत प्रकाशित हो रहे हैं लेकिन उनमें न बहर का पता होता है और न वज़न का। आर पी सोनकर जी की ग़ज़लों के साथ ऐसा नहीं है, वे हर तरह से मुकम्मल ग़ज़लें नज़र आती हैं।" डॉ. नसीमा निशा ने कहा कि "सोनकर जी की गजलें जनपक्षधरता की गजलें हैं। इनके विषय जितने आमजन से जुडें हैं उतने ही जन सरोकार की बातें करते हैं। वे सबके हक़ में खुशहाली की दुआ करते हैं।" साथ ही नसीमा जी ने सोनकर जी की एक ग़ज़ल तरन्नुम से पढ़कर गोष्ठी को सुमधुर ऊंचाई प्रदान की। डॉ. अलका शर्मा ने आर पी सोनकर की ग़ज़लों की तात्विक समीक्षा करते हुए कहा कि "ये गजलें बहुत ही व्यापक फलक की गजलें हैं। इनमें ग़ज़ल के अदबी सरोकार तो नज़र आते ही हैं, साथ ही ये मजबूर लोगों की आवाज़ बनकर उभरती हैं। वास्तव में इनमें अंबेडकरवादी स्वर मुखर हुआ दिखता है।" डॉ. लाखो जे भागी ने कहा कि "साहित्य में ऐसी ग़ज़लों का आना हर्ष की बात है। असल में जिंदगी अनुबंध है एक मेयारी ग़जलों का संग्रह है। इससे जीवन की अच्छाइयों और सच्चाइयों से रूबरू होने का अवसर प्राप्त होता है। ऐसी ग़ज़लों और ग़ज़ल संग्रहों का मंजरे आम आना लाजिमी है ताकि ग़ज़ल की दुनिया समृद्ध हो सके और इनके माध्यम से नए शायर भी ग़ज़ल में हाथ आजमाइश कर सके।" इनके अतिरिक्त हुमा खातून, अरविंद असर, नरेंद्र सोनकर और डॉ. अमित धर्मसिंह ने भी सोनकर जी की ग़ज़लों पर सारगर्भित टिप्पणियां प्रस्तुत की। लेखकीय वक्तव्य में आर पी सोनकर ने नदलेस, वक्ताओं, टिप्पणीकारों तथा जुडें हुए सभी गणमान्य साहित्यकारों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि "आज का दिन मेरे लिए दोहरी खुशी का दिन है। आज मेरी शादी की सालगिरह भी है और आज के दिन मेरे ग़ज़ल संग्रह पर इतनी बेहतरीन संगोष्ठी आयोजित होना,मेरे लिए हर्ष और गौरव की बात है। सभी वक्ताओं, टिप्पणीकारों आदि ने संग्रह की इतनी बढ़िया समीक्षाएं प्रस्तुत है कि उन पर कुछ कहना संभव ही नहीं।" उन्होंने अपनी दो गज़लें तरन्नुम और तहत से सुनाकर भी उपस्थित साहित्यकारों की वाहवाही लूटी। अध्यक्षता कर रही पुष्पा विवेक ने कहा कि "सोनकर जी की ग़ज़लों में दलित, वंचित, उपेक्षित और स्त्री चेतना आदि के स्वर मुखरित हुए हैं। पूरा संग्रह इतना बढ़िया है कि पढ़कर बहुत कुछ सीखने को मिलता है। आज की गोष्ठी बेहतरीन ग़जलों से परिचित करवाने में काफी सफल गोष्ठी रही। इसके लिए आर पी सोनकर और नदलेस की पूरी टीम बधाई की पात्र हैं।" अंत में, सभी उपस्थित वक्ताओं और श्रोताओं का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित धर्मसिंह ने किया।

प्रेषक :
डॉ. गीता कृष्णांगी
24/06/2024



























































































































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