26/02/2023 को हुई गोष्ठी की रिपोर्ट

 रिपोर्ट



मामचंद सागर की कहानी गद्दार पर नदलेस ने की परिचर्चा गोष्ठी

         नव दलित लेखक संघ की मासिक गोष्ठी मामचंद सागर की कहानी गद्दार पर केंद्रित रही। गोष्ठी की अध्यक्षता बंशीधर नाहरवाल ने की और संचालन बृजपाल सहज ने किया। गोष्ठी पालम दिल्ली स्थित कबीर आश्रम में आयोजित की गई और इसकी संयोजक डा. अमिता महरोलिया रही। गोष्ठी में कहानी गद्दार का समुचित वाचन कहानीकार मामचंद सागर ने किया, जिस पर उपस्थित रचनाकारों ने सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। राजपाल सिंह राजा ने कहा कि अच्छी कहानी बन पड़ी है। सुनकर आनंद आया। कहानी ने कई बिंदुओं पर सोचने पर मजबूर भी किया। डा. गीता कृष्णांगी ने कहा कि कहानी का शीर्षक सर्वथा उचित है, क्योंकि कहानी के चारों मुख्य पात्र, तिवारी, एंटनी, गयादीन और मरियम सभी अपनी-अपनी जगह गद्दार हैं। कोई अपनी नौकरी से, कोई अपने समाज से तो कोई अपने परिवार से गद्दारी कर रहा है। डा. अमिता मेहरोलिया ने कहा कि कहानी को यदि कहानी के तत्त्वों के आधार पर देखें तो कहानी को अभी और विस्तृत किया जा सकता था। वैसे कहानी सामान्यतः एक सफल कहानी है और प्रभाव छोड़ती है। पुष्पा विवेक ने कहा कि कहानी दलित समाज की मजबूरियों को सामने लाती है। दलित समाज आज भी अपनी जरूरतों को लेकर इतना पिछड़ा हुआ है कि हर कोई उसका नाजायज फायदा उठाना चाहता है। बृजपाल सहज ने कहा कि कहानी सुंदर ढंग से प्रस्तुत की गई है, इसके लिए कहानीकार को बधाई। किंतु मुझे लगता है कि कहानी अभी कुछ और भी मांग कर रही है। यह भी हो सकता है कि मैं ही कहानी से ठीक से जुड़ न पाया हो लेकिन इतना जरूर है कि मैं गीता जी से पूर्णतः सहमत हूं कि कहानी के सारे पात्र अपनी-अपनी जगह गद्दार हैं।

         डा. अमित धर्मसिंह ने कहा कि कहानी अपने आकार-प्रकार और गढ़न में पर्याप्त सफल कहानी है। जरूरत है, कहानी में क्या नहीं है की बजाय क्या है और कितना सही तथा गलत है, को ठीक से देखने की। मुझे लगता है कि मामचंद सागर कहानी गद्दार को ट्रीट करने में कामयाब हुए हैं। जहां तक बात कहानी की अंतर्सरंचना की है तो कहानी के दो प्रमुख आयाम हैं। एक तो यह कि कहानी व्यवस्था की उस जटिल संरचना को सामने लाती है जिसकी रग-रग में भ्रष्टाचार व्याप्त है। ऐसा लगता है कि हर कोई अपनी जगह, जरूरत से अधिक भ्रष्टाचारी है। जो कोई ईमानदार दिखाई भी पड़ता है, वह महज इसलिए कि उसे बेईमानी का अवसर नहीं मिला है। कहानी के सभी पात्र इसी तथ्य को उजागर करते हैं। कहानी का दूसरा प्रमुख आयाम यह है कि कहानी दलित समाज और गैर दलित समाज के मनोविज्ञान को खोलकर सामने रख देती है। यह मनोविज्ञान ऐसा है कि गैर दलित समाज अपराध करके भी खौफ नहीं खाता है और दलित समाज बहुत जल्दी ही हिम्मत हार जाता है, यानी अपने पथ से डिग जाता है। उसे जहां ज़रा-सा सुख या सुविधा प्राप्त होती है तो वह भी भ्रष्टाचार की दलदल में धंस जाता है। इसी का फायदा दलित समाज उठाता है, जैसा कि एंटनी का तिवारी उठाता है। एंटनी की इसी कमी के चलते उसका मित्र गयादीन एंटनी की पत्नी मरियम का गलत फायदा उठा लेता है। इसलिए कहानी हमें संदेश देती है कि दलित समाज को हर परिस्थिति में जागरूक बनना चाहिए तभी वह समाज में अपना सम्मानजनक स्थान बनाए रख सकता है। कहानीकार मामचंद सागर ने सभी परिचर्चाकारों का धन्यवाद ज्ञापन किया। बताया कि कहानी में अस्सी प्रतिशत उनका स्वयं का अनुभव है और बीस प्रतिशत कहानी को कहानी बनाने के लिए कल्पना का सहारा लिया गया है। इस तरह कहानी यथार्थ पर टिकी हुई है। अध्यक्षता कर रहे बंशीधर नाहरवाल ने कहा कि कहानी अपने कथ्य और उद्देश्य में सफल कहानी है। एयरपोर्ट विभाग से जुड़ी ड्यूटी ऑफ सर्विस और दलित समाज की दरिद्रता को कहानी बहुत अच्छी तरह से उजागर करती है। आज भी दलित समाज अपनी जरूरतों का मोहताज है। जिसका भरपूर फायदा गैर दलित समाज के लोग उठाते हैं। साथ ही आए दिन वह अपने लोगों का भी शिकार होता रहता है। इसलिए दलित समाज को अभी बहुत अधिक जागृति की आवश्यकता है। यही कहानी का मूल संदेश है। गोष्ठी में सतीश खनगवाल ने लघुकथा रंग का वाचन किया। पुष्पा विवेक, राजपाल सिंह राजा, डा. अमित धर्मसिंह और बंशीधर नाहरवाल ने सार्थक कविताएं प्रस्तुत की। अंत में राजपाल सिंह राजा को नदलेस का आजीवन सदस्यता पत्र और नदलेस का पैन भेंट किया गया। गोष्ठी में कबीर आश्रम के संचालक माननीय चरण सिंह जी भी उपस्थित रहे। सभी उपस्थित रचनाकारों का अनौपचारिक धन्यवाद ज्ञापन डा. अमित धर्मसिंह ने किया।

रिपोर्ट

डा. अमित धर्मसिंह

26/02/2023

9310044324

























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