भारतीय दलित साहित्य एवं साहित्यकार कोश निर्माण के संदर्भ में नदलेस की ऑनलाइन मीटिंग की रिपोर्ट

रिपोर्ट

दलित साहित्य एवं साहित्यकार कोश निर्माण को लेकर नदलेस ने की ऑनलाइन बैठक 

भारतीय दलित साहित्य और साहित्यकार कोश निर्माण को लेकर नदलेस ने ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी की अध्यक्षता डा. अनिल कुमार ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। सभी वक्ताओं ने माना कि दलित साहित्य में कोश निर्माण की महती आवश्यकता है। सभी ने कोश निर्माण में सहयोग करने की सहमति दिखाई। उपस्थित सभी साहित्यकारों ने माना कि दलित साहित्य को लेकर आज जो भी असमंजस की स्थिति है, वह कोश निर्माण से दूर होगी। अध्येताओं, शोधार्थियों को कोश से बड़ी मदद पहुंचेंगी। साथ ही दलित साहित्य के तात्विक इतिहास को स्थायित्व मिल सकेगा। अध्यक्षीय वक्तव्य में डा. अनिल कुमार ने कहा कि दलित साहित्य एवं साहित्यकार कोश निर्माण की नदलेस की यह परियोजना हर एंगल से बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। इसके लिए नदलेस की संपूर्ण टीम बधाई की पात्र है। खासतौर से कोश निर्माण की परिकल्पना करने वाले नदलेस के वर्तमान महासचिव डा. अमित धर्मसिंह महती बधाई के पात्र हैं। वास्तव में कोश निर्माण का यह कार्य बहुत अधिक श्रम का कार्य है, किंतु यदि एक बार यह हो गया तो यह दलित साहित्य की नींव को मजबूत आधार प्रदान करेगा। मैं खुद जब दलित साहित्य को लेकर शोध कर रहा था, तब शोध के लिए सामग्री संकलन संबधी बड़ी परेशानियां आईं। एक भी पुस्तक ऐसी नहीं थी जो दलित साहित्य की समग्रता में जानकारी देती हो अथवा दलित साहित्यकारों से परिचय करवाने वाली हो। यदि यह कोश निर्मित हो जाता है तो निश्चित ही शोधार्थियों और दलित साहित्य लिखने-पढ़ने वालों की बहुत सी परेशानियों का स्वतः ही हल हो जायेगा।
          डा. अमित धर्मसिंह ने कोश निर्माण की परिकल्पना और परियोजना के विषय में विस्तार से बताते हुए कहा कि आज दलित साहित्य को लिखे जाते हुए करीब छह दशकों से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान भारत भर में बहुत सा दलित साहित्य लिखा व छपवाया जा चुका है। हर राज्य और हर भाषा के बहुत से लेखक दलित साहित्य लिख-पढ़ रहे हैं। दलित साहित्य लिखने पढ़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हिंदी साहित्य के आधुनिक काल में कोई भी युग इतना बड़ा और इतने समय तक लगातार बना नहीं रह सका है जितना कि दलित साहित्य का बना हुआ है इसलिए आज इसके कोश निर्माण की महती आवश्यकता है। इससे दलित साहित्य के तात्विक इतिहास को तो स्थायित्व मिलेगा ही साथ ही शोधार्थियों और अध्येताओं को भी शोध और अध्ययन में बड़ी मदद पहुंचेगी। अक्सर देखने में आता है कि दलित समाज की नवोदित पीढ़ी बड़े-बड़े विश्विद्यालयों से जुड़कर भी दलित साहित्य और साहित्यकारों के समुचित संपर्क में नहीं आ पाती हैं। न ही वे इस संदर्भ में समुचित जानकारी हासिल कर पाते हैं। वे दलित साहित्य और साहित्यकारों के विषय में अखबारों और पुस्तकों में तो पढ़ते हैं, किंतु अपने समवर्ती लेखकों से सीधे तौर पर जुड़ नहीं पाते हैं। न ही उन्हें ऐसी कोई पुस्तक या कोई दलित लेखक मदद करता है जिससे कि बहुत थोड़े श्रम और अर्थ के खर्च में दलित साहित्य और साहित्यकारों के विषय में समग्रता से जानने, समझने और पढ़ने को उपलब्ध हो सके, इसलिए भारतीय दलित साहित्य एवं साहित्यकारों कोश का निर्माण किया जाना बेहद जरूरी है; जिसमें संपूर्ण भारत और प्रत्येक भाषा के दलित साहित्यकार शामिल किए जायेंगें। कोश में दलित शब्द का अर्थ, परिभाषा, आंदोलन और संक्षिप्त इतिहास को भी शामिल किया जाएगा। यानी दलित साहित्य का जो भी आधारभूत और परिभाषिक अर्थ और काल विस्तार है उसे कोश के परिशिष्ट में सम्मिलित किया जाएगा। कोश निर्माण का यह कार्य जितना श्रम साध्य है उतना ही आसान एक बार हो जाने के बाद होगा क्योंकि इसके बाद तो प्रत्येक पांच वर्ष में संवर्धित अंक प्रकाशित एवं संपादित करना हमेशा के लिए आसान हो जायेगा।
            नदलेस के सक्रिय सदस्य उमरशाह ने कहा कि कोश का कार्य बहुत ही महत्त्वपूर्ण कार्य होगा। जिसमें लेखक के नाम के साथ उसकी कृतियों को प्रकाशक, आईएसबीएन नम्बर और प्रथम संस्करण की जानकारी के साथ सम्मिलित किया जाना चाहिए। पत्रिका है तो उसका आईएसएसएन नम्बर और उसके आरंभिक वर्ष को दर्ज किया जाना चाहिए। आज दलित साहित्य में वास्तव में इस तरह के कोश की बहुत आवश्यकता है। नदलेस की इस पहल की जितनी सराहना की जाए कम है। हमें कोश निर्माण में जितना हो सके बढ़ चढ़कर सहयोग करना चाहिए। कोश के आर्थिक सहयोग के लिए आंबेडकर प्रतिष्ठानों और संस्थाओं आदि से मदद ली जा सकती। जहां तक मुझे लगता है कि वे इससे इंकार नहीं करेंगे और इस तरह कोश का प्रकाशन भी आसान हो जायेगा।
             धीरज वनकर ने कोश निर्माण के कार्य में सक्रिय रहने की बात स्वीकारते हुए कहा कि हम सबको कम से कम दस दलित साहित्यकारों तक कोश निर्माण की सूचना पहुंचानी चाहिए अथवा उनकी जानकारी जुटानी चाहिए। इससे कोश निर्माण में किसी एक पर अतिरिक्त भार भी नहीं पड़ेगा। दलित साहित्य के अब तक के इतिहास में यह कोश निर्माण ऐतिहासिक मिसाल पेश करेगा। इसके लिए हम सब नदलेस और कोश निर्माण समिति के साथ हैं। जो भी हमसे बन पड़ेगा कोश निर्माण में मदद करेंगे। मुझे लगता है कि कोश निर्माण के महती कार्य में सहयोग करने से कोई इंकार नहीं करेगा। निश्चित ही, कोश निर्माण की हमारी यह महत्वपूर्ण परियोजना सफल होगी।
          पंजाब से जुड़े डा. हरप्रीत सिंह ने कोश निर्माण के कार्य को महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कोश में प्रत्येक लेखक का तात्विक विवरण दिया जाना चाहिए। आज दलित साहित्य में कोश की बहुत आवश्यकता है। इसके महत्त्व से कोई इंकार नहीं कर सकता है। मैं पंजाब से कम से कम बीस दलित साहित्यकारों का विवरण अकेला दे सकता हूं। मैंने अपना शोध भी दलित साहित्य पर ही पूरा किया है। मुझे भी शोध कार्य में सामग्री कलक्सन और समुचित जानकारी जुटाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इसलिए मैं कह सकता हूं कि आज दलित साहित्य में इस तरह के कोश निर्माण की बहुत आवश्यकता है। नदलेस के साथियों को इस महत्त्वपूर्ण पहल के लिए बहुत बधाई कि उन्होंने इस ऐतिहासिक परियोजना के विषय में रचनात्मक ढंग से सोचा और कार्य आरंभ किया। मैं इस परियोजना में हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हूं।
            रवि निर्मला सिंह ने कहा कि सर्वप्रथम मैं इस ऐतिहासिक परियोजना को शुरू करने लिए अमित भाई और नदलेस को बधाई दूंगा कि उसकी टीम ने इतने महत्त्वपूर्ण कार्य को शुरू किया। इसी के साथ मैं यह भी कहना चाहूंगा कि कोश निर्माण के कार्य को करने से पहले कुछ बातें सुनिश्चित कर लेनी चाहिए। जैसे कि क्या हिंदी भाषा के ही दलित साहित्यकारों को ही कोश में शामिल किया जाएगा अथवा देश भर के दलित साहित्यकारों को? आजकल दलित साहित्यकारों में दो धाराएं देखने को मिल रही हैं। अतः यह सुनिश्चित करना होगा कि कौन से वाले दलित साहित्यकार कोश में शामिल किए जाएंगे? क्या उन्हें भी कोश में शामिल किया जाएगा, जिन्होंने भक्तिकाल या आदिकाल में दलित साहित्य जैसी रचनाएं की हैं। इस तरह देखा जाए तो इन सब बातों को तय किया जाना कोश निर्माण से पहले बहुत जरूरी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि कोश निर्माण दलित साहित्य के धुंधलके को साफ कर देगा। साथ ही दलित साहित्य को स्पष्ट ऐतिहासिक पहचान और मजबूत साहित्यिक आधार देने में कामयाब रहेगा। 
           बंशीधर नाहरवाल ने भी माना कि आज दलित साहित्य एवं साहित्यकार कोश की बहुत जरूरत है। साहित्य में आज जितने साहित्यकार हैं, उनकी पहचान कर पाना बहुत मुश्किल होता है। जानकारी के अभाव में कई बार हम उस लेखक विशेष से अपेक्षा करने लगते हैं जिसका दलित साहित्य से सरोकार भी नहीं होता है। परिणामस्वरूप निराशा हाथ लगती है। मेरे साथ खुद ऐसा हो चुका है। मैंने दिल्ली विश्विद्यालय के एक प्रोफेसर को अपनी किताब भूमिका लिखने के लिए दी थी, जिसका उन्होंने कई माह तक भी अपेक्षित संज्ञान नहीं लिया। मजबूरन मुझे अपनी पुस्तक लौटा लेनी पड़ी। इसलिए कोश निर्माण दलित साहित्य और साहित्यकारों की सप्ष्ट पहचान और समझ के लिए भी बेहद जरूरी है। यह कोश निर्माण दलित साहित्य का एक नया अध्याय लिखेगा, ऐसा मेरा विश्वास है। हम हर तरह से कोश निर्माण समिति और नदलेस की टीम के साथ हैं। इनके अतिरिक्त डा. गीता कृष्णांगी, बृजपाल सहज, कुंवर नाज़ुक, रिछपाल विद्रोही और रामसूरत भारद्वाज ने भी अपने विचार रखे और कोश निर्माण के कार्य में सहयोग करने की सहमति दर्ज करवाई।
          तत्पश्चात, सर्वसम्मति से तय किया गया कि भारत भर के सभी भाषा भाषी दलित साहित्यकारों को कोश में शामिल किया जाएगा। कोश में दलित साहित्य का कालखंड हद से हद बीसवीं शताब्दी के आरंभ से आज तक माना जायेगा। दलित साहित्य लिखने वाले सभी साहित्यकारों को कोश में शामिल किया जाएगा, क्षेत्र, लिंग, भाषा, जाति, धर्म आदि किसी भी प्रकार का भेदभाव कोश निर्माण में नहीं बरता जायेगा। दलित साहित्य के लेखक, प्रकाशक, संपादक, आलोचक, कवि, पत्रकार, पत्र पत्रिकाएं, सोशल मीडिया के ऑपरेटर आदि सभी कोश में तथ्यात्मक और आवश्यक जानकारी के साथ सम्मिलित किए जायेंगे। इस हेतु जल्दी ही जानकारी उपलब्ध करवाने हेतु फॉर्मेट तैयार किया जाएगा, जिसके आधार पर कोश निर्माण समिति पूरी गंभीरता और वैज्ञानिकता से कोश निर्माण का कार्य करेगी। गोष्ठी में तात्कालिक रूप से, कोश निर्माण समिति में डा. अनिल कुमार, डा. अमित धर्मसिंह, उमरशाह, धीरज वनकर, डा. गीता कृष्णांगी, बृजपाल सहज, कुंवर नाज़ुक, डा. हरप्रीत सिंह, रवि निर्मला सिंह, रिछपाल विद्रोही, बंशीधर नाहरवाल और रामप्रीत आनंद आदि गणमान्य दलित साहित्यकार सम्मिलित किए गए। समय-समय पर कोश निर्माण समिति में और भी सदस्य सम्मिलित किए जायेंगे। गोष्ठी में कर्मशील भारती, जय प्रकाश, डा. विद्याराम, रामसूरत भारद्वाज और अमिता महरोलिया आदि उपस्थित रहे। 

डा. अमित धर्मसिंह
महासचिव, नदलेस।
13/03/2022

नोट : जो भी साथी कोश निर्माण समिति में सक्रिय सदस्य के तौर पर काम करना चाहते हैं, वे अपना नाम मुझे मैसेंजर अथवा अन्य माध्यम से उपलब्ध करवा सकते हैं।




 

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