28/06/2023 को ऑनलाइन हुई लघुकथा एवं काव्य गोष्ठी की संक्षिप्त रिपोर्ट
नदलेस ने की लघुकथा एवं काव्य गोष्ठी
नव दलित लेखक संघ ने लघुकथा एवं काव्य गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया। गोष्ठी में डा. पूरण सिंह, भीमराव गणवीर, चितरंजन गोप लुकाटी, सुनीता वर्मा, सतीश खनगवाल और यजवीर सिंह विद्रोही आमंत्रित लघुकथाकार रहे। आमंत्रित कवियों में रवि निर्मला सिंह, गुलफ्शा सिद्दीकी, सुनील कुमार कर्दम और अमित रामपुरी रहे। गोष्ठी की अध्यक्षता डा. कुसुम वियोगी ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। गोष्ठी में हुमा खातून, डा. नवीला सत्यादास, डा. गीता कृष्णांगी, पारुल शाही, मदनलाल राज़, मोहनलाल सोनल मनहंस, बरनाली हालदार, साहिल परमार, पुष्पा विवेक, डा. सुजाता रानी, डा. खन्नाप्रसाद अमीन, बंशीधर नाहरवाल, लोकेश कुमार, अरुण कुमार पासवान, नरेश कुमार, हरीश पांडल, देव प्रसाद पातरे, डा. बिपिन कुमार और करतार सिंह कटारिया आदि उपस्थित रहे। सर्वप्रथम यजवीर सिंह विद्रोही ने जाति प्रमाण पत्र, मिशन @..., और औकात शीर्षक से तीन लघुकथाएं प्रस्तुत की। उसके बाद चितरंजन गोप लुकाटी ने, जनता के हित के लिए, मेहरबानी और शराब पीकर गाड़ी चलाएं!! शीर्षक से तीन लघुकथाओं का वाचन किया। छाछ, परिवेश और मुक्ति शीर्षकों से सुनीता वर्मा ने अपनी तीन लघुकथाएं पढ़ीं और सतीश खनगवाल ने, ज़ख्म, नौकरानी और जवाब शीर्षकों से अपनी तीन लघुकथाएं प्रस्तुत कीं। सभी लघुकथाएं दलित समाज की सामाजिक स्थिति, परिस्थिति को रेखांकित करने वाली रहीं। व्यक्ति से लेकर समाज तक बरते जाने वाले जातीय भेदभाव और सामाजिक द्वंद्व को लघुकथाओं में उजागर किया गया और समाज को सामाजिक न्याय व समता का संदेश दिया गया। कुल मिलाकर उपस्थित साहित्यकारों ने सभी की लघुकथाओं को पसंद किया और मुक्त कंठ से सराहना की।
लघुकथा वाचन के बाद काव्य गोष्ठी हुई। सर्वप्रथम रवि प्रकाश ने ब्रांडेड कुत्ते शीर्षक से कविता कुछ यूं पढ़ी- "यह दौर ब्रांडेड कुत्तों का है!/आप अपनेआप को कितना ब्रांडेड बना सकते हैं/ इसे ही आप की योग्यता और प्रतिभा माना जाता है/अकेली शर्त ये है कि आप को कुत्ता ही होना पड़ेगा।" अमित रामपुरी ने अदम गोंडवी की कविता चमारों की गली से प्रभावित अपनी लंबी कविता अंतर कुछ यूं प्रस्तुत की- "देखिए तुम गौर से अन्तर, यहाँ इंसानों का/हो व्यवस्था पर गया है, कब्जा तो हैवानों का/राकेश ठाकुर, नत्थू के लड़के, जन्मे थे एक साथ में/खुर्पी, पल्ला, फावड़ा रहा नत्थू वाले के हाथ में/बैठ ऐसी में शनि बादाम किसमिस खा रहा/गोलू खाये रूखी सूखी, संग खेत पर भी जा रहा/ दूजे किस्म के नागरिक हैं बहुजन इस देश में/फर्क नहीं है कल और आज के परिवेश में।" हुमा खातून की कविता चालाक आदमी की आरंभिक पंक्तियां इस प्रकार रहीं- "इस दौर का इन्सान कितना चालक है/ हर आदमी के चेहरे पे कितने नक़ाब हैं।" मदनलाल राज़ ने पर्यावरण से संबंधित अपनी कविता कुछ यूं पढ़ी- "लोहा, तांबा, पीतल और सोना चांदी खूब निकाली/ इस चक्कर में धरती सारी हमने खोद डाली।/ कैसे बचेगी वसुधा की लाज, जाएं किसकी शरण?/जनता होगी जागरूक, तभी बचेगा पर्यावरण।"
मोहनलाल सोनल मनहंस ने लोकडाउन से उपजी त्रासदी पर अपनी कविता रोज़ी रोटी की तलाश का वाचन किया और इसी त्रासदी पर डा. गीता कृष्णांगी ने भगोड़े ईश्वर के चालक भक्त शीर्षक से कविता प्रस्तुत की। पुष्पा विवेक ने विद्रोह की ज्वाला कविता पढ़ी और बंशीधर नाहरवाल ने सागर का मंथन कविता प्रस्तुत की। अरुण कुमार पासवान की गीतिकाव्य रचना इस प्रकार रही- "हर तरफ़ है खींचतान/ अलग सुर अलग गान/खो गया है नेक-चिंतन/ कलुषित हो गए हैं मन/किसी भांति प्राप्ति का/सबने कर रखा है प्रण!" हरीश पांडल की कविता मानवाधिकार यूं रही- "देखो कोई रह ना जाये/अपना जीवन जीने से/ आम इंसा क्यों नहीं बचता/अपमान का घूंट पीने से।" तानाशाही और उसके गुलामों पर आधारित डा. नवीला सत्यादास की कविता 'राजसी तबेले के घोड़े' खूब पसंद की गई। गोष्ठी में अध्यक्षीय वक्तव्य नदलेस के उपाध्यक्ष मदनलाल राज़ ने दिया। करीब ढाई घंटे तक चली गोष्ठी को उन्होंने पूर्णतः सफल बताया और भागीदारी करने वाले सभी साहित्यकारों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उपस्थित लघुकथाकारों, कवियों और श्रोताओं का अनौपचारिक धन्यवाद ज्ञापन नदलेस की प्रचार सचिव हुमा खातून ने किया।
रिपोर्ट
डा. गीता कृष्णांगी
29/06/2023















































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