नदलेस की कार्यकारिणी की बैठक, 19 मई, 2022
नदलेस की कार्यकारिणी की बैठक
नव दलित लेखक संघ ने 'गत कार्यक्रम की समीक्षा, आगामी कार्यक्रम की योजना, सदस्यता फॉर्म व शुल्क और सोच पत्रिका के संबंध में' 19 मई, 2022 को कार्यकारिणी की बैठक का आयोजन, दिल्ली विश्विद्यालय के नॉर्थ कैंपस, हिंदी विभाग, आर्ट फैकल्टी के लॉन में किया। बैठक की अध्यक्षता नदलेस के अध्यक्ष डा. अनिल कुमार ने की व संचालन नदलेस के महासचिव डा. अमित धर्मसिंह ने किया। बैठक में नदलेस कार्यकारिणी के क्रमशः डा. अमित धर्मसिंह, डा. गीता कृष्णांगी, डा. अमिता मेहरोलिया, कर्मशील भारती, लोकेश चौहान, बृजपाल सहज, डा. अनिल कुमार एवं उमरशाह आदि सदस्य एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में गत कार्यक्रम (जो कि पुष्पा विवेक के कविता संग्रह 'पथरीली राहों पर' के लोकार्पण एवं परिचर्चा पर केंद्रित था) पर सार्थक चर्चा की गई। सभी ने माना कि कार्यक्रम अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल रहा। दिल्ली विश्विद्यालय के हिंदू कॉलेज में हुए इस कार्यक्रम को डा. रतन लाल का सान्निध्य और रचनात्मक सहयोग मिलना विशेष गणनीय रहा। पूरे कार्यक्रम को करीब छह भागों में अंबेडकरनामा पर स्थान देने के लिए नदलेस के सभी साथियों ने डा. रतन लाल जी के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके अतिरिक्त उपस्थिति को लेकर अभी और अधिक काम करने की जरूरत महसूस की गई।
आगामी कार्यक्रम के संबंध में डा. अमित धर्मसिंह ने बताया कि हमारे पास आगे के कार्यक्रम करने के लिए क्रमशः कुसुम वियोगी जी की पुस्तकों पर परिचर्चा कार्यक्रम(जो कि गत कई माह से स्थगित चला आ रहा है) करना, कर्मशील भारती जी का सद्य प्रकाशित नाटक क्रांतिसूर्य ज्योतिबा फुले पर परिचर्चा करना और हाल ही में प्रकाशित होकर आई सोच पत्रिका पर परिचर्चा कार्यक्रम करना आदि हैं। सभी ने इसी क्रम में कार्यक्रम किए जाना स्वीकृत किया। इसके अतिरिक्त कर्मशील भारती जी के साथ-साथ बाकी सदस्यों ने भी माना कि नदलेस द्वारा विभिन्न विषयों पर कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए। जिनमें दिल्ली के साथ-साथ, बाहर से भी वक्ता बुलाए जाने जाएं, जिससे कि दलित साहित्यकारों को क्या लिखना और कैसे लिखना है, इसका वास्तविक ज्ञान हो सके।
उक्त सार्थक चर्चा के उपरांत बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने नदलेस की सदस्यता के फॉर्म भरकर महासचिव के पास जमा किए। कुछ सदस्यों ने अपना बकाया शुक्ल कोषाध्यक्ष बृजपाल सहज जी के पास जमा करवाया। संपादक द्वारा उपस्थित सभी सदस्यों को सोच पत्रिका की एक-एक प्रति भेंट की गई। पत्रिका के वितरण के संदर्भ में तय किया गया कि पत्रिका की एक भी प्रति निशुल्क वितरित नहीं की जायेगी। यद्यपि कोई भी सदस्य, अपने पास से पत्रिका की सहयोग राशि कोषाध्यक्ष जी के पास जमा करवाकर कितनी भी पत्रिका, किसी को भी भेंट स्वरूप दे सकता है। यह भी तय किया गया कि उक्त आधार पर जमा होने वाली राशि नदलेस के आगामी कार्यक्रमों और सोच पत्रिका के प्रकाशन में ही खर्च की जा सकेगी। चूंकि पत्रिका संगठन की धरोहर है इसलिए उसे पुनः प्रकाशित करने का अधिकार भी नदलेस के पास ही सुरक्षित होगा।
डा. अमित धर्मसिंह
महासचिव, नदलेस
25/05/2022















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