20/10/2022 को हुई कार्यकारिणी की कार्यशाला की रिपोर्ट

 



नदलेस की कार्यकारिणी की कार्यशाला और वार्षिकी 'सोच' के आगामी अंक के लिए नदलेस की कार्यकारिणी की मीटिंग...

          नव दलित लेखक संघ की दूसरी कार्यकारिणी की मीटिंग, 20 अक्टूबर 2022, दिन बृहस्पतिवार को आर्ट फैकल्टी, नॉर्थ कैंपस, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉन में हुई। मीटिंग के प्रथम चरण में आजीवन सदस्यता के संदर्भ और कार्यकारिणी की कार्यशाला पर रहा और दूसरा चरण सोच के आगामी अंक के संपादन और प्रकाशन को लेकर रहा। मीटिंग की अध्यक्षता बंशीधर नाहरवाल ने की और संचालन डा. अमिता मेहरोलिया ने किया। बैठक में, नदलेस के अभी तक बने आजीवन सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। गत कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। आगामी कार्यक्रमों की योजना तैयार की गई। साथ ही कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और सदस्यों के कर्तव्यों और अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की गई।

          मीटिंग के आरंभ में डा. अमित धर्मसिंह ने नदलेस की आजीवन पंजीकृत सदस्यता के विषय में विस्तार से बताया। नदलेस की आजीवन पंजीकृत सदस्यता लेने वाले सदस्यों को जीवन पर्यंत नदलेस के कार्यक्रमों की सूचना और निमंत्रण दिया जायेगा। कार्यक्रमों में समय समय पर उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी और सोच में उनकी रचनाओं को वरीयता दी जाएगी, बशर्ते की रचनाएं प्रकाशन योग्य हों। आजीवन सदस्यों को को पंजीयन संख्या जारी की जाएगी उसके आधार पर वे नदलेस से न सिर्फ जुड़ा हुआ महसूस करेंगे बल्कि वे अपने सदस्य संबंधी अधिकारों का उपयोग भी कर सकेंगे। जैसे अपनी पंजीयन संख्या को वे अपने आईकार्ड आदि पर प्रयोग कर सकेंगे, अपनी पंजीयन संख्या का हवाला देकर नदलेस से संपर्क एवं संवाद कर सकेंगे। नदलेस में अपने प्रति हुई उदासीनता अथवा संगठन के ठीक ढंग से कार्य न करने पर वे संबंधित अध्यक्ष आदि से सवाल कर सकेंगे। साथ ही विभिन्न राज्यों के सदस्यों के साथ संपर्क साध सकेंगे। इसके अलावा अपने राज्य विशेष में कार्यक्रम आदि करवाने के अलावा जरूरत पड़ने पर नियमानुसार स्थानीय अथवा राज्य कार्यकारिणी आदि भी बना सकेंगे। इसके विपरीत सदस्य द्वारा पांच वर्ष तक निष्क्रिय रहने, इस्तीफा देने, अपरिहार्य रूप से विवादित होने और निर्वाण प्राप्त करने की स्थिति में नदलेस के निर्णय सर्वोपरि और सर्वमान्य होंगे। कार्यकारिणी की कार्यशाला के अंतर्गत डा. अमित धर्मसिंह ने नदलेस के संविधान में दर्ज कार्यकारिणी के कर्तव्य और अधिकार का वचन किया और एक एक पदाधिकारी के पद के कर्तव्य और अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ उपस्थित सदस्यों द्वारा किए गए। सवालों के समुचित उत्तर भी दिए।

          सोच के इस अंक के संपादक डा. अनिल कुमार ने जानकारी दी कि आगामी अंक आजीवन सदस्य विशेषांक रहेगा जिसे करीब फरवरी तक प्रकाशित करने की योजना है। वर्तमान में नदलेस के पर्याप्त आजीवन सदस्य हैं फिर भी इस अंक में 31 दिसंबर तक आजीवन सदस्य बनने वाले रचनाकारों की रचनाएं शामिल की जायेंगी, ताकि सदस्य बनने के इच्छुक रचनाकारों को भी सोच में शामिल किया जा सके। सोच का फॉर्मेट पूर्व की तरह ही रखा जायेगा। यानी उसके पांच सोपानों विमर्श सोपान, कथा सोपान, काव्य सोपान नदलेस सोपान और जनमत सोपान के अंतर्गत वर्गीकृत करके ही रचना सामग्री प्रकाशित की जायेगी। डा. अनिल कुमार ने संपादक मंडल के कार्य विभाजन की भी जानकारी दी। सह संपादक रचना सामग्री को प्रथम दृष्टया सेलेक्ट अथवा रिजेक्ट करेंगे। उसके बाद संपादक को सोच की प्रथम सॉफ्ट फाइल बनाकर देंगे। तत्पश्चात वही फाइल प्रकाशन को सौंपी जाएगी। पहला प्रूफ संपादक सहयोग के सदस्य सुरेंद्र और ज्योति कुमारी मिलकर करेंगे, दूसरा प्रूफ सहसंपादक हुमा खातून और डा. हरकेश कुमार मिलकर करेंगे और फाइनल प्रूफ संपादक डा. अनिल कुमार करेंगे। तत्पश्चात सोच को प्रकाशन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह प्रक्रिया फरवरी लास्ट तक संपन्न कर ली जाएगी ताकि मार्च के खत्म होने से पूर्व पत्रिका प्रकाशित की जा सके। मीटिंग में पुष्पा विवेक, लोकेश कुमार, हुमा खातून, महिपाल, सुरेंद्र, ज्योति कुमारी, रॉक्सी, डा. गीता और डा. अमित धर्मसिंह उपस्थित रहे।






























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