जगदीश पंकज की नवगीत संग्रह आक्रामक श्रद्धा के युग में, पर 26/05/2024 को हुई ऑनलाइन परिचर्चा गोष्ठी





जगदीश पंकज के नवगीत संग्रह पर हुई परिचर्चा गोष्ठी


          नव दलित लेखक संघ ने नवगीतकार जगदीश पंकज के सद्य प्रकाशित नवगीत संग्रह 'आक्रामक श्रद्धा के युग में' पर ऑनलाइन परिचर्चा गोष्ठी आयोजित की। डॉ. योगेंद्र दत्त शर्मा, राजेंद्र वर्मा, डॉ. रंजना गुप्ता, डॉ. भावना तिवारी एवं डॉ. बजरंग बिहारी तिवारी वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। लेखकीय वक्तव्य के लिए नवगीतकार जगदीश पंकज उपस्थित रहे। गोष्ठी की अध्यक्षता, वक्ता के तौर पर उपस्थित रहे वरिष्ठ नवगीतकार डॉ. योगेंद्र दत्त शर्मा ने की एवं संचालन डॉ. अमित धर्मसिंह ने किया। अतिथियों का परिचय डॉ. गीता कृष्णांगी ने प्रस्तुत किया। उक्त के अलावा गोष्ठी में के. के. भसीन, वेद शर्मा, जगदीश कश्यप, डॉ. सुमन धर्मवीर, जगतराम दाहरे, तरुण गोयल, बंशीधर नाहरवाल, अनुपा एस एस, ज्ञानेंद्र सिद्धार्थ, जयकुमार पासवान, पुष्पा विवेक, अनिमेष शर्मा, बी. एल. तोंदवाल, सुनीता कुमारी, मदनलाल राज़, हरीश पांडल, रवि नावरिया, नीरज कुमार नेचुरल, जोगेंद्र सिंह, पुष्पा सिंह, अल्पी भसीन, श्रमण सावित्री सिंह, उदयशंकर, डॉ. घनश्याम दास, रामसूरत भारद्वाज, रवि प्रकाश, अनामिका सिंह अना, जगतरण डहरे, डॉ. इंदु रवि, अमित कुमार वर्मा, डॉ. विपुल कुमार भवालिया, अवधेश सिंह, लक्ष्मी नारायण, डॉ. खन्नाप्रसाद अमीन, अजय यतीश, जलेश्वरी गेंदले, अमित कुमार सिंह एवं डॉ. राजन तनवर आदि उपस्थित रहे। सभी उपस्थित वक्ताओं एवं श्रोताओं का अनौपचारिक धन्यवाद ज्ञापन हुमा खातून ने किया।
          डॉ. भावना तिवारी ने कहा कि "जगदीश पंकज के नवगीत व्यक्ति की पीड़ा को दर्ज करते हैं। ये व्यक्ति से समष्टि तक की यात्रा करते हैं। इनमें जाति नहीं अपितु वर्ग चेतना दिखाई पड़ती है।" डॉ. बजरंग बिहारी तिवारी ने कहा कि "जगदीश पंकज के नवगीतों की निर्भीकता और कहने का ढंग अलग हैं। ये नवगीत 'एक अचंभा देखा रे भाई, ठाडा सिंह चरावे गाई' की उलटबासी जैसे हैं। उत्तरोत्तर इनके नवगीतों का स्वर लगातार सटीक होता चला गया है।" डॉ. रंजना गुप्ता ने कहा कि "इनके नवगीत असल में आमजन के दर्द का आख्यान हैं। इनमें किसी एक खास वर्ग की श्रद्धा की नहीं बल्कि सभी की श्रद्धा पर सवाल उठाए गए हैं। वे कहना चाहते हैं कि आज ज्यादातर वर्ग अपनी-अपनी श्रद्धा और आस्था को लेकर आक्रामक है।" राजेंद्र वर्मा ने कहा कि "जगदीश पंकज के गीतों में समसामयिक बोध देखने को मिलता है। आज के दौर में धर्म और राजनीति का एकीकरण हो गया है जो कि लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं। इस तरह की समस्याओं पर जगदीश पंकज की पानी नजर है।" इनके अलावा सुदेश कुमार तनवर, कश्मीर सिंह एवं ब्रजेश सिंह ने विशेष टिप्पणियां की। लेखकीय वक्तव्य में नवगीतकार जगदीश पंकज ने परिचर्चा गोष्ठी आयोजित करने हेतु नदलेस का आभार ज्ञापन करते हुए कहा कि "मैं आज इतने सारे वक्ताओं से अपने और अपने नवगीतों के विषय में इतना सबकुछ जानकर अभिभूत हूं। सच पूछिए तो लिखते समय इतने सबकुछ का तो मुझे भी आभास नहीं था।" उन्होंने नवगीत संग्रह से दो नवगीत भी प्रस्तुत किए। अध्यक्षता कर रहे डॉ. योगेंद्र दत्त शर्मा ने नवगीत की बारीकियां समझाते हुए कहा कि "जो कुछ अनकहा है, उसे कहना ही नवगीत है। वो भी गीत के शिल्प, छंद, मात्रा आदि में बिना किसी तरह की छेड़छाड़ किए हुए। जगदीश पंकज यह कार्य बखूबी कर रहे हैं। इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। इतने गंभीर विषय पर इतनी शानदार गोष्ठी आयोजित करने हेतु नदलेस एवं उसकी पूरी टीम बधाई की पात्र है। कुल मिलाकर परिचर्चा गोष्ठी काफी गंभीर, सार्थक और नवगीत के संदर्भ में ज्ञानवर्धन करने वाली सफल गोष्ठी रही।

प्रेषक
डॉ. अमित धर्मसिंह
कोषाध्यक्ष, नदलेस 
27/05/2024

























































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