हुमा ख़ातून की कहानी 'एक रास्ता' पर परिचर्चा गोष्ठी, 29/01/2023
हुमा ख़ातून की कहानी 'एक रास्ता' पर परिचर्चा गोष्ठी
दिल्ली। नदलेस की कहानी वाचन, परिचर्चा एवं काव्य पाठ गोष्ठी नदलेस के वर्तमान सह सचिव बृजपाल सहज के संयोजन में बृजविहार, लोनी गाजियाबाद में संपन्न हुई। गोष्ठी हुमा ख़ातून की कहानी 'एक रास्ता' पर केंद्रित रही। यह कहानी प्रेम के त्रिकोण को दर्शाती है। इसमें मुख्य पात्र जानकी प्रसाद चतुर्वेदी है जिसकी पत्नी श्यामा देवी और पूर्व प्रेमिका कुसुम देवी है। भारतीय समाज में व्याप्त जातिवाद के चलते जानकी और कुसुम की शादी नहीं हो पाती है। इसलिए जानकी प्रसाद की शादी सजातीय श्यामा देवी और कुसुम की शादी सजातीय माधव से हो जाती है। किंतु जानकी प्रसाद श्यामा के साथ खुश नहीं है और माधव अपनी नपुंसकता और नशे के कारण असमय मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। बाद में कुसुम के पिता नाथबाबू की भी मृत्यु हो जाती है। इस कारण कुसुम अकेली पड़ जाती है। चूंकि इस दौरान कुसुम की दिल्ली में जॉब भी लग जाती है इसलिए पहले वह अपने गांव और जानकी प्रसाद को पूरी तरह छोड़कर दिल्ली जाने का मन बनाती है किंतु जानकी प्रसाद के समझाने पर किशन नामक युवक से शादी करने पर विचार करने को तैयार हो जाती है। साथ ही, गांव वाले मकान में कुछ किताबें और कुछ सामान छोड़ देती है ताकि गांव आने जाने और जानकी प्रसाद से मिलने का कम से कम एक रास्ता तो बचा रहे। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार मामचंद सागर ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। एक रास्ता कहानी का प्रभावी वाचन कहानीकार हुमा ख़ातून ने किया। गोष्ठी में सलीमा, डा. गीता कृष्णांगी, महिपाल, बृजपाल सहज, नरेश कुमार, देवी सिंह, कुमार शिव, प्रहलाद सिंह, संजीव कुमार, संतोष देवी, मयंक कुमार, दीपक कुमार, कुमारी सिया, सुरेंद्र पाल, संतोष कुमार और कुमारी पूजा आदि रचनाकार उपस्थित रहे।
कहानी पर उपस्थित सभी रचनाकारों ने विस्तृत और सारगर्भित विचार रखे। डा. गीता कृष्णांगी ने माना कि श्यामा देवी का जानकी प्रसाद पर गुस्सा करना जायज़ है क्योंकि जानकी प्रसाद का अब अपना परिवार है जिसमें उनकी पत्नी के अलावा दो बच्चे भी हैं जिनकी जिम्मेदारी जानकी प्रसाद की है, इसलिए उसे अब कुसुम से मिलना छोड़ देना चाहिए। सलीमा ने कहा कि हुमा और मैं साथ साथ पढ़े और बड़े हुए हैं। आज से पहले, मैं सोच भी नहीं सकती थी कि हुमा इतनी अच्छी कहानीकार भी है। मैं हुमा को इस प्रथम और बेहतरीन प्रयास के लिए फिलहाल बधाई ही देना चाहूंगी। महिपाल ने कहा कि कहानी में कहीं से भी जानकी प्रसाद यानी एक पुरुष का कोई शोषण दिखाई नहीं देता है। हर प्रकार से कुसुम यानी एक स्त्री का शोषण हुआ है। बृजपाल सहज ने कहा कि कहानी प्रेम की जितनी बड़ी त्रासदी को लेकर लिखी गई है, कहानी में उतने मार्मिक प्रसंग नहीं आ पाए हैं, इसलिए कहानी गहरे तक छूने में पर्याप्त सफल नहीं हो पाई है। समय सिंह जोल ने कहा कि हुमा जी की यह पहली कहानी होते हुए भी बेहतर कहानी बन पड़ी है और उन्हें तो कहानी बड़ी बढ़िया लगी है। डा. अमित धर्मसिंह ने कहा कि कहानी भारतीय समाज में व्याप्त कई प्रकार की कुरीतियों को ध्यान में रखकर लिखी गई हैं। कहानी में जातिवाद संबंधी समस्या और प्रेम पर लगाए जाने वाले सामाजिक प्रतिबंध आदि दिखाई पड़ते हैं। भारतीय समाज में लड़का लड़की की मर्जी से शादी न होने के अनेक नुकसान होते हैं जो अधिकतर लड़के लड़की को ही उठाने पड़ते हैं। खासकर लड़की को; क्योंकि पुरुष तो पितृसत्ता, पुरुषसत्ता और मर्दवादी खोल में फिर भी सुरक्षित रह लेता है लेकिन एक स्त्री हर तरफ से मारी जाती है। कहानी में कुसुम के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। हुमा ख़ातून ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कहानी में पुरुष के होने वाले शोषण को दर्शाने की कोशिश की गई है, क्योंकि जानकीप्रसाद चतुर्वेदी अपनी पारिवारिक और सामाजिक बंदिशों के चलते कुसुम से शादी नहीं कर पाता है और बाद में अपनी पत्नी श्यामा से भी प्रताड़ित होता रहता है। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे मामचंद सागर ने कहा कि कहानी प्रेम के त्रिकोण को दर्शाती है, लेकिन जैसा कि कहानीकार का मानना है कि कहानी में एक पुरुष के शोषण को दर्शाने की कोशिश की गई है तो कहीं से भी जानकीप्रसाद पीड़ित नजर नहीं आते हैं। ऐसा भी शायद ही कहीं होता हो कि एक उच्च जाति के व्यक्ति का उद्धारक नीची जाति वाला व्यक्ति हो, जैसा कि कहानी में दिखाया गया है कि जानकीप्रसाद चतुर्वेदी के उद्धारक कुसुम के पिता नाथबाबू हैं। बहरहाल, कहानी प्रथम प्रयास की दृष्टि से एक सफल कहानी है। इसके लिए कहानीकार को बधाई दी ही जानी चाहिए। तत्पश्चात, गोष्ठी में समय सिंह जौल, महिपाल, डा. गीता कृष्णांगी, हुमा ख़ातून, डा. अमित धर्मसिंह और मामचंद सागर आदि ने काव्य पाठ किया। सभी उपस्थित रचनाकारों और श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापन डा. गीता कृष्णांगी ने किया।
प्रेषक : डा. अमित धर्मसिंह
महासचिव, नदलेस
9310044324
30/01/2023




























































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