31/05/2023 कोई हुई गोष्ठी की संक्षिप्त रिपोर्ट और फोटो
नदलेस की ऑनलाइन स्वतंत्र काव्य पाठ गोष्ठी
नदलेस द्वारा ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी स्वतंत्र काव्य पाठ पर आधारित रही। गोष्ठी की अध्यक्षता डा. कुसुम वियोगी ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। नदलेस के नए बने आजीवन सदस्य भंते बुद्ध रत्न, सुनीता कुमारी, फूलसिंह कुत्सवार, राधेश्याम कांसोटिया के अलावा नदलेस की वर्तमान कार्यकारिणी के पदाधिकारी और सदस्य पुष्पा विवेक, मामचंद सागर, जोगेंद्र सिंह, डा. गीता कृष्णांगी, हुमा खातून, समय सिंह जोल, कश्मीर सिंह, मदनलाल राज़, डा. रामनिवास, डा. अनिल कुमार, बृजपाल सहज, लोकेश कुमार, महिपाल, डा. मनोरमा गौतम, डा. घनश्याम दास, डा. हरकेश कुमार, नीरज सौदाई, ज्योति कुमारी और सुरेंद्र कुमार काव्य पाठ के लिये आमंत्रित कवि रहे। काव्य पाठ करने वालो में क्रमशः हुमा खातून, डा. मनोरमा गौतम, रामस्वरूप मीणा, रेनू गौर, सुनीता वर्मा, बंशीधर नाहरवाल, डा. मोहनलाल सोनल मनहंस, मदनलाल राज़, हरीश पांडल, पुष्पा विवेक, तिलक तनौदी स्वच्छंद, मामचंद सागर, समय सिंह जोल, रूप सिंह रूप, आर एस आघात, डा. घनश्याम दास, अजय यतीश, फूलसिंह कुत्सवार, इंदु रवि, श्रीलाल बौद्ध, सिद्धार्थ प्रकाश, एस एन प्रसाद, डा. अमित धर्मसिंह और डा. कुसुम वियोगी ने आंबेडकरी कविताओं और गजलों का सुमधुर व सारगर्भित काव्य पाठ किया।
काव्य पाठ करने वालों में रूप सिंह रूप के नवगीत की कुछ पंक्तियां इस प्रकार रहीं- "हाथ से हैं फिसलती गईं रोटियाँ/देखिये ये शराफ़त को तोहफ़ा मिला/मौन लुटता रहा शब्द सोते रहे/नींद का है ये कैसा गजब सिलसिला।" डा. मोहन लाल सोनल मनहंस ने कविता कुछ यूं प्रस्तुत की- "रियो में तिरंगा लहराती पी वी सिंधु/नमन वतन की बेटी को/थापित किया उज्जवल बिंदु/साक्षी मलिक ने/रेसलिंग में सच किया सपना/देश सेवा में/ओलंपिक में ब्रांज किया अपना।" डा. अमित धर्मसिंह की ग़ज़ल के चंद अशआर इस प्रकार रहे- "कुछ ख़ुशी के कुछ ग़मों के सिलसिले चलते रहे।/ज़िन्दगी के साथ में सौ मसअले चलते रहे।/दोस्ती की छत के नीचे वैसे हम-तुम एक थे,/पर हमारी सोच में कुछ फासले चलते रहे।।" उक्त के अतिरिक्त देश भर से डा. गीता कृष्णांगी, कांशीराम, कुलदीप कुमार, प्रमोद मारोती वालके, अजीत कुमार सिंह, अरुण कुमार पासवान, ज्ञानेंद्र कुमार सिद्धार्थ, ममता अंबेडकर, भीष्मदेव आर्य, रामसूरत भारद्वाज, जयराम कुमार पासवान, डा. धीरज वणकर, मोहम्मद क़ासिम ख़ान तालिब, राधेश्याम कांसोटिया, सलीमा, रजनी बौद्ध, पवन कुमार पवन और चितरंजन गोप लुकाटी आदि कवि एवं विचारक उपस्थित रहे। अध्यक्षता कर रहे डा. कुसुम वियोगी ने ढाई घंटे से अधिक चली काव्य गोष्ठी को बेहद सफल बताते हुए हर्ष प्रकट किया। सभी कवियों और साहित्यकारों का अनौपचारिक धन्यवाद ज्ञापन पुष्पा विवेक ने किया।
-डा. अमित धर्मसिंह






































































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