डॉ. सुमन धर्मवीर के तीन एकांकी नाटक पर, 27/03/2024 को हुई नाटक परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी
दिल्ली। नव दलित लेखक संघ, दिल्ली ने डॉ. सुमन धर्मवीर के तीन लघु नाटक 'मानव धर्म, विनय और रिलेशनशिप' पर परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया। गोष्ठी की अध्यक्षता पुष्पा विवेक ने की एवं संचालन डॉ अमित धर्मसिंह ने किया। वक्ताओं के तौर पर सलीमा, आर पी सोनकर, प्रो. कश्मीरी बौद्ध और शीलबोधि उपस्थित रहे। टिप्पणी करने वालों में नीरज छिलवार, जोगेंद्र सिंह, डॉ. राजन कुरूमसरे और बंशीधर नाहरवाल के अलावा लेखिका डॉ. सुमन धर्मवीर उपस्थित रहीं। गोष्ठी में मीना सिंह, जालिम प्रसाद, कर्मशील भारती, रौबी, भीष्मदेव आर्य, पवन सागर, रामसूरत भारद्वाज, ज्ञानेंद्र सिद्धार्थ, ममता अंबेडकर, रूप सिंह रूप, डॉ. उषा सिंह, रजनी राजू, चितरंजन गोप लुकाटी, राजपाल सिंह, आर एस मीणा और जितेंद्र अंबेडकर आदि गणमान्य रचनाकार उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम डॉ गीता कृष्णांगी ने डॉ. सुमन धर्मवीर का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। तत्पश्चात, सलीमा ने कहा कि "तीनों नाटक मानव धर्म और स्त्री जागृति का संदेश देते हैं। वर्तमान के मुद्दे नाटकों का विषय बने हैं। खासकर धार्मिक और स्त्री पुरुष के भेद को नाटकों में प्रदर्शित किया गया है।" आर पी सोनकर ने कहा कि डॉ. सुमन धर्मवीर के "तीनों नाटक उनकी पुस्तक 'प्रकृति और स्त्री विमर्श' में संकलित हैं। लेखिका की चेतना स्त्री चेतना के सशक्तिकरण की तरफ झुकी है। नाटकों में मानवीय मूल्य और सामाजिक दायित्वबोध स्पष्ट नज़र आते हैं।" प्रो. कश्मीरी बौद्ध ने कहा कि "सभी नाटक अलग-अलग ढंग से प्रभाव छोड़ते हैं। बाबा साहब के विचारों का अनुगमन करते हुए मानव धर्म को सबसे बड़ा धर्म घोषित करते हैं। स्त्री को पुरुष के बराबर लाकर खड़ा करने का संदेश भी नाटकों में अंतर्व्याप्त है।"
शीलबोधि ने नाटक विधा की बारीकियों से अवगत कराते हुए कहा कि "तीनों नाटक भाषा, विकास, अभिनय, मंचन, विचारधारा आदि की दृष्टि से पर्याप्त मजबूत नाटक नहीं बन पाए हैं। इन एकांकी नाटकों पर अभी और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। हां, रिलेशनशिप नाटक काफी प्रभाव छोड़ने वाला है अपितु यह भी अपेक्षा से अधिक बड़ा हो गया है।" इनके अलावा नीरज छिलवार, जोगेंद्र सिंह, डॉ. राजन कुरूमसरे और बंशीधर नाहरवाल ने भी नाटकों पर सारगर्भित टिप्पणियां की। डॉ. सुमन धर्मवीर ने नदलेस और सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि "आज मैंने नाटकों के विषय में बहुत कुछ सीखा है। अगला नाटक लिखते समय मैं वक्ताओं के तमाम सुझावों का अवश्य ध्यान रखूंगी।" अध्यक्षता कर रही पुष्पा विवेक ने कहा कि "नदलेस की प्रत्येक परिचर्चा गोष्ठी कार्यशाला की तरह होती है। आज की गोष्ठी में इसका अपवाद नहीं रही। सार्थक और सारगर्भित परिचर्चा के लिए डॉ. सुमन धर्मवीर को हार्दिक बधाई।" नाटक परिचर्चा उपरांत हरीश पांडल, जोगेंद्र सिंह, मदन लाल राज़, बंशीधर नाहरवाल, जगदीश कश्यप, डॉ. अमित धर्मसिंह और पुष्पा विवेक आदि ने काव्य पाठ किया। सभी उपस्थित वक्ताओं, टिप्पणीकारों, कवियों और श्रोताओं का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित धर्मसिंह ने किया।
डॉ. अमित धर्मसिंह
























































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