14/01/2024 को हुई काव्य गोष्ठी की संक्षिप्त रिपोर्ट और फोटो, संयोजक : मामचंद सागर।
काव्य पाठ एवं सत्यमेव जयते का लोकार्पण
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कल घना कोहरा था,दिल्ली एन सी आर में,आज उससे भी घना; लेकिन तय था 'नदलेस' की गोष्ठी में जाना।आज कोहरा मैदान छोड़ने को तैयार नहीं था,लेकिन प्रतिबद्ध था तो चल पड़ा।बाहर तो ठंड भी भयंकर थी।...और मुझको यह भी पता नहीं था कि गंतव्य था कितनी दूर।अनुमान था दो-ढाई घंटे लगेंगे,पर लगे चार घंटे।पहुंचते-पहुंचते लंच का समय हो गया था। शर्म आ रही थी,पर जब पता चला कि और लोग भी उसी समय पहुंचे थे तो,तुरत भाग गई।और मेज़बान श्री मामचंद सागर जी के प्रस्ताव के अनुसार भोजन से ही कार्यक्रम आरंभ हुआ।और तब हुआ श्री आर सी विवेक जी की पुस्तक सत्यमेव जायते' का लोकार्पण।
गोष्ठी की शुरुआत माम चंद सागर जी की रचना ,राही चलना सम्हल-सम्हल से ही हुई।संयोजक,प्रौढ़ रचना के युवा कवि अमित धर्मसिंह ने लॉकडाउन से संबंधित,और वोट मांगने ज़रूर आना,कविताओं में अपनी लेखनी का तेवर दिखाया तो गीता कृष्णांगी,ने ईश्वर और भक्त की चर्चा से भरी व्यंग्य कविता रखी।कुशवाहा जी ने शूलों से लड़ना सीखो और मिलन कविताएं सुनाई।राधेश्याम जी ने कुछ ज़ोरदार क्षणिकाएं प्रस्तुत कीं और जोगिंदर सिंह ने स्वरचित,मूल निवासियों का राष्ट्रगीत सुनाया।इंदु रवि ने,मैं भीमराव की बेटी हूं और पढ़ने-लिखने का अर्थ जैसी धारदार कविताएं प्रस्तुत कीं।
आर सी विवेक जी ने संविधान पर कुछ महत्वपूर्ण बातों से भरी कविता सुनाई और वंशीधर जी ने शुभचिंतक की चिंता की पोल खोली।हुमा खातून जी की ग़ज़लें और नज़्म सभी को आकृष्ट कर गईं,वहीं सुदेश तंवर जी ने भी अपनी कविताओं से काफ़ी प्रभावित किया।मुख्य अतिथि के रूप में दो शब्दों के साथ दो कविताएं 'अपना संविधान' और 'रामराज्य' सुनाकर मैं ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराई;और अध्यक्ष पुष्पा विवेक जी ने कुछ गंभीर अर्थों की कविताएं पढ़ीं।...बड़ी बात यह कि यह स्थल,दिल्ली का एक गांव था और इसे राजोकारी पहाड़ी के रूप में जाना जाता है।कोई गांव सामने आ जाय तो अपना गांव याद आ जाता है,वह गांव भी अपना ही गांव लग जाता है।मतलब अपने ही गांव में बीते तीन घंटे।
अरुण कुमार पासवान
15/01/2024



















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