गणतंत्र दिवस पर नदलेस ने किया कहानी वाचन और काव्य गोष्ठी का आयोजन एवं साझा कार्यक्रम की रिपोर्ट




रिपोर्ट

गणतंत्र दिवस पर नदलेस ने किया कहानी वाचन और काव्य गोष्ठी का आयोजन: -डा. अमित धर्मसिंह

दिल्ली। गणतंत्र दिवस के अवसर पर नव दलित लेखक संघ ने कहानी वाचन और काव्य पाठ का ऑनलाइन आयोजन किया। जिसमें रत्नकुमार सांभरिया की 'वर' कहानी का वाचन डा. गीता कृष्णांगी ने किया। वर कहानी गत वर्ष, अक्टूबर की हंस पत्रिका में प्रकाशित व चर्चित हुई थी। जिस पर हंस टीम ने ऑडियो संस्करण भी तैयार किया था। कार्यक्रम में कहानी की रचना प्रक्रिया पर संक्षिप्त प्रकाश रत्नकुमार सांभरिया ने डाला। कविता पाठ के अंतर्गत कर्मशील भारती, पुष्पा विवेक और डा. टेकचंद ने उत्कृष्ट काव्य पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नदलेस के अध्यक्ष डा. अनिल कुमार ने की व संचालन उपाध्यक्ष डा. अमित धर्मसिंह ने किया। 

          कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डा. अनिल कुमार ने कहा कि आज का कार्यक्रम बेहद महत्त्वपूर्ण रहा। गणतंत्र दिवस पर सभी वरिष्ठ कवियों को सुनना और जनकथाकार रत्नकुमार सांभरिया की कहानी वर का वाचन तथा उस पर स्वयं सांभरिया जी द्वारा प्रकाश डाला जाना रचनात्मक रूप से लाभप्रद रहा। विशेषकर मुझे तो बहुत कुछ सीखने समझने को मिला। इस तरह के आयोजन निश्चित ही दलित समाज और युवाओं के लिए बहुत लाभप्रद है। इस नाते नदलेस के उपाध्यक्ष डा. अमित धर्मसिंह के प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं। दलित साहित्यकारों को इस तरह के कार्यक्रमों करते रहने चाहिए और इस तरह के कार्यक्रमों में सम्मिलित भी होते रहना चाहिए। इसके अलावा एक शिकायत जो मुझे दलित साहित्यकारों से अक्सर रही है वह यह है कि उनमें से बहुत से ऐसे हैं जो मंचों से तो बहुत बड़ी बड़ी और अच्छी अच्छी बातें करते हैं और लिखते भी बहुत अच्छा है लेकिन जब जमीनी स्तर से कुछ करने की नौबत आती है तो फिर वे कहां गायब हो जाते हैं, यह चिंता का विषय है।  इसलिए इस तरफ ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने डा. टेकचंद, पुष्पा विवेक और कर्मशील भारती की कविताओं की और रत्नकुमार सांभरिया की कहानी  के वाचन के लिए डा. गीता कृष्णांगी की तथा कहानी की रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डालने के लिए सांभरिया जी की भूरि भूरि प्रसंशा करते हुए कहा कि हम सबको इनसे बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है।

          कार्यक्रम के आरंभ में डा. गीता कृष्णांगी ने हंस पत्रिका के अक्टूबर, 2021 अंक में छपी और चर्चित रही रत्नकुमार सांभरिया की कहानी वर का वाचन किया। जिसके विषय में रत्नकुमार सांभरिया ने कहा कि निश्चित रूप से डा. गीता कृष्णांगी ने कहानी वर का बहुत सुंदर वाचन किया है। जिस गंभीरता, धैर्य और ठहराव के साथ उन्होंने कहानी का वाचन किया, उससे कहानी को सुनना अत्यंत आकर्षक रहा। उन्होंने कहानी के विषय में बताया कि वर कहानी घुमंतु समाज की महिला रोशनीबाई की जागरूकता को उजागर करने के लिए लिखी गई हैं। कहानी में रोशनीबाई द्वारा अपने शराबी कवाबी और अय्यास पति बोलाराम कुचबंदा से मुक्ति पाकर वर के रूप में अपने देवर मनीराम को चुनने की दास्तान है। आज दलित साहित्य में ऐसे समाज की महिलाओं को कहानी और कविताओं का विषय बनाने की जरूरत है जो किसी कारण अभी तक सामने नहीं आ सकी है। विशेषकर घुमंतु, ट्रांस जेंडर और विभिन्न श्रमिक वर्ग की महिलाएं को कहानी आदि में लाने की बहुत आवश्यकता है। उन्होंने अपनी कहानी रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मैं अपनी कहानी को लिखने के लिए उसे कई तरह की कसौटियों पर कसता हूं। इसमें प्रमुख रूप से कथानक, भाषा, संपादक, आलोचक और पाठक की दृष्टि से परखना महत्त्वपूर्ण है। इसके अलावा कहानी को छपने भेजने के समय पत्रिकाओं की विचारधारा का भी ध्यान रखना होता है क्योंकि विपरीत विचारधारा वाली पत्रिकाएं अभी भी अच्छी से अच्छी दलित कहानी को प्रकाशित नहीं करते हैं।

          डा. टेकचंद ने आवरण, हम मौसम को सहते हैं, ईश्वर, सत्ता, गो - वंश, डर, संकल्प, शीर्षकों से काव्यपाठ किया। उनकी संकल्प कविता कुछ इस प्रकार रही -

"सुनो तानाशाह !

इस बरस मैं

खुद को बो दूंगा ज़मीन में

और एक पेड़ उगाऊंगा

जहां बहुत ऊंचाई पर

प्रेम फलेगा

वहां नहीं पहुंच पाएगा

तेरा खंजर-हाथ

तेरी दिग्भ्रमित भीड़

नहीं खोज पाएगी

उसका पता

वहां बस वो पहुंचेंगे

जो प्रेम को प्रेम पढ़ते हैं

लिखते हैं देश को देश

इंसान को इंसान समझते हैं

जिनकी नज़रों में

बांस वन लाठियों का जंगल नहीं

बांसुरियों का गर्भस्थान होगा

और गूंजेगा संगीत प्यार का

सुनो तानाशाह !

इस बरस तेरा बोया हुआ ज़हर

खरपतवार सा उखाड़ फेंका जाएगा 

मैं अकेला नहीं हूं

लाखों किसान लौट गए हैं

फिर खेतों में 

नए संकल्पों के साथ।"

          नदलेस की संरक्षक पुष्पा विवेक जिनका हाल ही में पथरीली राहों पर काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ, ने नारी चेतना और लोकतंत्र से जुड़ी कई उत्कृष्ट कविताएं प्रस्तुत की। उनकी कुछ कविताओं के अंश कुछ इस प्रकार रहे-

जंग - ए - मैदान

कोई लड़ा, जंग- ए-मैदान में

कोई सोती कौम जगाता रहा.

दूसरी है -शाखाएँ ---हमारे अस्तित्व को बोनसाई बनाने में, तुमने खींचीं थी अनेकों रेखाएँ.

तीसरी -कैसी आजादी, किसकी आजादी।

"देश का लोकतंत्र " 

सम्पन्न -सवर्ण समाज से दूर

गरीब, असहाय, बेबस, मजबूर

नाले के आसपास या

रेल की पटरियों के किनारे

जहाँ कूड़े और गंदगी के ढेर

रहने को होते मजबूर।

"व्यवस्था की धरोहर "

गर्दन काट कर गंगा में बहा देंगे

इसी फिकर के साथ, बेटियों की गर्दन आज भी झुकी रहती है।।

          कर्मशील भारती ने एक क्रांतिकारी संत रविदास और हम भारत के लोग नामक दो लंबी गद्य कविताओं का पाठ किया। रैदास वाली कविता का अंश कुछ इस प्रकार रहा कि

"एक सामाजिक क्रांतिकारी को

किसी प्रभु का भक्त कहना

उस क्रांतिकारी का अपमान है

उसके संघर्ष कर्तव्य बोध और क्रांति की ज्वाला को

कमजोर करना है

उसे कमतर करके आंकना है

उस महान क्रांतिकारी ने कहा था

पराधीनता पात है जानहूं रे मीत

रैदास दास पराधीन से कौन करे है प्रीत।"

          हम भारत के लोग नामक कविता में कर्मशील भारती जी चिंता व्यक्त करते हैं कि -

क्या भारत के लोग

अपने धर्म मान्यताओं से ऊपर रखेंगे?

या फिर अपने धर्म, मान्यताओं और जाति को

देश से ऊपर रखेंगे?

यदि वो ऐसा करेंगे तो

इतना तय है कि फिर हमारी स्वतंत्रता

दूसरी बार भी खतरे में पड़ जायेगी।

संभवतः यह हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।।

           कार्यक्रम में राजन तनवर और अनिता भारती जी ने संक्षिप्त विचार रखे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से ज्योति पासवान, अमिता मेहरोलिया, लाल चंद जैदिया, रामचंद्र प्रसाद, खन्नाप्रसाद अमीन, निरंजन राव, रानी कुमारी, डा. सत्येंद्र कुमार, डा. डी. आर. जलवानी, डा. विद्याराम, डा. दीपक लहरी, डा. डी. सी. मीणा, सुरेश उजाला, डा. नाविला सत्यदास, समय सिंह जोल, रेनू गौर, अमन यादव, जोगिंदर सिंह, सुशील झंझोट, हरिकेश गौतम, आर. एस. आघात, रजक शाह, प्रदीप ठाकुर, महावीर सिंह नाहर, रवि निर्मला सिंह, वर्ल्ड लाइफ फ्रीडम (.....), और भूप सिंह भारती आदि दलित रचनाकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी साहित्यकारों एवं श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापन बृजपाल सहज ने किया।

उपाध्यक्ष : नदलेस

27/01/2022





साझा कार्यक्रम

बेबिनार के माध्यम से पुस्तक परिचर्चा -शोषण के विरुद्ध व कवि सम्मेलन का आयोजन

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 सम्यक संस्कृति साहित्य संघ, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में तथा दलित लेखक संघ, नव दलित लेखक संघ, पुरवइया (रजि.) के संयुक्त आयोजन में आज दि 26/01/2022 को बुधवार दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक ऑनलाइन बेबीनार के माध्यम से पुस्तक परिचर्चा ( शोषण के विरुद्ध, संपादक - आर. एस. आघात) व कवि सम्मेलन का आयोजन गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में किया गया ।

     कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन आर एस आघात ने रखी व संचालन भी किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता डा अनीता भारती (अध्यक्ष - दलित लेखक संघ) ने व कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति डा गोरखप्रसाद मस्ताना (वरिष्ठ साहित्यकार,बेतिया, प.चंपारण बिहार) डा शंकर लाल (वरिष्ठ साहित्यकार,अलीगढ़), डा कर्मशील भारती (वरिष्ठ साहित्यकार) तथा डा अमित धर्मसिंह जी (नवदलेस) की रही । 

           कार्यक्रम का शुभारंभ डा संतोष पटेल द्वारा पुस्तक - शोषण के विरुद्ध पर परिचर्चा के साथ हुआ । डा संतोष पटेल द्वारा पुस्तक के सफल संपादन हेतु आर एस आघात व सफल प्रकाशन हेतु कलमकार पब्लिशर्स एण्ड प्रा लि दिल्ली के कार्यों की सराहना की । काव्य संग्रह में शामिल सभी रचनाओं की समीक्षा करते हुए डा संतोष पटेल ने कहा कि यह काव्य संग्रह पाठकों को अवश्य पढ़ना चाहिए क्योंकि इस काव्य संग्रह में किसान,मजदूर,वंचित,पिछड़ा,महिला शोषण के खिलाफ़ लेखकों द्वारा खुलकर लिखा गया है । इस पुस्तक की प्रत्येक रचना समाज को संघर्ष करने के लिए एक संदेश देती है कि अगर कोई आपका शोषण करता है तो आप उस शोषण के खिलाफ़ अवश्य खड़े हों । डा संतोष पटेल ने काव्य संग्रह को सशक्त रचनाओं से सजी हुई नए दलित साहित्य युग की सफ़ल पुस्तक बताते हुए सभी रचनाकारों की सराहना की ।

  सभी दलित साहित्य संस्थाओं संयुक्त रूप से किए गए आयोजन की कार्यक्रम में शामिल सभी साहित्यकारों व संस्था प्रतिनिधियों द्वारा सराहना की गई । कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले नवदलेस के वरिष्ठ साहित्यकार डा अमित धर्मसिंह जी ने कहा कि अगर इसी प्रकार सभी संगठन मिलजुलकर कार्य करेंगे तो साहित्य के क्षेत्र में बेहतर कार्य किया जा सकता है । कार्यक्रम को सराहना करते हुए डा शंकर लाल जी ने कहा कि हमें सदैव व्यक्तिवाद से बचकर कार्य करना चाहिए । अगर हम व्यक्तिवाद से हटकर साहित्य के क्षेत्र में कार्य करेंगे तो बेहतर कार्य हो सकेगा तथा यही दलित साहित्य के हित में रहेगा । कार्यक्रम में काव्यपाठ करने के पश्चात डा गोरखप्रसद मस्ताना जी द्वारा इस कार्यक्रम की प्रसंशा की तथा भविष्य में इसी तरह कार्य करते रहने पर जोर दिया ।

डा कर्मशील भारती जी द्वारा कवि सम्मेलन व आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि हमें सदैव अपने महापुरुषों की विचारधारा के अनुरूप कार्य करना चाहिए । संत कबीर, रविदास, संत घासीदास,महात्मा ज्योतिबाफुले, शाहूजी महाराज,डा अम्बेडकर द्वारा सदैव संगठित रहकर समाज को आगे बढ़ाने को परिकल्पना पर कार्य करना चाहिए जिससे बहुजन साहित्य को बेहतर तरीके से समाज तक पहुंचाया जा सके । दलित साहित्य ही अच्छा व बेहतर साहित्य है । 

काव्य पाठ करने वाले कवियों में डा संतोष पटेल ने अपनी रचना 'हम किसी के मोहताज नहीं हैं ' कविता को सुनाया तो छत्तीसगढ़ के कवि हरीश पांडल जी ने अपनी रचना 'बीमारी ' को सुनाया । सम्यक संस्कृति साहित्य संघ, अलीगढ़ के अध्यक्ष डा विजेंद्र प्रताप सिंह जी द्वारा भी कविता पाठ किया गया । वरिष्ठ साहित्यकार डा शंकर लाल जी ने 'बीमार नहीं हूं ' तथा मनुवाद की पोल ' रचना से सभी का ध्यान आकर्षित किया । कवियित्री इंदु रवि जी द्वारा परिवर्तन तथा लिंग का भेद ' नामक रचना से पितृ सत्ता व मनुवादी व्यवस्था के खिलाफ़ काव्य पाठ किया । छत्तीसगढ़ के कवि शैलेश विद्रोही जी द्वारा 'प्रतिनिधित्व ' तथा 'संकल्प ' रचना तो राजस्थान के कवि मोहनलाल सोनल जी द्वारा ' उतारते हैं जो दूल्हे को घोड़ी से ' रचना के माध्यम से शोषण के विरुद्ध रचना का काव्य पाठ किया । कवियित्री एन प्रीति बौद्ध जी द्वारा ' बेटियों को जहां तहां नौचा जा रहा है ' रचना के माध्यम से महिलाओं के प्रति बढ़ रहे शोषण के खिलाफ़ काव्य पाठ किया । हापुड़ के प्रसिद्ध बैखोफ शायर डा नरेश सागर जी द्वारा ' संविधान को पढ़ो व आप हिंदू क्यूं ' रचना पढ़ी तो छत्तीसगढ़ के कवि संतोष जांगडे जी द्वारा ' इतिहास लिखेंगे ' तथा दिल्ली की वरिष्ठ साहित्यकार डा पुष्पा विवेक जी द्वारा 'पेड़ की डालियां ' व डा ममता ने 'शोषण के खिलाफ लिखेंगे ' कविता सुनाई तथा बिहार को कवियित्री सुनीता द्वारा अपनी रचना ' पंगत ' के माध्यम से सभी का ध्यान आकर्षित किया । कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन के साथ डा अनीता भारती जी द्वारा भी काव्य पाठ किया गया तथा अंत में S 4 के अध्यक्ष डा विजेंद्र प्रताप सिंह जी द्वारा धन्यवाद प्रेषित किया गया ।

        कार्यक्रम के आयोजन में दलित लेखक संघ, नव दलित लेखक संघ, भोजपुरी नवजागरण मंच, का विशेष योगदान रहा । कार्यक्रम में डा चैनसिंह मीणा, समय सिंह जोल, श्याम निर्मोही जी,लवली कुमारी, भूपसिंह भारती, संजीव कुमार,अब्दुल वहाब,प्रदीप ठाकुर, अर्चना गौतम, भूताराम जाखल, हरदीप बौद्ध भीमराव गणवीर,मिलन तांबे, महादेव झाडे, प्रेमचंद मोगरे, शरद टाकभवरे, विक्की बडे़ल, विजेन्द्र बरोन्डे, विशाल चोटेल, अरूण तुर्केल, शिवा अरखेल, रतन गोंडाने, अशोक जाम्बुलकर, उपस्थित रहे ।

26/01/2022






 

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