नदलेस की विचार एवं काव्य गोष्ठी, 24/07/2022
रिपोर्ट :
नव दलित लेखक संघ की विचार एवं काव्य गोष्ठी
दिल्ली। नव दलित लेखक संघ की विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन कनॉट प्लेस स्थित, कॉफी हाउस पर हुआ। गोष्ठी की अध्यक्षता कर्मशील भारती ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। उपस्थित दलित साहित्यकारों में मदनलाल राज, समय सिंह जोल, बृजपाल सहज, गीता कृष्णांगी, इंदु रवि, कमलेश कुमार, मधु कुमारी, प्रीति कुमारी, कृष्णकांत आदि उपस्थित रहे। सर्वप्रथम डा. अमित धर्मसिंह ने गोष्ठी के विषयों पर विस्तार से बात रखी, तत्पश्चात गोष्ठी के प्रथम चरण में नदलेस की पत्रिका सोच और नदलेस के रजिस्ट्रेशन और विस्तार को लेकर विस्तार से विचार विमर्श हुआ। सोच को वार्षिक संकलन बनाने और नदलेस को विस्तार देने के विषय में सभी वक्तागण एकमत से सहमत हुए। तय हुआ कि सोच को फिलहाल वार्षिक संकलन के रूप में रखा जाए और संबंधित प्रकाशनों के द्वारा आईएसबीएन के अंतर्गत ही प्रकाशित कराई जाए। जिसका संपूर्ण अधिकार व दायित्व, प्रति वर्ष चुने जाने वाले संपादक विशेष का होगा। इससे संगठन की पत्रिका व्यक्ति विशेष के स्वामित्व में जाने से बचेगी और प्रत्येक वर्ष नए संपादक को संपादित करने का अवसर मिलेगा। विश्वास जताया गया कि ऐसा करना संपादक, पत्रिका और नदलेस, तीनों के लिए हितकर साबित होगा। नदलेस के रजिस्ट्रेशन को अगली कार्यकारिणी बनने तक स्थगित किया गया। माना गया कि अभी नदलेस को अपनी रचनात्मक गतिविधियों से बहुत कुछ सीखना है, तभी इसका फाइनल बॉयलोज तैयार किया जा सकेगा और तभी इसके रजिस्ट्रेशन के विषय में कार्यवाही की जा सकेगी। नदलेस विस्तार के संदर्भ में तय किया गया कि विविध क्षेत्रों से नदलेस की स्थानीय कार्यकारिणी बनाये जाने की जो मांग आ रही हैं उन्हें स्वीकार किया जाए और जिस किसी भी क्षेत्र विशेष में दलित रचनाकार नदलेस की स्थानीय कार्यकारिणी बनाना चाहते हैं वे केंद्रीय कार्यकारिणी दिल्ली को बनाई जाने वाली स्थानीय कार्यकारिणी का विवरण नदलेस के वर्तमान अध्यक्ष अथवा महासचिव के नाम डाक द्वारा अथवा अन्य माध्यमों से भेज सकते हैं। जिस पर केंद्रीय कार्यकारिणी तत्काल अपने निर्णय और अनुमति आदि से अवगत कराएगी। तत्पश्चात, संबंधित क्षेत्रों में नदलेस की स्थानीय कार्यकारिणी बनाई जा सकेगी।
गोष्ठी के दूसरे चरण में काव्य पाठ हुआ जिसमें इंदु रवि ने स्त्री चेतना, अधिकार और उसकी सीमाओं पर कविता पढ़ी और बताया कि कैसे उसे अपने में भी सुधार करते हुए अंबेडकर और बुद्ध के मार्ग पर चलना चाहिए। उनकी कविता की पंक्तियां कुछ इस प्रकार रही - "महिलाओं तेरा कल्याण कैसे? जिसका आदर्श दूसरों के, कहने पर पति छोड़ने वाला होगा। इसमें कोई शक नहीं तुम्हारा पति भी, कोई अंकुश लगाकर, तुम्हें नहीं छोड़ सकता है।" समय सिंह जोल ने जाति तू जाती क्यों नहीं शीर्षक से गीतिकाव्य रचना का मधुर गायन किया। उनकी रचना ने जाति को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की। "हे जाति तू जाती क्यों नहीं? तेरे कारण मानव ने मानव से दंश झेला। हजार प्रतिभा थी तेरे में फिर भी पीछे धकेला।। तेरे कारण गुणी मानव भी सम्मान पाता क्यों नहीं? हे जाति तू जाती क्यों नहीं?" मदनलाल राज़ ने विविध प्रतीकों और बिंबों के माध्यम से मनुष्य के सामाजिक चरित्र को उजागर किया। उनकी क्षणिकाओं में वर्तमान व्यवस्था और मनुष्य की दुष्प्रवृत्ति पर करारे व्यंग्य नजर आएं। उनके द्वारा पढ़ी गई सभी कविताएं कथ्य और शिल्प दोनों रूप में सशक्त रहीं। उन्होंने कुछ यूं पढ़ा- "चिड़िया ने जब गिद्ध की नीयत पर ऊंगली उठाई। तो कौवों ने करी कांव-कांव, और बाज ने आंख दिखाई। चिड़िया के चरित्र पर काली कुतिया ने सवाल उठाए। लोमड़ी ने गिद्ध की परोपकरिता के कई उदाहरण गिनवाए। विषैला विषधर विषदंत विहीन हो, अब असहाय हो गया। आज के माहौल में नेता नाग का पर्याय हो गया। अध्यक्षता कर रहे कर्मशील भारती ने अपनी विश्लेषणात्मक लंबी कविता के माध्यम से सामाजिक न्याय की विसंगतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने यह कविता "न्यायिक चरित्र और निष्पक्षता का अभाव" शीर्षक से पढ़ी। घटना प्रधान इस कविता में उन्होंने मोहन दलित के प्रकरण में आए फैसले से असमति दर्ज करते हुए लॉर्ड चैम्स फोर्ड का कथन कोट किया कि भारत में संबंधितों को इसलिए जज नहीं बनाना चाहिए क्योंकि उनका चरित्र में न्यायिक और निष्पक्षता का भाव नहीं होता।" कुल मिलाकर नदलेस की गोष्ठी अप्रत्याशित रूप से सफल रही। गोष्ठी में उपस्थित सभी साहित्यकारों और कवियों का धन्यवाद ज्ञापन बृजपाल सहज ने किया।
डा. अमित धर्मसिंह
महासचिव, नदलेस
9310044324
25/07/2022











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