30/11/2022 को हुई ऑनलाइन काव्य गोष्ठी की रिपोर्ट

 


रिपोर्ट

संविधान दिवस और ज्योतिबा फुले के स्मृति आलोक में नदलेस ने की काव्य पाठ एवं नव सदस्य सम्मिलन गोष्ठी

                संविधान दिवस और ज्योतिबा फुले के स्मृति आलोक में नदलेस द्वारा ऑनलाइन आयोजित काव्य पाठ एवं नव सदस्य सम्मिलन दिवस विशेष मासिक गोष्ठी अपेक्षाकृत सफल रही। गोष्ठी में देश भर से जुड़े साहित्यकारों ने एक से बढ़कर एक रचना प्रस्तुत की। तहत और तरन्नुम से प्रस्तुत की गई रचनाओं ने, न सिर्फ भाव अभिभूत किया बल्कि प्रस्तुति के अंदाज ने भी मंत्रमुग्ध किया। सभी रचनाकारों की रचनाओं में समाज और जीवन की बारीक समझ, अनुभव और संघर्ष के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियां और भेदभाव के प्रति आक्रोश और चिंता साफ नजर आई। गोष्ठी की अध्यक्षता डा. कुसुम वियोगी ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। हुमा खातून, हरीश चंद्र पांडल, विनोद सिल्ला, डा. रामबचन यादव, बंशीधर नाहरवाल, डा. मनोरमा गौतम, अनिल बिडलान, देव प्रसाद पातरे, अजय यतीश, ममता अंबेडकर, नीरज कुमार नेचुरल, योगेंद्र प्रसाद अनिल, शकुंतला दीपांजलि, हरितोष मोहन, खन्नाप्रसाद अमीन, कांता बौद्ध, चितरंजन गोप लुकाटी, एस. एन. प्रसाद और डा. कुसुम वियोगी आदि प्रतिष्ठित और नवोदित साहित्यकारों ने सशक्त रचनापाठ किया। गोष्ठी में डा. एल. सी. जैदिया जैदि, डा. एम. एन. गायकवाड, अजीत सिंह, डा. गीता कृष्णांगी, डा. आर. सी. यादव, राजेंद्र कुमार निब्बन, शैल कुमारी शाक्य, ओमप्रकाश सिंह, डा. अमिता मेहरोलिया, बृजपाल सहज, लोकेश कुमार, शिव बच्चन बौद्ध, डा. विक्रम कुमार, रोकसी कुमारी, डा. हरिराम मीणा, धर्मवीर सिंह और इंदु रवि आदि साहित्य अध्येता और रचयिता उपस्थित रहें।
           एस. एन. प्रसाद, लखनऊ द्वारा पढ़ी गई ग़ज़ल की काव्य पंक्तियां कुछ इस प्रकार रही -"गुरुर का एक यह भी अंदाज देखिये/आदमी पर झपटता है बाज देखिये/कल तक टेकता रहा जो घुटने/हो गया है अब बेअन्दाज  देखिये/नफरतों की आग में रिश्ते हुए फ़ना/कैसे बदल रहा है समाज देखिये।" हरीश चंद्र पांडल ने व्यवस्था कविता कुछ यूं प्रस्तुत की-"हमारे बीच रहकर ही /हमारे खिलाफ/फैसले लेते हैं/हमारे पीढ़ि को गुलाम/बनाकर हमें ही/हुक्म देते हैं!" ममता अंबेडकर ने संविधान दिवस से संबंधित रचना का पाठ किया - "सबसे पहले भारत का संविधान/तभी बनेगा देश महान/ इसकी नीति से चलता भारत का इंसान/संविधान से ही मिलता हैं/सबको हक अधिकार/हमेशा याद रखना देश की जनता/से ही बनाता देश  महान।" चितरंजन गोप लुकाटी की सर्वहारा कविता की काव्य पंक्तियां कुछ इस प्रकार रहीं -"तुम्हारा कुरेदना बार-बार सह लेता हूं मैं/आधार पर आघात बर्दाश्त कर लेता हूं/एक पेट बारूद ठूंसकर भी/जिससे उड़ा सकता हूं/इस छोटी-सी पृथ्वी को/ मगर शांत हूं मैं!" कांता बौद्ध ने अपनी कविता 'ऐसा तो नहीं था मेरा सोना' में कुछ यूं पढ़ा -"मन में ख्याल आया/जैसे कह रहे हैं बाबा साहब/ विचार छूट गया/कर्मकांड रह गया/ ऐसा तो नहीं था मेरा सपना।" विनोद सिल्ला की कविता 'अंतिम पायदान का व्यक्ति' की काव्य पंक्तियां इस प्रकार रही -"वो है अंतिम पायदान पर धकेला गया व्यक्ति/उसके द्वार पर होती है दस्तक धर्माचार्यों की/इस आग्रह के साथ/धर्म है असुरक्षित/करो शामिल अपने नवयुवकों को/धर्म की लड़ाई में।" डा. खन्नाप्रदाद अमीन ने समानता के सूत्रधार शीर्षक से कविता कुछ यूं पढ़ी -"ओह! समानता के सूत्रधार/आपने बहुत किए निर्धार/समानता का हक संविधार में/फिर भी आज अफसोस के साथ कहता हूं/समानता के लिए करने पड़ते हैं संघर्ष।" योगेन्द्र प्रसाद अनिल के काव्यपाठ का काव्यांश कुछ इस प्रकार रहा -"शोषक पाता जब बन बैठे/खौल उठे खून रगो के/सजग हुए दलित मुरेठे/लगे पढ़ने भाषा आंखों के/ठींगने टीकधर बौनौं की, खूब आतंके नंगी थी/विश्व रूकती थी माथे पे/देख मानवता नंगी थी।"
          बंशीधर नाहरवाल द्वारा प्रस्तुत कविता की कुछ पंक्ति इस प्रकार रहीं- "स्वर्ग होगा कहीं, हमने देखा नही/स्वर्ग से भी प्यारा है हमको वतन/कोई कहता है मस्जिद है अल्लाह का घर/कोई कहता है मंदिर में रहता ईश्वर/मंदिर मस्जिद से प्यारा है हमको वतन।" नीरज कुमार नेचुरल की कविता मैं भारत का संविधान हूं की काव्य प्रस्तुति कुछ इस प्रकार रही - "मैं भारत का संविधान हूं/मैं ही देश चलाता हूं/मैं भारत के  सब जन जन को सब अधिकार दिलाता हूं/चपरासी से पीएम, प्रेसिडेंट, भी मैं ही बनाता हूं/मैं भारत का संविधान हूं/ मैं ही देश चलाता हूं।" अध्यक्षता कर रहे डा. कुसुम वियोगी ने कहा कि नदलेस सबको जोड़े सबसे जुड़े के आधार पर काम कर रहा है। इसने दलित साहित्य की दो पीढ़ियों को एक मंच पर लाने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। आज की गोष्ठी में सभी रचनाकारों ने सामाजिक परिवर्तन की एक से बढ़कर एक कविता प्रस्तुत की। इस संदर्भ में कविता प्रस्तुत करने वाले सभी कवि विशेष सराहना के पात्र हैं। साथ ही गोष्ठी में आखिर तक जुड़े रहने वाले प्रबुद्ध श्रोता एवं कविगण भी विशेष प्रसंशा के पात्र हैं। गोष्ठी में शामिल हुए सभी कवियों एवं श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापन डा. अमित धर्मसिंह ने किया।

हुमा खातून/सोमी सैन
प्रचार सचिव द्वय, नदलेस
01/12/2022

संविधान दिवस और ज्योतिबा फुले के स्मृति आलोक में नदलेस ने की काव्य पाठ एवं नव सदस्य सम्मिलन गोष्ठी

                संविधान दिवस और ज्योतिबा फुले के स्मृति आलोक में नदलेस द्वारा ऑनलाइन आयोजित काव्य पाठ एवं नव सदस्य सम्मिलन दिवस विशेष मासिक गोष्ठी अपेक्षाकृत सफल रही। गोष्ठी में देश भर से जुड़े साहित्यकारों ने एक से बढ़कर एक रचना प्रस्तुत की। तहत और तरन्नुम से प्रस्तुत की गई रचनाओं ने, न सिर्फ भाव अभिभूत किया बल्कि प्रस्तुति के अंदाज ने भी मंत्रमुग्ध किया। सभी रचनाकारों की रचनाओं में समाज और जीवन की बारीक समझ, अनुभव और संघर्ष के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियां और भेदभाव के प्रति आक्रोश और चिंता साफ नजर आई। गोष्ठी की अध्यक्षता डा. कुसुम वियोगी ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। हुमा खातून, हरीश चंद्र पांडल, विनोद सिल्ला, डा. रामबचन यादव, बंशीधर नाहरवाल, डा. मनोरमा गौतम, अनिल बिडलान, देव प्रसाद पातरे, अजय यतीश, ममता अंबेडकर, नीरज कुमार नेचुरल, योगेंद्र प्रसाद अनिल, शकुंतला दीपांजलि, हरितोष मोहन, डा. खन्नाप्रसाद अमीन, कांता बौद्ध, चितरंजन गोप लुकाटी, एस. एन. प्रसाद और डा. कुसुम वियोगी आदि प्रतिष्ठित और नवोदित साहित्यकारों ने सशक्त रचनापाठ किया।
            गोष्ठी में डा. एल. सी. जैदिया जैदि, डा. एम. एन. गायकवाड, अजीत सिंह, डा. गीता कृष्णांगी, डा. आर. सी. यादव, राजेंद्र कुमार निब्बन, शैल कुमारी शाक्य, ओमप्रकाश सिंह, डा. अमिता मेहरोलिया, बृजपाल सहज, लोकेश कुमार, शिव बच्चन बौद्ध, डा. विक्रम कुमार, रोकसी कुमारी, डा. हरिराम मीणा, धर्मवीर सिंह और इंदु रवि आदि साहित्य अध्येता और रचयिता उपस्थित रहें। अध्यक्षता कर रहे डा. कुसुम वियोगी ने कहा कि नदलेस सबको जोड़े सबसे जुड़े के आधार पर काम कर रहा है। इसने दलित साहित्य की दो पीढ़ियों को एक मंच पर लाने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। आज की गोष्ठी में सभी रचनाकारों ने सामाजिक परिवर्तन की एक से बढ़कर एक कविता प्रस्तुत की। इस संदर्भ में कविता प्रस्तुत करने वाले सभी कवि विशेष सराहना के पात्र हैं। साथ ही गोष्ठी में आखिर तक जुड़े रहने वाले प्रबुद्ध श्रोता एवं कविगण भी विशेष प्रसंशा के पात्र हैं।

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गोष्ठी में रचनात्मक सहभागिता करने वाले वरिष्ठ साहित्यकार एस. एन. प्रसाद जी और हरीश चंद्र पांडल जी ने उक्त गोष्ठी के विषय में जो अनमोल उद्गार व्यक्त किए, उन्हें नदलेस के ग्रुप से उठाकर ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया जा रहा है -

1.
मासिक काव्य गोष्ठी
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भारत के शीर्षस्थ साहित्यिक संस्था नदलेस द्वारा दिनांक 30/11/2022 को सायँ 7 बजे से मासिक (नवम्बर-2022) कवि गोष्ठी का आयोजन आदरणीय डॉ0 कुसुम वियोगी जी कीअध्यक्षता में किया गया था। गोष्ठी का संचालन संस्था के महामंत्री डॉ0 अमित धर्मसिंह जी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में दर्जनों लब्ध प्रतिष्ठित कवियों ने स्वरचित रचनाओं का पाठ किया।इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि लगभग 10 बजे रात्रि के बाद भी पूरे जोश खरोश के साथ कविता पाठ का क्रम जारी रहा। कार्यक्रम समाप्ति के बाद भी कविगण जमे रहे। इससे स्पष्ट है कि इस संस्था का अन्य संस्थाओं से अधिक क्रेज है। इस संस्था का आदर्श वाक्य है " सबसे जुड़ें , सबको जोड़ें।" यह केवल आदर्श वाक्य दिखावे में नहीं है बल्कि धरातल पर फलित भी है।मुझे पूर्ण विश्वास है कि विद्वान पदाधिकारियों के निरन्तर सार्थक प्रयास के फलस्वरूप यह संस्था शीघ्र ही अपने व्यापक उद्देश्यों की पूर्ति कर समाज को वांछित दशा व दिशा देने में सक्षम और सफल होगी।
      अध्यक्ष डा0 वियोगी जी, महामंत्री डॉ0 अमित धर्मसिंह जी एवं समस्त पदाधिकारियों तथा सहयोगी साहित्यकार बन्धुओं को बहुत बहुत बधाई।
    -- एस एन प्रसाद,लखनऊ।

2.
नदलेस से जुड़कर मुझे इस बात का अहसास हुआ कि,नदलेस दो पीढ़ियों को साथ लेकर चलने वाली साहित्यिक मंच है,नदलेस के वरिष्ठ साहित्यकार, कलमकार साथी नये रचनाकारों को बेहतर लिखने के लिए प्रेरित करते हैं साथ ही साथ उत्साह भी बढ़ाते हैं (सब जुड़े सबको जोड़े) इस बात को सार्थक करते हैं मंच के महासचिव आदरणीय अमित धर्मसिंह जी उन्होंने मुझे ब्यक्तिगत फोन करके मेरा उत्साह वर्धन किया साथ ही मुझे मंच से जोड़ने में मदद भी किया, मैं छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूं जहां दलित साहित्य लिखने वाले,नही के बराबर है, मुझे उम्मीद ही नहीं यकीन है कि मै (नदलेस) से जुड़कर नदलेस से जुड़े सभी सम्मानित ओजस्वी, तर्कशील, बौद्धिक, साथियों से बहुत कुछ सीख पाउंगा और दलित साहित्य का सेवा निरंतर करता रहुंगा।मच के अध्यक्ष आदरणीय डॉ कुसुम वियोगी सर जी,एस एन सिंह साहब आदि वरिष्ठ रचनाकारों को सुनना मेरे लिए अद्भुत पल रहा है।
जय भीम नमो बुद्धाय

हरीश पांडल
विचार क्रांति
छत्तीसगढ़।

#गोष्ठी की विस्तृत रिपोर्ट जल्दी ही प्रस्तुत की जायेगी।

https://www.truestory.page/2022/12/blog-post.html

https://risingbihar.in/news/संविधान-दिवस-और-ज्योतिबा/










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