नदलेस का एक वर्ष पूरा होने के उपलक्ष में काव्य एवं विचार गोष्ठी, 31/08/2022

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नदलेस का एक वर्ष पूरा होने के उपलक्ष में काव्य एवं विचार गोष्ठी

          नदलेस का एक वर्षीय पड़ाव सफलतापूर्वक पूरा होने के उपलक्ष में नदलेस द्वारा काव्य एवं विचार गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता डा. अनिल कुमार ने और संचालन डा. अमिता मेहरोलिया ने किया। काव्यपाठ करने वालों में क्रमशः इंदु रवि, बंशीधर नाहरवाल, समय सिंह जोल, प्रदीप कुमार, अमित धर्मसिंह, डा. कुसुम वियोगी, डा. बिपिन कुमार, कर्मशील भारती, मामचंद सागर, ईश्वर राही, एस. एन. प्रसाद, उमेश राज़, डा. नविला सत्यादास, रवि निर्मला सिंह, भूपसिंह भारती, चितरंजन गोप लुकाटी, अखिलेश कुमार और मदनलाल राज़ आदि गणमान्य कवि रहे। डा. मुकेश मिरोठा की मंगलकामनाएं, सोमी सैन और डा. अमिता मेहरोलिया की टिप्पणी तथा डा. अनिल कुमार के अध्यक्षीय वक्तव्य से गोष्ठी समृद्ध हुई। उक्त के अतिरिक्त गोष्ठी को अपनी उपस्थिति से समृद्ध करने वालों में क्रमश: डा. गीता कृष्णांगी, सरुप सियाल्वी, आर. पी. सोनकर, डा. नरेंद्र, श्यामलाल राही, बृजपाल सहज, गुलफ्शा सिद्दीकी, खन्नाप्रसाद अमीन, जगदीश पंकज और आर. जी. कुरील आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।

          गोष्ठी में एक से बढ़कर एक रचना प्रस्तुत की गई। अधिकतर कविताओं में समाज के शोषित और वंचित समाज की पीड़ा उभरकर सामने आई। कुछ कवियों ने श्रृंगार रस की कविताओं के पाठ और गायन से गोष्ठी को सुमधुरता प्रदान की। सर्वप्रथम इंदु रवि ने 'मैं कोई आम नारी नहीं हूं ' शीर्षक वाली कविता पढ़ी, उसके बाद बंशीधर नाहरवाल ने 'हाय अकेला छोड़ गई' वियोग श्रृंगार की कविता का सस्वर पाठ किया। समय सिंह जोल ने भी गाकर ही व्यंग्य गीता पढ़ा - " सुनो मेरे नेताजी! विकास क्या कराओगे/ पांच साल में एक बार दर्शन देने आओगे/ जातियों में द्वेष तुम फैलाते हो/ हिंदू और मुसलमान को कितना लडाओगे/ पांच साल में एक बार दर्शन देने आओगे।" प्रदीप कुमार ने बाल कविता कुछ यूं प्रस्तुत की -"मेरा जन्मदिन आया है/ ऊपर देखा,नीचे देखा/ अंदर देखा, बाहर देखा/ माँ ने खूब सजाया है/ मेरा जन्मदिन आया है।।" प्रेम और स्वार्थ को केंद्र बनाकर डा. अमित धर्मसिंह ने कविता पढ़ी -" किसी ने झूठ कहा/ कि प्रेम गली अति सांकरी/ ता में दो न समाय/ प्रेम गली में तो समा सकती है दुनिया/ मगर स्वार्थ गली अति सांकरी/ ता में कोई न समाय।।" डा. कुसुम वियोगी ने वियोग श्रृंगार की कविता का सुमधुर गायन किया- "इतने मीत हुए ना अपने, जितने गीत सगे/ ढाई आखर प्रेम का पढ़ने सारी रात जगे।।" प्रो. बिपिन कुमार ने धार्मिक उन्माद वाली भीड़ को अपनी कविता का विषय बनाया। उन्होंने बेरहम कविता में पढ़ा- "भीड़ नहीं है/ विध्वंशकारी शक्तियां हैं/ एकजुटता है इनमें/ शक्ल ले चुकी है भीड़ का/ भीड़ तो तमाशबीन होती है/ भीड़ नरसंहार नहीं करती/ वह तो नरसंहार देखती है/ भीड़ नहीं है अमानुषों की टोली है।" 

          कर्मशील भारती ने समसामयिक विषय को लेकर कविता कुछ यूं पढ़ी - "मैं जे एन यू की कुलपति शांतिश्री धुलीपुडी पंडित बोल रही हूं/ कुछ मिथक/कुछ इतिहास के पन्ने खोल रही हूं।।" प्रेम को आधार बनाकर मामचंद सागर ने गीत प्रस्तुत किया-"जो तुमसे छिपी है/ वो गीतों में गुंथी है। आँखों ने कहा है/ और कण्ठ से फुटी है।।" डा. ईश्वर राही ने जालोर में अध्यापक द्वारा पीटने से हुई मासूम बच्चे इंद्र कुमार मेघवाल की मृत्यु पर कविता पढ़ी- "बलि चढ़ गया वो/ जिसे अभी तक न था पता धर्म का/ जाति की दीवारों का।।" एस. एन. प्रसाद ने नदलेस टीम को विषय बनाकर कविता पढ़ी- "कर्तव्य से व्यक्तित्व निखरता है/और उस व्यक्ति की यही विशेषता है/ कि लेकर सबका साथ/ हर वक्त आगे बढ़ता है/ इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है/ खुला हृदय आसमान की तरह/ सबके लिए समान रखता है/ निरन्तर समाज के हित में नदलेस का हर पदाधिकारी सर्वप्रथम स्वयं को परखता है/ साहित्य की समझ सम्यक दृष्टि और दक्षता है।" इसके बाद उमेश राज़ ने सामाजिक चिंता और सरोकार वाली कविताएं प्रस्तुत की। तत्पश्चात, डा. नविला सत्यादास ने अपनी धीर गंभीर कविता में पढ़ा- वे शब्दों से संवाद नहीं/ शिकार करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं/ बंदूक जब चलती है कितनी भी ताबड़तोड़ चले/ कुछ ही संख्याओं का शिकार करती है/ मगर शब्द सदियाँ काटते हैं।" रवि निर्मला सिंह ने मुनाफा और आदमी शीर्षक से अपनी कविता कुछ यूं प्रस्तुत की-"मुनाफ़ा और आदमी/जैसे जैसे बढ़ता जाता हैमुनाफ़ा/ वैसे वैसे मरता जाता है आदमी।"

          भूपसिंह भारती ने मटका कांड और बाबा साहब अम्बेडकर पर रचनाएं पढ़ीं। बाबा साहब पर गाकर प्रस्तुत किए गए गीत की पंक्तियां कुछ यूं रहीं-"मेरे भीमराव ने भारत का सुंदर संविधान बनाया है/ हर शब्द वाक्य हर पन्ने में समता का भाव समाया है।।" चिंतरंजन गोप लुकाटी ने सामाजिक अन्याय और भेदभाव को कविता का विषय बनाया। उन्होंने पढ़ा- समय बड़ा नाजुक है/ जब गुलाम भी बोले/ मालिक की भाषा/ रहे खड़ा उस के पक्ष में/ करे प्रतिरोध अपने मुक्तिकामी का/तो समझो/समय बड़ा नाजुक है!" इसके बाद अखिलेश कुमार ने चुनावी हथियार और दलित उद्धार शीर्षक से कविता पढ़ी। उन्होंने पढ़ा - "दलित उद्धार एक उपहार है/चुनावी थाल सजाने को/ महात्मा,मर्यादा पुरुषोत्तम समाज सुधारक की उपाधि धारण करने को।" तत्पश्चात, मदनलाल राज़ ने सामाजिक व्यंग्य करने वाली कविताएं प्रस्तुत की। उन्होंने एक कविता में कुछ यूं पढ़ा- "जब-जब भी किसी इंसान ने आदमी को जगाया है/तब-तब इन आदमियों ने इंसान को/ मौत की नींद सुलाया है/ विश्वास ना हो तो/ दार्शनिक सुकरात-सा जीवन जीना पड़ेगा/ आदमी को इंसान बनाने पर/ विष का प्याला पीना पड़ेगा।"

          उक्त के अतिरिक्त, डा. मुकेश मिरोठा ने एक वर्ष सफलापूर्वक पूरा करने पर नदलेस की पूरी टीम को मंगलकामनाएं दीं, उन्होंने कहा कि 'मात्र एक वर्ष में जिस मेहनत से नदलेस की टीम ने रचनात्मक कार्य किए हैं, उससे साहित्य जगत और दलित समाज में नदलेस का बहुत ऊंचा मुकाम उभरकर सामने आया है। मैं नदलेस से शुरू से ही जुड़ता रहा हूं, इसकी एक खास वजह अमित धर्मसिंह भाई है, उनसे मैं जबसे जुड़ा हूं, तबसे उनसे मेरा बड़ा ही आत्मीय रिश्ता रहा है, इसलिए भी मुझे नदलेस से जुड़ना अच्छा लगता रहा है। नदलेस ऐसे ही तरक्की करेगा इसमें अब कोई संदेह नहीं रहा गया है।' सोमी ने कहा कि 'मैं अभी नदलेस की दूसरी ही गोष्ठी में उपस्थित हुई हूं। मैं साहित्य की नहीं, इतिहास की विद्यार्थी हूं, लेकिन मुझे नदलेस से जुड़कर बहुत अच्छा लग रहा है। सच में नदलेस में जुड़ना किसी उपलब्धि से कम नहीं।' संचालन कर रही डा. अमिता मेहरोलिया ने कहा कि मैंने नदलेस से जुड़कर कुछ ही महीनों में बहुत कुछ सीखा है। खासतौर से अमित भाईसाहब से संचालन आदि करना सीखा जिससे मुझमें मंचों से अपनी बात रखने का साहस पैदा हुआ। साथ ही, नदलेस से जुड़कर मैंने दलित साहित्य, संगठन और समाज के विषय में भी, मैंने बहुत कुछ जाना और समझा। वास्तव में मेरे जैसे युवाओं के लिए नदलेस एक बेहतरीन मंच है। 

          अध्यक्ष डा. अनिल कुमार ने रचनाकारों की रचनाओं की सराहना करते हुए कहा कि 'नदलेस आगे भी सामाजिक और साहित्यिक मुहिम में अग्रणी बना रहेगा, ऐसा मेरा विश्वास है। नदलेस के गठन को आज एक वर्ष पूरा होने जा रहा है जिसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है; खासतौर से अमित भाई जिनकी मेहनत और समझ बूझ से नदलेस कम समय में अधिक ऊंचाई हासिल की है। मुझे उम्मीद है कि सितंबर में जो नई कार्यकारिणी गठित होने जा रही है, वह भी नदलेस के गत वर्ष के कार्यों से बहुत कुछ सीखेगी और अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करेगी।' सभी उपस्थित साहित्यकारों का आभार ज्ञापित करते हुए डा. अमित धर्मसिंह ने कहा कि 'हमारे छोटे-छोटे सामूहिक प्रयास ही, एक दिन बड़ा काम कर दिखाते हैं। हमें अपनी छोटी-छोटी व्यक्तिगत और सांगठनिक भूले अथवा चूकों को दूर करने की आवश्यकता है ताकि दलित समाज और साहित्य का सही निर्देशन और उत्थान किया जा सके। आज की ऐतिहासिक गोष्ठी में जिन युवा और वरिष्ठ दलित रचनाकारों ने सहभागिता की, उन सभी का यथायोग्य आभार ज्ञापित किया जाता है और अपेक्षा की जाती है कि आगे भी आप सबका रचनात्मक सहयोग मिलता रहेगा।

डा. अमित धर्मसिंह

महासचिव, नदलेस।

01/09/2022

9310044324




















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