डा. कुसुम वियोगी की कहानी आटे सने हाथ पर 03/05/2023 को हुई परिचर्चा गोष्ठी और कार्यकारिणी की मीटिंग की रिपोर्ट
रिपोर्ट
नव दलित लेखक संघ ने डा. कुसुम वियोगी की लोकप्रिय कहानी 'आटे सने हाथ' पर परिचर्चा गोष्ठी आयोजित की।गोष्ठी वियोगी जी के संयोजन में दिल्ली के शाहदरा स्थित उन्हीं के आवास पर रखी गई। गोष्ठी की अध्यक्षता पदमश्री बृजपालसिंह संत ने की और संचालन नदलेस के वर्तमान सहसचिव बृजपाल सहज ने किया। सर्वप्रथम कहानीकार डा. कुसुम वियोगी ने अपनी कहानी आटे सने हाथ का प्रभावी वाचन किया। कहानी इतनी मार्मिक रही कि वाचन के दौरान कहानीकार भावुक नज़र आए। सहज और सरल भाषा में लिखी गई यह कहानी अपने कथ्य को संप्रेषित करने में सफल कहानी रही। इसकी पुष्टि उपस्थित रचनाकारों द्वारा की गई टिप्पणियों से हुई। पुष्पा विवेक ने कहानी कि "मैं कहानी को पहले भी कई बार पढ़ चुकी हूं। मुझे यह कहानी, अपनी ही कहानी लगती है। क्योंकि जो कुछ इस कहानी की पात्र सूरजमुखी लड़की के साथ घटित हुआ, लगभग वैसा ही जीवन मैंने जिया है। इसलिए यह कहानी मुझे अपनी कहानी लगती है।" हुमा ख़ातून ने कहा कि "मैंने भले ही ऐसा जीवन न जिया हो लेकिन मैंने भट्टे पर काम करने वाले अन्य झुग्गी बस्तियों के लोगों का जीवन करीब से देखा है। इसलिए कह सकती हूं की कहानी में जो कुछ बयान किया है, अभी भी समाज में बिलकुल वैसा ही देखने को मिलता है।" बंशीधर नाहरवाल ने कहा कि "कहानी अच्छी है, इसमें कोई दो राय नहीं। दलित समाज में आज भी स्त्रियों की शिक्षा और जीवन दोनों विचारणीय बने हुए हैं। कहानी इस ओर ध्यान आकर्षित करने सफल कहानी है।" अशोक निर्वाल ने कहा कि कहानी औरत का शोषण एक औरत ही करती है की बात को चरितार्थ करती है। आटे सने हाथ में भी सूरजमुखी को उसकी अपनी ही मां द्वारा पीटा जाता है। वैसे कहानी बेहद मार्मिक बन पड़ी है। कहानीकार को इसके लिए बधाई।" डा. गीता कृष्णांगी ने कहानी के पुरुष पात्र राकेश को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि अभी तक भी समाज पितृसत्तमक है। जब तक स्त्री राकेश जैसे पति को उसको जिम्मेदारी का अहसास नहीं कराएगी तब तक स्त्री रामकली और सूरजमुखी की तरह ही उपेक्षित रहेगी। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि आखिर क्यों स्त्री पुरुष को इतना बर्दास्त करती है और क्यों घर परिवार की जिम्मेदारी जरूरत से ज्यादा अपने कन्धों पर लेती है। कहानी इस ओर भी सोचने पर विवश करती है।" बृजपाल सहज ने कहा कि थोड़े शब्दों में कहानी बहुत कुछ कहती है। मैं डा. गीता जी की बात से इत्तेफाक रखता हूं। स्त्रियों की समाज में जो भी दशा है वह अत्यंत विचारणीय है। कहानी इस बात को पूरी शिद्दत से सामने लाती है।
डा. अमित धर्मसिंह ने कहा कि जब हम इस तरह की कहानी पढ़ते या सुनते हैं तो लगता है कि काश यह कहानी ही होती और इसका हकीकत से कोई वास्ता न होता। मगर ऐसा नहीं है। आज भी गांवों, देहातों और कस्बों में स्त्रियों की शिक्षा सूरजमुखी की शिक्षा और दशा आटे सने हाथ वाली ही है। तभी तो कहानी अपने लिखे जाने के लगभग चार दशकों बाद भी प्रासंगिक बनी हुई है।" कहानीकार डा. कुसुम वियोगी ने सभी नदलेस और परिचर्चकारों का आभार व्यक्त करते हुए जानकारी दी कि "यह कहानी गुजरात के साथ साथ अन्य राज्यों के विश्विद्यालयों के बी ए और एम ए के पाठ्यक्रमों में पढ़ाई जा रही है। यह कहानी पूर्णतः सत्य घटना पर आधारित है और इसके सभी पात्र हकीकत में रहे हैं।" अध्यक्षता कर रहे बृजपालसिंह संत ने कहानी के शीर्षक में से हाथ को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि "हाथ अपने आप में पूरी कहानी कहता है। कहानी में हाथ कई बातो का प्रतीक बनकर उभरा है। जिसे गहराई से समझने की आवश्यकता है। कहानी देखने और सुनने में बहुत ही साधारण है किंतु एवरेस्ट सी ऊंचाई और मानसरोवर सी गहराई लिए हुए है। कहानी श्रोताओं का साधारणीकरण कर देती है जिससे यह कहानी सबको अपनी कहानी लगने लगती है।" इसके अतिरिक्त गोष्ठी में पुष्पा विवेक, मामचंद सागर, अशोक निर्वाल, हुमा खातून, बंशीधर नाहरवाल, बृजपाल सहज, गीता कृष्णांगी, अमित धर्मसिंह, कुसुम वियोगी, बृजपालसिंह संत और जोगेंद्र सिंह आदि कवियों का काव्य पाठ हुआ। गोष्ठी के के दूसरे चरण में नदलेस की कार्यकारिणी की मीटिंग हुई। गोष्ठी के इस चरण की अध्यक्षता डा. कुसुम वियोगी ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। मीटिंग में नदलेस कार्यकारिणी की कार्य प्रणाली पर विस्तृत विचार विमर्श हुआ। सबने माना कि नदलेस की कार्य प्रणाली पूरी तरह से लोकतांत्रिक और पारदर्शी है। यही कारण है कि देश भर से साहित्यकार नदलेस से जुड़े हुए हैं। मीटिंग में नदलेस के वार्षिक संकलन सोच के दूसरे संपादन के लिए, संपादक डा. अनिल कुमार की अनुमति और उपस्थित पदाधिकारियों की सर्वसम्मति से डा. अनिल कुमार की जगह डा. कुसुम वियोगी को संपादक के रूप में मनोनीत किया गया। साथ ही, नदलेस की सचिव डा. अमिता मेहरोलिया के नदलेस की कार्यकारिणी और नदलेस के अन्य वॉट्सएप ग्रुप से 15/03/2023 को अकारण लेफ्ट हो जाने के कारण, उसके स्थान पर सहसचिव बृजपाल सहज को सर्वसम्मति से सचिव घोषित किया गया। गोष्ठी में वी. पी. सिंह, अर्जुन ठाकुर और भंते बुद्धरत्न जी भी उपस्थित रहे। सभी उपस्थित साहित्यकारों और पदाधिकारियों का धन्यवाद ज्ञापन डा. अमित धर्मसिंह ने किया।
•डा. गीता कृष्णांगी
04/05/2023






































































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