नदलेस कार्यकारिणी और सोच 3 के संपादन मंडल की मीटिंग 19/11/2023, संयोजक : डॉ. अमित धर्मसिंह।
संक्षिप्त रिपोर्ट
नदलेस की कार्यकारिणी एवं संपादन मंडल की मीटिंग
नदलेस की कार्यकारिणी एवं संपादन मंडल की मीटिंग अलीपुर रोड, दिल्ली स्थित बाबा साहब भीमराव अंबेडकर स्मारक के कैंटीन में संपन्न हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता पुष्पा विवेक ने की और संचालन हुमा खातून ने किया। मीटिंग मुख्यतः दो चरणों में विभक्त रही। प्रथम चरण में डॉ. अमित धर्मसिंह की आत्मकथा "हमारे गांव में हमारा क्या है!" गत गोष्ठी में अप्रस्तुत रही समीक्षाएं प्रस्तुत की गई। दूसरे चरण में कार्यकारिणी और सोच 3 के प्रकाशन के संबंध में कई मुख्य बिंदुओं पर विचार विमर्श किया गया। मीटिंग में कार्यकारिणी और संपादन मंडल के सदस्यों में से पुष्पा विवेक, डॉ. अमित धर्मसिंह, डॉ. गीता कृष्णांगी, लोकेश कुमार, बंशीधर नाहरवाल, हुमा खातून, सलीमा, मामचंद सागर और जोगेंद्र सिंह उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम गत परिचर्चा गोष्ठी की समीक्षा की गई। समीक्षा में गत परिचर्चा गोष्ठी अप्रत्याशित तौर पर सफल मानी गई। मामचंद सागर ने कहा कि "हमारी अभी तक की गोष्ठियों में वह बेहद सफल गोष्ठी रही। इसमें ऑनलाइन जुड़ने वालों साहित्यारों की संख्या भी दूसरी गोष्ठियों से बहुत अधिक रही। परिचर्चा जैसी गोष्ठी का चार पांच घंटे चलना भी अपनेअाप में एक रिकॉर्ड रहा।" बाकी उपस्थित साथियों ने भी गोष्ठी को अलग अलग ढंग से बेहद सफल गोष्ठी घोषित किया। तत्पश्चात एक एक करके मामचंद सागर, हुमा खातून, बंशीधर नाहरववाल और पुष्पा विवेक ने हमारे गांव में हमारा क्या है! पर लिखी अपनी-अपनी समीक्षाओं का सार प्रस्तुत किया और समीक्षाओं की हार्ड कॉपी हस्ताक्षर करके डॉ. अमित धर्मसिंह को दी। इनके अलावा डॉ. गीता कृष्णांगी, लोकेश कुमार, सलीमा और जोगेंद्र सिंह ने भी हमारे गांव में हमारा क्या है! पर अपने अपने सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए।
डॉ. अमित धर्मसिंह ने विषय की प्रस्तावना में कहा कि "कुछ वक्ता नदलेस की गोष्ठी में सम्मिलित होने पर आभार पत्र या नदलेस की तरफ से उनके नाम सर्टिफिकेट जारी किए जाने जैसी आकांक्षा रखते हैं। यद्यपि यह कार्य नदलेस के साथियों पर अनावश्यक कार्य भार बढ़ाने और अतिरिक्त खर्च बढ़ाने जैसा है। ऐसा करने पर संगठन की जगह व्यक्ति विशेष को सेंटरलाइज किया जाएगा, जो कि किसी भी लिहाज से उचित नहीं है। इसलिए फिलहाल, नदलेस की तरफ से इस तरह के आभार पत्र अथवा सर्टिफिकेट आदि जारी करने का कार्य नहीं किया जा सकता है। भविष्य में संगठन की कार्य क्षमता और संसाधन आदि बढ़ाए जा सके तो इस योजना पर पुनः विचार किया जा सकेगा। इसके अलावा किसी भी पुस्तक पर परिचर्चा गोष्ठी रखने से पूर्व पुस्तक के लेखक से परिचर्चा के लिए एक आवेदन पत्र भरकर लेना उचित होगा ताकि लेखक विशेष की परिचर्चा कार्यक्रम आदि में लिखित अनुमति जुटाई जा सके। इससे भविष्य में होने वाली विभिन्न तथ्यात्मक गड़बड़ी को रोका जा सकेगा।" इस दोनों ही प्रस्तावों पर उपस्थित सदस्यों ने बारी बारी से अपने रचनात्मक और सकारात्मक विचार प्रस्तुत कर दोनों प्रस्तावों के प्रति सहमति जताई। तय किया गया कि आवेदन पत्र का फॉर्मेट जल्दी ही तैयार किया जाएगा।
अंतः में, सोच 3 के प्रकाशन पर विचार विमर्श किया गया। इसमें तय किया गया कि सोच 3 के स्थायी सोपान के अनुसार ही प्राप्त सामग्री विभाजित कर प्रकाशित की जाएगी। इस बार नदलेस सोपान के अंतर्गत गत अंक में प्रकाशित आजीवन सदस्यों से आगे के सदस्य पंजीकृत संख्या के साथ प्रकाशित किए जायेंगे। गत दो वर्ष का आय व्यय ब्यौरा प्रकाशित किया जाएगा। साथ ही गत अध्यक्षों का परिचय प्रकाशित किया जाएगा। इसमें संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अमित धर्मसिंह, निवर्तमान कार्यकारिणी अध्यक्ष डॉ. कुसुम वियोगी और वर्तमान कार्यकारिणी अध्यक्ष पुष्पा विवेक का परिचय शामिल किया जाएगा। इसके अलावा कार्यकारिणी के पदों के सक्रियता पर विचार विमर्श किया गया। वार्षिक सहयोग जमा करवाने के संदर्भ में बातचीत हुई। साथ ही आगामी प्रकाशनों (परिचर्चित कहानियों का संकलन और इस वर्ष में परिचर्चित होने वाली पुस्तकों से प्राप्त समीक्षाओं का संकलन प्रकाशित किए जाने पर भी सार्थक बातचीत हुई। यह भी सर्वसम्मति से तय किया गया कि अपने वक्ताओं और उपस्थित रचनाकारों का सम्मान करना हम सबका दायित्व है। इसमें किसी का भी गैर जरूरी हस्तक्षेप सांगठनिक लिहाज से अनुचित माना गया। यह भी तय किया गया कि नदलेस को प्राप्त होने वाले काव्य संग्रहों पर भी स्वतंत्र काव्य पाठ गोष्ठी के तहत एक पुरुष और एक स्त्री वक्ता की व्यवस्था की जायेगी। इस तरह की गोष्ठी दो चरणों में बंटी होगी, प्रथम चरण में काव्य संग्रह पर दो उक्त दो वक्ता अपनी बात रखेंगे और शेष समय में उपस्थित रचनाकारों का काव्यपाठ करवाया जायेगा।
डॉ. गीता कृष्णांगी
30/11/2023










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