नदलेस ने की कहानी एवं काव्य पाठ गोष्ठी





नदलेस ने की कहानी एवं काव्य पाठ गोष्ठी

दिल्ली। नव दलित लेखक संघ की मासिक-गोष्ठी का आयोजन शाहदरा के लोनी रोड स्थित संघाराम बुद्ध विहार मे किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता नदलेस के नव निर्वाचित अध्यक्ष डा. कुसुम वियोगी ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। गोष्ठी कहानी परिचर्चा एवं काव्य पाठ दो चरणों में सम्पन्न हुई। प्रथम चरण मे डा. अमिता मेहरोलिया ने अपनी कहानी 'परित्याग' का वाचन किया। कहानी परित्याग, समाज मे स्त्री की सामाजिक स्थित को दर्शाती है और यह बताती है कि स्त्री कमजोर नहीं है, उसे समाज कमजोर बनाता है। वह अपने निर्णय तभी ले सकती है जब वह आर्थिक रूप से मजबूत होगी। कहानी पर पुष्पा विवेक, गीता, सोमी सैन, अमित धर्मसिंह, लोकेश कुमार, महिपाल, बृजपाल सहज, बंशीधर नाहरवाल और डा. कुसुम वियोगी जी ने सारगर्भित विचार रखें। विचारों में कहानी के मजबूत और कमज़ोर दोनों पक्षों पर खुलकर चर्चा हुई। तदुपरांत दूसरे चरण में काव्य पाठ हुआ। बंशीधर नाहरवाल, महिपाल, अमित धर्मसिंह, पुष्पा विवेक, अमिता मेहरोलिया और डा कुसुम वियोगी ने सामाजिक परिवर्तन की बेहतरीन कविताएं प्रस्तुत की। गोष्ठी में राहुल नागपाल, फूलचंद और रोक्सी आदि उपस्थित रहे।

बंशीधार नाहरवाल ने कविता "बुढ़ापा बैरी आयेगा" में मानव की वृद्धावस्था को प्रस्तुत करने का प्रयास किया। महिपाल ने अपनी कविता "मुझे मत मारो" प्रस्तुत की, जिसमें एक लड़की भ्रूण अपनी माँ से अपनी बात कहती है कि उसे भी इस जहाँ में आना है। डा. अमित धर्मसिंह ने कविता "एक दिन के लिए एक कविता " प्रस्तुत की। पुष्पा विवेक ने दो कविताएँ प्रस्तुत की, जिनके शीर्षक "मेरा संघर्ष" , और "सविधान बचाओ" रहे। डा. अमिता मेहरोलिया ने कविता "औरत क्या चाहती है" प्रस्तुत की जिसमें एक नारी की क्या अपेक्षाएँ हैं, को दर्शाया गया। अंत में, अध्यक्षता कर डा. कुसुम वियोगी ने अपना वियोग श्रृंगार का गीत 'खत जितने लिखे सब तुम्हें ही लिखे' गाकर प्रस्तुत किया। अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने कहा कि गोष्ठी अपने उद्देश्य में पर्याप्त सफल रही। गोष्ठी को वास्तव में कार्यशाला की तरह होना चाहिए, जिसका मकसद एक दूसरे से सीखने और सिखाने का होना चाहिए। खासतौर से कहानी पर जो आज परिचर्चा हुई, वह काबिले तारीफ रही। सभी का काव्यपाठ भी महत्त्वपूर्ण रहा। सभी ने अपनी कविताओं में अपनी सामाजिक अनुभवजन्य स्थितियों परिस्थितियों को बखूबी उकेरा। धन्यवाद ज्ञापन बंशीधर नाहरवाल ने किया।

प्रेषक : सोमी सैन

प्रचार सचिव, नदलेस

26/09/2022

93549 84198


रिपोर्ट

नदलेस ने की कहानी एवं काव्य पाठ गोष्ठी

दिल्ली। नव दलित लेखक संघ की मासिक-गोष्ठी का आयोजन शाहदरा के लोनी रोड स्थित संघाराम बुद्ध विहार मे किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता नदलेस के नव निर्वाचित अध्यक्ष डा. कुसुम वियोगी ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। गोष्ठी कहानी परिचर्चा एवं काव्य पाठ दो चरणों में सम्पन्न हुई। प्रथम चरण मे डा. अमिता मेहरोलिया ने अपनी कहानी 'परित्याग' का वाचन किया। कहानी परित्याग, समाज मे स्त्री की सामाजिक स्थित को दर्शाती है और यह बताती है कि स्त्री कमजोर नहीं है, उसे समाज कमजोर बनाता है। वह अपने निर्णय तभी ले सकती है जब वह आर्थिक रूप से मजबूत होगी। कहानी पर पुष्पा विवेक, गीता, सोमी सैन, अमित धर्मसिंह, लोकेश कुमार, महिपाल, बृजपाल सहज, बंशीधर नाहरवाल और डा. कुसुम वियोगी जी ने सारगर्भित विचार रखें। विचारों में कहानी के मजबूत और कमज़ोर दोनों पक्षों पर खुलकर चर्चा हुई। तदुपरांत दूसरे चरण में काव्य पाठ हुआ। बंशीधर नाहरवाल, महिपाल, अमित धर्मसिंह, पुष्पा विवेक, अमिता मेहरोलिया और डा कुसुम वियोगी ने सामाजिक परिवर्तन की बेहतरीन कविताएं प्रस्तुत की। गोष्ठी में राहुल नागपाल, रूपराम बागी और रोक्सी आदि उपस्थित रहे।

बंशीधार नाहरवाल ने कविता "बुढ़ापा बैरी आयेगा" में मानव की वृद्धावस्था को प्रस्तुत करने का प्रयास किया। महिपाल ने अपनी कविता "मुझे मत मारो" प्रस्तुत की, जिसमें एक लड़की भ्रूण अपनी माँ से अपनी बात कहती है कि उसे भी इस जहाँ में आना है। इस कविता की कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार रही- 

"माँ | माँ ||

मुझे मत मारो,

मत मारो मुझे माँ।

मैं हूँ तुम्हारी छाया,

तुम्हारा अस्तित्व मुझमें समाया। 

मुझे भी हैं, इस जहाँ में आना। 

मैं भी चाहती हूँ, अपने सपनों को सजाना।"

डा. अमित धर्मसिंह ने कविता "एक दिन के लिए एक कविता " प्रस्तुत की। इस कविता की कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार रही- 

"एक दिन हर एक सम्मिलित रहेगा

हर एक की खुशी में, अपनी खुशी के साथ

पीछे छूट चुके और पीछे जाने वाले भी

आ जायेंगे आगे

और एक-दूसरे से गले मिलेंगे

फिर सभी अपनी जगह और पहचाने छोड़ते हुए

एमा जायेंगे एक-दूसरे में

एक दिन ऐसा जरूर होगा

उस एक के लिए भी लिखो जायेगी एक कविता

आखिरी कविता।"

पुष्पा विवेक ने दो कविताएँ प्रस्तुत की, जिनके शीर्षक "मेरा संघर्ष" , और "सविधान बचाओ" रहे।

इस कविता की कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार रही- 

(1) "मेरा संघर्ष, स्वामिमान का संघर्ष है

मैं लड़ती हूँ व्यवस्था के खिलाफ

मेरी लड़ाई, अंधविश्वास, पाखण्ड वाद

मैं लड़ती हूँ न्याय पाने के लिए

मेरी लड़ाई अन्याय पूर्ण व्यवस्था से है

मेरा संघर्ष स्वाभिमान का संघर्ष है।"

(2) "संविधान बचाओ

आओ चलो संविधान बचाएं

प्राघव बाद के चंगुल से

अपने अधिकार बचाएं।"

 डा. अमिता मेहरोलिया ने कविता "औरत क्या चाहती है" प्रस्तुत की जिसमें एक नारी की क्या अपेक्षाएँ हैं, को दर्शाया गया। इस कविता की कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार रही- 

"औरत क्या चाहती है

खुलके हंसना खिलखिलाना

उन्मुक्त हवा में सांस लेना

औरत क्या चाहती है

समान काम समान वेतन

संसद में हो ३३फीसद आरक्षण

औरत क्या चाहती है

माय बॉडी माय चॉइस..."

अंत में, अध्यक्षता कर डा. कुसुम वियोगी ने अपना वियोग श्रृंगार का गीत 'खत जितने लिखे सब तुम्हें ही लिखे' गाकर प्रस्तुत किया। अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने कहा कि गोष्ठी अपने उद्देश्य में पर्याप्त सफल रही। गोष्ठी को वास्तव में कार्यशाला की तरह होना चाहिए, जिसका मकसद एक दूसरे से सीखने और सिखाने का होना चाहिए। खासतौर से कहानी पर जो आज परिचर्चा हुई, वह काबिले तारीफ रही। सभी का काव्यपाठ भी महत्त्वपूर्ण रहा। सभी ने अपनी कविताओं में अपनी सामाजिक अनुभवजन्य स्थितियों परिस्थितियों को बखूबी उकेरा। धन्यवाद ज्ञापन बंशीधर नाहरवाल ने किया।

प्रेषक : सोमी सैन

प्रचार सचिव, नदलेस

26/09/2022




















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